प्रोटीन, फाइबर, आयरन और अन्य पोषक तत्वों से भरपूर अंकुरित चना; सेवन के सही तरीके और जरूरी सावधानियों पर नेचुरोपैथी विशेषज्ञ मीना अग्रवाल ने साझा की जानकारी
आगरा। स्वस्थ जीवन के लिए संतुलित आहार और अच्छी जीवनशैली बेहद महत्वपूर्ण हैं। रोजमर्रा के भोजन में पौष्टिक खाद्य पदार्थों को शामिल करके शरीर की पोषण संबंधी आवश्यकताओं को पूरा करने में मदद मिल सकती है। ऐसा ही एक खाद्य पदार्थ है अंकुरित काला चना, जिसमें प्रोटीन, फाइबर और कई जरूरी पोषक तत्व पाए जाते हैं।
आगरा की नेचुरोपैथी विशेषज्ञ मीना अग्रवाल ने अंकुरित चने के पोषण संबंधी महत्व, इसके सेवन के तरीकों और आवश्यक सावधानियों के बारे में जानकारी साझा की है। उनका मानना है कि शरीर के सामान्य स्वास्थ्य को बनाए रखने के लिए सही पोषण, पर्याप्त आराम और नियमित शारीरिक गतिविधि पर ध्यान देना जरूरी है।
पाचन तंत्र के लिए उपयोगी हो सकता है अंकुरित चना
अंकुरित चने में मौजूद फाइबर सामान्य पाचन क्रिया और नियमित मल त्याग में मदद कर सकता है। इसके सेवन से आंतों के स्वास्थ्य को भी सहयोग मिल सकता है। अंकुरण की प्रक्रिया चने की कुछ पोषण संबंधी विशेषताओं और पाचन क्षमता में बदलाव ला सकती है।
हालांकि, हर व्यक्ति का पाचन अलग होता है। कुछ लोगों को अधिक मात्रा में चना खाने से गैस, पेट फूलने या भारीपन की शिकायत हो सकती है। इसलिए शुरुआत कम मात्रा से करना बेहतर है।
आयरन, फोलेट और ऊर्जा के लिए महत्वपूर्ण
अंकुरित चने में आयरन, फोलेट और प्रोटीन जैसे पोषक तत्व पाए जाते हैं। आयरन हीमोग्लोबिन के सामान्य निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है, जबकि फोलेट लाल रक्त कोशिकाओं के निर्माण और कोशिकाओं के सामान्य विकास के लिए जरूरी है।
संतुलित आहार में अंकुरित चना शामिल करने से शरीर को आवश्यक पोषक तत्व प्राप्त करने में मदद मिल सकती है। हालांकि, लगातार थकान या कमजोरी होने पर केवल खानपान में बदलाव करने के बजाय चिकित्सकीय सलाह लेना जरूरी है।
वजन नियंत्रण और फिटनेस में सहायक
प्रोटीन और फाइबर से भरपूर खाद्य पदार्थ भोजन के बाद पेट भरा हुआ महसूस कराने में मदद कर सकते हैं। इस कारण अंकुरित चना वजन नियंत्रित रखने के लिए अपनाए जाने वाले संतुलित आहार का हिस्सा बन सकता है।
इसमें मौजूद वनस्पति-आधारित प्रोटीन मांसपेशियों के रखरखाव और सामान्य शारीरिक कार्यों के लिए उपयोगी है। शारीरिक गतिविधि करने वाले लोग इसे सलाद या अन्य पौष्टिक खाद्य पदार्थों के साथ अपने भोजन में शामिल कर सकते हैं।
रोग प्रतिरोधक क्षमता और समग्र पोषण
अंकुरित चने में मौजूद विभिन्न पोषक तत्व शरीर की सामान्य प्रतिरक्षा प्रणाली के कामकाज में योगदान देते हैं। संतुलित आहार से मिलने वाले विटामिन, खनिज और अन्य यौगिक शरीर की सामान्य प्रक्रियाओं को बनाए रखने में सहायक होते हैं।
