मुंबई। टीवी शो ‘तुम देना साथ मेरा’ की कहानी इन दिनों पारिवारिक रिश्तों और बदलते समीकरणों के इर्द-गिर्द आगे बढ़ रही है। आगामी एपिसोड में अपराजिता और रक्षित के रिश्ते को लेकर परिवार में कई सवाल खड़े होते दिखाई देंगे, वहीं सुधा अपने बेटे विवान को लेकर भावुक नजर आएंगी।
एपिसोड की शुरुआत रक्षित और अपराजिता के घर पहुंचने से होती है, जहां मालती उनका गर्मजोशी से स्वागत करती हैं। अपराजिता के फूलों के आभूषण देखकर परिवार के सदस्य उनके बारे में सवाल करते हैं। अपराजिता बताती हैं कि ये आभूषण रक्षित ने मंदिर में उनके लिए खरीदे थे। दूसरी ओर, रक्षित चाहता है कि अपराजिता परिवार के सामने उनके रिश्ते की सच्चाई स्पष्ट कर दे। अपराजिता उसे भरोसा दिलाती है कि वह डिनर के बाद सभी से बात करेगी।
हालांकि, परिवार के सामने सच्चाई बताने से पहले अपराजिता अपनी बेटी आराध्या से बात करती है और उससे कुछ समय तक परिवार को कुछ भी न बताने का आग्रह करती है। आराध्या अपनी मां के फैसले का सम्मान करते हुए कहती है कि वह भी सही समय आने पर अपनी बात सबके सामने रखेगी।
बातचीत के दौरान विवान का जिक्र भी होता है। उसे अपने भाई के घर छोड़कर जाने के कारण दुखी बताया जाता है। डिनर के दौरान रक्षित कई बार परिवार के सामने सच्चाई बताने की कोशिश करता है, लेकिन हर बार परिस्थितियां बदल जाती हैं।
इसी बीच पड़ोसियों के आने के बाद विवान को लेकर चर्चा शुरू हो जाती है। पड़ोसियों की बातों से आराध्या नाराज हो जाती है और वह विवान का बचाव करती नजर आती है।
दूसरी ओर, सुधा अपने बेटे विवान को खाना खाने के लिए बुलाती हैं, लेकिन वह मना कर देता है। परिवार के अन्य सदस्यों के भी खाना खाने से इनकार करने से सुधा परेशान हो जाती हैं। इसी दौरान वह शीला के सामने अपने मन की बात रखते हुए कहती हैं कि शादी के बाद बेटे की जिंदगी में पत्नी की प्राथमिकता बढ़ जाती है। सुधा को विश्वास है कि रक्षित आखिरकार उनके पास वापस लौट आएगा।
इधर, अपराजिता और रक्षित के बीच बढ़ती नजदीकियां परिवार के सदस्यों और पड़ोसियों का ध्यान खींचती हैं। दोनों को एक-दूसरे का ख्याल रखते देखकर लोग उनकी जोड़ी की तारीफ करते हैं।
कहानी में एक और मोड़ तब आता है, जब रश्मि को अविनाश को नौकरी से निकाले जाने का पत्र मिलता है। मालती को इसकी जानकारी होने पर वह अविनाश से बात करती हैं और उसे रक्षित के ऑफिस में काम करने का सुझाव देती हैं। इसके बाद अविनाश रक्षित से नौकरी के लिए बात करने पहुंचता है। अपराजिता और आराध्या भी उनकी बातचीत सुन लेती हैं, जिससे आने वाले घटनाक्रम को लेकर उत्सुकता बढ़ जाती है।
वहीं सुधा अपने बेटे को लेकर अपनी भावनाएं अरविंद के सामने जाहिर करती हैं। वह खुद को परिवार के लिए गलत समझे जाने से दुखी नजर आती हैं और सवाल करती हैं कि क्या अपने बेटे की खुशी की चिंता करना गलत है। अरविंद उन्हें समझाते हैं कि मामला सिर्फ सुधा और अपराजिता के बीच का विवाद नहीं है, बल्कि सही और गलत के बीच के फर्क को समझने का है।
अब देखने वाली बात होगी कि रक्षित और अपराजिता अपने रिश्ते की सच्चाई परिवार के सामने कब रखते हैं और क्या अविनाश को रक्षित के ऑफिस में नौकरी मिलती है। साथ ही, सुधा और अपराजिता के बीच चल रहा तनाव आगे किस दिशा में जाता है।
रिपोर्ट: साहिल यादव
राष्ट्रीय हिंदी साप्ताहिक ‘तृप्ति प्रमाण’




