मुंबई | विधान भवन। महाराष्ट्र विधानसभा के मानसून सत्र के दौरान देर रात वसई-विरार महानगरपालिका की कार्यप्रणाली सदन में गरमाई। वसई विधानसभा क्षेत्र की विधायक स्नेहा दुबे पंडित ने रात करीब 11:40 बजे नियम 293 के तहत हुई चर्चा में महानगरपालिका के कामकाज, विकास योजनाओं में हो रही देरी और कथित वित्तीय अनियमितताओं के मुद्दे प्रमुखता से उठाए। उन्होंने वसई के नागरिकों से जुड़े बुनियादी मुद्दों पर गंभीरता से ध्यान देने की मांग की।
प्रशासनिक सुस्ती के कारण अटकी विकास परियोजनाएं
विधायक स्नेहा दुबे पंडित ने अपने संबोधन में कहा कि राज्य सरकार विकास कार्यों के लिए आवश्यक मंजूरी, नीतिगत सहयोग और आर्थिक सहायता प्रदान करने के लिए पूरी तरह तैयार है। लेकिन स्थानीय स्तर पर प्रशासनिक सुस्ती और योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन की कमी के कारण कई महत्वपूर्ण परियोजनाएं समय पर पूरी नहीं हो पा रही हैं।
जल संकट और बावड़ियों के संरक्षण पर चिंता
विधायक ने बताया कि वसई की जल समस्या के समाधान के लिए खोलसापाड़ा बांध का पानी पूरी तरह आरक्षित करने की प्रक्रिया आगे बढ़ सकती थी, लेकिन नगर निगम द्वारा वित्तीय संसाधनों की कमी का हवाला दिए जाने से यह प्रस्ताव आगे नहीं बढ़ सका। इसके अलावा जिला परिषद की 116 स्कूलों को महानगरपालिका के अधीन लेने के बाद उनके संचालन के लिए धन की कमी का मुद्दा भी उन्होंने सदन में रखा। वसई की ऐतिहासिक पहचान मानी जाने वाली बावड़ियों (बावखलों) के संरक्षण और पुनर्जीवन के लिए भी पर्याप्त बजट उपलब्ध न होने पर उन्होंने चिंता जताई।
एमएमआरडीए की परियोजनाओं में भूमि अधिग्रहण की देरी
विधायक ने सदन को अवगत कराया कि मुंबई मेट्रोपॉलिटन रीजन डेवलपमेंट अथॉरिटी (एमएमआरडीए) द्वारा लगभग 1,500 से 2,000 करोड़ रुपये तक के विकास कार्यों की तैयारी होने के बावजूद भूमि अधिग्रहण में देरी के कारण सड़क और पुल परियोजनाएं प्रभावित हो रही हैं।
अमृत 2.0 योजना के श्रेय और ठेकों में कथित अनियमितता
विधायक ने आरोप लगाया कि अमृत 2.0 योजना के तहत जलापूर्ति व्यवस्था का विकास केंद्र और राज्य सरकार के सहयोग से किया जा रहा है, जबकि इसका श्रेय स्थानीय स्तर पर लिया जा रहा है। उन्होंने नाला सफाई कार्यों के लिए किराए पर ली गई मशीनरी के ठेकों में लगभग 30 करोड़ रुपये की कथित अनियमितताओं का भी मुद्दा उठाया। उनका कहना था कि समान कार्यों के लिए अन्य नगर निगमों की तुलना में वसई-विरार में अधिक राशि खर्च किए जाने के मामले की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए।
एसटीपी परियोजनाओं में देरी और अस्पताल निर्माण पर सवाल
विधायक ने एसटीपी परियोजनाओं में हो रही देरी, कार्य गुणवत्ता पर उठ रहे सवालों और पूर्व में विवादों में रहे ठेकेदारों को दोबारा काम दिए जाने के मामले पर भी सरकार का ध्यान आकर्षित किया। उन्होंने आचोले मल्टीस्पेशलिटी अस्पताल के लिए सरकार द्वारा 250 करोड़ रुपये उपलब्ध कराए जाने के बावजूद परियोजना में हो रही देरी पर भी गहरी चिंता व्यक्त की।
2009 से 2026 तक के सार्वजनिक धन की जांच की मांग
अपने भाषण के अंत में विधायक स्नेहा दुबे पंडित ने राज्य सरकार से मांग की कि वर्ष 2009 से 2026 के बीच वसई-विरार महानगरपालिका को उपलब्ध कराए गए सार्वजनिक धन के उपयोग की विस्तृत जांच कराई जाए। उन्होंने कहा कि यदि किसी स्तर पर वित्तीय अनियमितता या भ्रष्टाचार पाया जाता है, तो संबंधित अधिकारियों और जिम्मेदार व्यक्तियों के विरुद्ध कड़ी कार्रवाई की जानी चाहिए।
संवाददाता: साहिल यादव |