हालांकि, अंकुरित चना अकेले रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने या किसी बीमारी को रोकने की गारंटी नहीं देता। इसके लिए विविधतापूर्ण आहार, पर्याप्त नींद, नियमित व्यायाम और स्वस्थ जीवनशैली भी महत्वपूर्ण हैं।
हृदय स्वास्थ्य और ब्लड शुगर के लिए संतुलित आहार का हिस्सा
अंकुरित चने में मौजूद फाइबर और अन्य पोषक तत्व हृदय के अनुकूल संतुलित आहार का हिस्सा हो सकते हैं। प्रोटीन और फाइबर युक्त भोजन रक्त शर्करा में भोजन के बाद होने वाले बदलावों को प्रभावित कर सकता है।
हालांकि, इसका प्रभाव भोजन की कुल मात्रा, अन्य खाद्य पदार्थों और व्यक्ति की स्वास्थ्य स्थिति पर निर्भर करता है। डायबिटीज या कोलेस्ट्रॉल की समस्या से जूझ रहे लोगों को इसे किसी दवा या चिकित्सकीय उपचार का विकल्प नहीं मानना चाहिए।
त्वचा और बालों के लिए पोषण का महत्व
प्रोटीन, आयरन और अन्य पोषक तत्व त्वचा और बालों के सामान्य स्वास्थ्य के लिए महत्वपूर्ण हैं। अंकुरित चना इन पोषक तत्वों को उपलब्ध कराने वाले खाद्य पदार्थों में शामिल हो सकता है।
पर्याप्त पोषण शरीर की सामान्य कोशिका प्रक्रियाओं में योगदान देता है, लेकिन केवल अंकुरित चना खाने से त्वचा में निखार आने या बालों का झड़ना रुकने की गारंटी नहीं है। बालों के लगातार झड़ने या अन्य समस्या होने पर उचित चिकित्सकीय जांच करानी चाहिए।
अंकुरित चने का सेवन कैसे करें?
मीना अग्रवाल के अनुसार, अंकुरित चने को सुबह के नाश्ते में सलाद के रूप में लिया जा सकता है। इसमें खीरा, टमाटर, नींबू और अन्य सब्जियां मिलाकर पौष्टिक सलाद बनाया जा सकता है।
जिन लोगों को कच्चे अंकुरित चने पचाने में परेशानी होती है, वे इसे अच्छी तरह भाप देकर या उबालकर खा सकते हैं। शुरुआत कम मात्रा से करें और शरीर की सहनशीलता के अनुसार सेवन की मात्रा तय करें।
कच्चे स्प्राउट्स के सेवन में सावधानी जरूरी
कच्चे या अधपके अंकुरित अनाज और दालों में हानिकारक बैक्टीरिया पनपने का जोखिम हो सकता है। इसलिए इन्हें साफ पानी और स्वच्छ परिस्थितियों में तैयार करना आवश्यक है। विशेष रूप से गर्भवती महिलाओं, छोटे बच्चों, बुजुर्गों और कमजोर प्रतिरक्षा प्रणाली वाले लोगों को कच्चे स्प्राउट्स से बचना चाहिए और अच्छी तरह पकाकर सेवन करना अधिक सुरक्षित विकल्प है।
यदि किसी व्यक्ति को किडनी की बीमारी, डायबिटीज या पाचन संबंधी समस्या है, अथवा वह नियमित दवाएं लेता है, तो आहार में बड़ा बदलाव करने से पहले योग्य चिकित्सक या पंजीकृत आहार विशेषज्ञ से सलाह लेना उचित है।
स्वस्थ जीवन के लिए संतुलित जीवनशैली जरूरी
मीना अग्रवाल का संदेश है कि स्वस्थ रहने के लिए केवल किसी एक खाद्य पदार्थ पर निर्भर नहीं रहना चाहिए। संतुलित आहार, पर्याप्त पानी, नियमित शारीरिक गतिविधि, अच्छी नींद और सकारात्मक जीवनशैली समग्र स्वास्थ्य के लिए महत्वपूर्ण हैं।
मीना अग्रवाल
नेचुरोपैथी विशेषज्ञ, आगरा
संदेश: Health is Wealth — स्वास्थ्य ही सबसे बड़ी संपत्ति है।




