विरार। वसई-विरार शहर महानगरपालिका में सड़क मरम्मत कार्यों के नाम पर किए गए 44.92 करोड़ रुपये के अतिरिक्त खर्च को लेकर जारी विवाद के बीच, स्थायी समिति ने इस विवादित प्रस्ताव को फिलहाल स्थगित कर दिया है। भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने इस निर्णय को अपने विरोध और दबाव की जीत करार दिया है और पूरे मामले की स्वतंत्र जांच की मांग की है।
स्थायी समिति में फिर से उठा विवाद
भाजपा के विरोधी पक्षनेता मनोज पाटिल के अनुसार, इस प्रस्ताव को पहले महासभा में मंजूरी दिलाने का प्रयास किया गया था, लेकिन विपक्ष के तीव्र विरोध के कारण उसे वापस लेना पड़ा था। इसके बाद यह प्रस्ताव स्थायी समिति की बैठक में विषय क्रमांक 22 के तहत पुनः मंजूरी के लिए लाया गया। भाजपा सदस्यों ने इस दौरान आक्रामक रुख अपनाते हुए प्रस्ताव का विरोध किया, जिसके बाद समिति ने इसे स्थगित कर दिया।
वित्तीय अनियमितताओं के आरोप
मनोज पाटिल ने गंभीर वित्तीय अनियमितताओं के आरोप लगाए हैं। उनके अनुसार, प्रभाग ए से आई तक सड़क मरम्मत कार्यों के लिए 502.96 करोड़ रुपये की स्वीकृत बजटीय राशि थी, लेकिन 547.88 करोड़ रुपये खर्च किए जाने का दावा किया गया है। इसी अतिरिक्त 44.92 करोड़ रुपये के खर्च को कार्योत्तर मंजूरी देने की मांग की गई थी।
पाटिल ने बताया कि एक वित्तीय वर्ष में 56.56 करोड़ रुपये की मूल स्वीकृति के मुकाबले 161.24 करोड़ रुपये खर्च दिखाकर 104.68 करोड़ रुपये का अतिरिक्त व्यय किया गया। उन्होंने आरोप लगाया कि इस प्रक्रिया से ठेकेदारों को लाभ पहुंचाया गया है।
पारदर्शिता और जांच की मांग
विपक्ष ने सवाल उठाया है कि बिना पूर्व मंजूरी के करोड़ों रुपये खर्च कर बाद में स्वीकृति लेने की प्रक्रिया आखिर किस नियम के तहत अपनाई गई। मनोज पाटिल ने मांग की है कि पूरे मामले की स्वतंत्र तकनीकी एजेंसी से जांच और ऑडिट कराया जाए। उनका कहना है कि जब तक खर्च और कार्यों की पारदर्शिता साबित नहीं होती, तब तक वित्तीय मंजूरी नहीं दी जानी चाहिए।
स्थायी समिति द्वारा प्रस्ताव को फिलहाल स्थगित किए जाने को भाजपा ने पारदर्शिता और जवाबदेही की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बताया है।