नई दिल्ली (विशेष संवाददाता – तृप्ति प्रमाण):
देश की राजधानी में राजनीतिक तापमान एक बार फिर बढ़ गया है। बच्चों के साथ हुए कथित अत्याचार और उनके अधिकारों के हनन के मुद्दे पर सरकार और विपक्ष आमने-सामने आ गए हैं। केंद्र सरकार की प्रशासनिक कार्रवाइयों और पुलिसिया रुख के खिलाफ कड़ा विरोध दर्ज कराते हुए विपक्षी नेताओं ने साफ कर दिया है कि वे किसी भी दंडात्मक कार्रवाई से पीछे हटने वाले नहीं हैं। ‘सत्याग्रह’ के मार्ग को अपनी सबसे बड़ी ताकत बताते हुए नेताओं ने हुंकार भरी है कि सत्ता की शक्ति कितनी भी बड़ी क्यों न हो, वह जनता की न्याय की आवाज़ को नहीं दबा सकती।
“जेल जाने से नहीं डरते, न्याय की लड़ाई जारी रहेगी”
प्रदर्शन के दौरान नेताओं ने सरकार को आड़े हाथों लेते हुए कहा कि “चाहे गिरफ़्तार करो या जेल में डालो, इससे कोई फर्क नहीं पड़ता।” उन्होंने जोर देकर कहा कि सत्ता का घमंड जनता के सत्याग्रह और अहिंसक संघर्ष के सामने हमेशा कमजोर साबित हुआ है। नेताओं ने स्पष्ट किया कि जब तक हमारे मासूम बच्चों के साथ हुए अन्याय का पाई-पाई का हिसाब नहीं मिल जाता और दोषियों को सजा नहीं होती, तब तक यह आंदोलन रुकने वाला नहीं है।
मासूमों के अधिकारों और सुरक्षा पर उठे सवाल
इस राजनीतिक घमासान के केंद्र में बच्चों की सुरक्षा और उनके साथ हुए कथित अन्याय का मुद्दा है। विपक्ष का आरोप है कि सरकार जनहित और बच्चों के भविष्य से जुड़े संवेदनशील मुद्दों पर संवेदनशील रवैया अपनाने के बजाय विरोध दबाने के लिए सत्ता की ताकत का इस्तेमाल कर रही है। प्रदर्शनकारियों ने मांग की है कि मामले की निष्पक्ष जांच कराई जाए और जवाबदेही तय की जाए।
देशभर में आंदोलन तेज करने की चेतावनी
सत्याग्रह पर अड़े नेताओं और कार्यकर्ताओं ने चेतावनी दी है कि यदि सरकार ने तत्काल न्यायपूर्ण कदम नहीं उठाए, तो इस लड़ाई को देश के कोने-कोने तक ले जाया जाएगा। फिलहाल, सरकार विरोधी इस तीखे रुख और सत्याग्रह की घोषणा के बाद प्रशासनिक गलियारों में भी हलचल तेज हो गई है।