मुंबई: महाराष्ट्र को पूर्ण साक्षर राज्य बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाया गया है। केंद्र सरकार द्वारा संचालित ‘उल्लास नवभारत साक्षरता कार्यक्रम’ के तहत राज्य के 12 लाख 40 हजार निरक्षर नागरिकों को शिक्षा की मुख्यधारा से जोड़ने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। स्कूल शिक्षा एवं खेल विभाग के प्रधान सचिव रणजीत सिंह देओल ने बताया कि यह अभियान राज्य के साक्षरता आंदोलन को नई दिशा देगा और समाज के अंतिम पायदान पर खड़े व्यक्ति तक शिक्षा पहुंचाने में मददगार साबित होगा।
सभी विभागों को समन्वय से काम करने के निर्देश
मंत्रालय में आयोजित एक उच्च स्तरीय समीक्षा बैठक में प्रधान सचिव रणजीत सिंह देओल ने बताया कि इस महत्वाकांक्षी लक्ष्य को पूरा करने के लिए सभी संबंधित विभागों, संस्थाओं और स्थानीय प्रशासन को आपसी समन्वय के साथ काम करना होगा। उन्होंने स्पष्ट किया कि बिना समन्वय के इस अभियान की सफलता संभव नहीं है। बैठक में शिक्षा आयुक्त सचिंद्र प्रताप सिंह, माध्यमिक एवं उच्च माध्यमिक शिक्षा मंडल के अध्यक्ष श्री कुलकर्णी और शिक्षा संचालनालय (योजना) के निदेशक कृष्णकुमार पाटील सहित कई वरिष्ठ अधिकारी वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से मौजूद रहे।
स्वयंसेवी संस्थाओं और ग्रामीण क्षेत्रों पर विशेष जोर
प्रधान सचिव ने बैठक में बताया कि साक्षरता अभियान को जमीनी स्तर पर प्रभावी बनाने के लिए स्वयंसेवी संस्थाओं और स्थानीय समुदायों की सक्रिय भागीदारी अनिवार्य है। उन्होंने विशेष रूप से ग्रामीण क्षेत्रों में नवाचार आधारित कार्यक्रम चलाने पर जोर दिया, ताकि ‘कोई भी व्यक्ति निरक्षर न रहे’ इस मुख्य उद्देश्य को पूरा किया जा सके। इसके लिए व्यापक जनजागरण अभियान चलाए जाएंगे।
‘उल्लास मेला’ के आयोजन को मिली मंजूरी
बैठक में स्वयंसेवकों, नवसाक्षरों और उत्कृष्ट कार्य करने वाले लोगों को प्रोत्साहित करने के लिए ‘उल्लास मेला’ आयोजित करने पर भी विचार हुआ। इस मेले के माध्यम से विभिन्न जिलों की सफल पहलों, अनुभवों और प्रेरणादायक कहानियों का आदान-प्रदान किया जाता है। प्रशासन के अनुसार, राज्य में प्रतिवर्ष इस मेले के आयोजन के लिए आवश्यक निधि उपलब्ध कराने वाले प्रस्ताव को भी मंजूरी दे दी गई है।
पूर्ण साक्षर राज्यों के मॉडल पर होगा अमल
बैठक के दौरान राज्य साक्षरता अभियान प्राधिकरण और राज्य साक्षरता केंद्र की वार्षिक कार्ययोजना की भी समीक्षा की गई। अधिकारियों ने देश के उन राज्यों के सफल मॉडलों का अध्ययन करने पर सहमति जताई, जो पहले ही पूर्ण साक्षर घोषित हो चुके हैं। योजनाबद्ध प्रयासों और जनसहभागिता के जरिए महाराष्ट्र को जल्द ही पूर्ण साक्षर राज्य बनाने की दिशा में तेजी से काम किया जाएगा।