चलती ट्रेन से फूल, प्लास्टिक की थैलियां और पूजा सामग्री खाड़ी में फेंकने से प्रदूषण और हादसों का खतरा; रेलवे पुलिस से निगरानी और कार्रवाई की मांग
वसई | ब्यूरो चीफ: राजेश कोरी
वसई खाड़ी में पश्चिम रेलवे की लोकल और लंबी दूरी की ट्रेनों से निर्माल्य, प्लास्टिक की थैलियां और अन्य कचरा पानी में फेंके जाने की शिकायतें सामने आ रही हैं। इससे खाड़ी में प्रदूषण बढ़ने और जलीय जीवों तथा पर्यावरण को नुकसान पहुंचने की आशंका है। वहीं, चलती ट्रेन से फेंकी जाने वाली वस्तुओं के कारण आसपास से गुजरने वाले नागरिकों की सुरक्षा को लेकर भी चिंता जताई जा रही है।
वसई, नायगांव और भाईंदर रेलवे स्टेशनों के बीच लगभग 8.39 किलोमीटर लंबा रेल मार्ग है। विरार से चर्चगेट और चर्चगेट से विरार जाने वाली लोकल ट्रेनों के साथ लंबी दूरी की गाड़ियां भी इस मार्ग से गुजरती हैं। आरोप है कि खाड़ी के पुल से ट्रेन गुजरने के दौरान कुछ यात्री पूजा-पाठ और त्योहारों के बाद एकत्रित निर्माल्य को प्लास्टिक की थैलियों में भरकर पानी में फेंक देते हैं।
नारियल लगने से युवक की मौत की घटना का भी उल्लेख
स्थानीय नागरिकों के अनुसार, पहले चलती ट्रेन से खाड़ी में विसर्जन के लिए फेंका गया नारियल नायगांव पुल के पास से गुजर रहे एक युवक को लगा था, जिससे उसकी मौत हो गई थी। इस घटना के बाद रेलवे पुलिस प्रशासन की ओर से निर्माल्य फेंकने वालों के खिलाफ कार्रवाई और जनजागरूकता अभियान चलाने का आश्वासन दिए जाने की बात कही गई थी।
हालांकि, स्थानीय नागरिकों का आरोप है कि घटना के बाद भी इस समस्या पर प्रभावी रोक नहीं लग पाई है। त्योहारों के दौरान फूल, पूजा सामग्री, देवताओं की तस्वीरें और छोटी-बड़ी मूर्तियां प्लास्टिक की थैलियों में भरकर चलती ट्रेन से खाड़ी में फेंके जाने की शिकायतें सामने आती रहती हैं।
इस तरह खाड़ी में कचरा पहुंचने से जल प्रदूषण बढ़ने और जलीय जैव विविधता प्रभावित होने की आशंका बनी रहती है।
ग्रामीणों की सुरक्षा पर भी चिंता
स्थानीय ग्रामस्थ किरण भोईर ने बताया कि चलती लोकल से निर्माल्य और अन्य वस्तुएं फेंके जाने के कारण पहले भी ग्रामीणों के घायल होने की घटनाएं हुई हैं। उनके अनुसार, स्कूली बच्चों और नौकरीपेशा लोगों को भी ऐसी घटनाओं में चोटें आई हैं। उन्होंने समस्या पर प्रभावी कार्रवाई की जरूरत जताई।
वहीं, वैजनाथ भोईर ने बताया कि गांव के कई लोग नाव से आवागमन करते हैं। कुछ लोगों को मजबूरी में सुबह के समय या बारिश के दिनों में रेलवे पटरियों के रास्ते से भी गुजरना पड़ता है। ऐसे में ट्रेन से फेंकी जाने वाली मूर्तियों, तस्वीरों और अन्य वस्तुओं की चपेट में आने से गंभीर चोट लगने का खतरा बना रहता है।
उन्होंने बताया कि पहले पुलिस के जनजागरूकता अभियान के दौरान खाड़ी में निर्माल्य फेंकने की घटनाओं में कमी आई थी, लेकिन त्योहारों के समय यह समस्या दोबारा बढ़ने लगती है।
रेलवे पुलिस से नियमित निगरानी और कार्रवाई की मांग
स्थानीय नागरिकों और पर्यावरण प्रेमियों ने रेलवे पुलिस प्रशासन से खाड़ी के पुल पर नियमित निगरानी रखने, नियमों का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ उचित कार्रवाई करने और व्यापक जनजागरूकता अभियान चलाने की मांग की है।
नागरिकों का कहना है कि पूजा सामग्री और निर्माल्य का निपटान पर्यावरण के अनुकूल तरीके से किया जाना चाहिए। चलती ट्रेन से वस्तुएं फेंकना न केवल खाड़ी के पर्यावरण के लिए नुकसानदेह हो सकता है, बल्कि आसपास मौजूद लोगों की सुरक्षा के लिए भी खतरा पैदा कर सकता है।
अब देखना होगा कि वसई खाड़ी में निर्माल्य और कचरा फेंकने की समस्या पर रोक लगाने के लिए रेलवे पुलिस प्रशासन किस तरह के कदम उठाता है। नियमित निगरानी, जनजागरूकता और उचित निपटान व्यवस्था इस समस्या को कम करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है।




