विरार: वसई-विरार शहर महानगरपालिका द्वारा पानी के बिलों में की गई बेतहाशा बढ़ोतरी और थोपे गए नए करों को लेकर शहर की सियासत गर्मा गई है। नागरिकों पर पड़े इस अतिरिक्त आर्थिक बोझ के खिलाफ विपक्षी दलों ने प्रशासन को चौतरफा घेरने की पूरी रणनीति तैयार कर ली है। आगामी 17 जुलाई को होने वाली महानगरपालिका की महासभा में इस मुद्दे पर जोरदार हंगामा होने के आसार हैं। इस बार विपक्ष के भारी दबाव के चलते बढ़े हुए पानी के बिलों को रद्द करने के प्रस्ताव को महासभा की आधिकारिक कार्यसूची में भी शामिल कर लिया गया है।
दोगुने हुए पानी के बिल, जनता में भारी आक्रोश
विपक्षी पार्षदों का सीधा आरोप है कि अप्रैल 2026 से मार्च 2027 के सत्र के लिए जो पानी के बिल जारी किए गए हैं, वे पिछले साल के मुकाबले तकरीबन दोगुने होकर आए हैं। बिना किसी पूर्व सूचना के की गई इस भारी बढ़ोतरी से आम जनता की जेब पर सीधा डाका पड़ा है। विपक्षी नेताओं का कहना है कि इस तानाशाही फैसले से पूरे वसई-विरार क्षेत्र के नागरिकों में तीव्र असंतोष है और लोग तुरंत इन बढ़े हुए बिलों को वापस लेने की मांग कर रहे हैं।
वादे से मुकरा प्रशासन: बिना सुविधा के वसूला जा रहा टैक्स
“बजट सत्र और पिछली महासभाओं में प्रशासन ने जनता को भरोसा दिलाया था कि शहर पर कोई नया टैक्स नहीं लादा जाएगा। इसके बावजूद चोर दरवाजे से ‘जल आपूर्ति लाभकर’ और ‘मलप्रवाह सुविधा लाभकर’ जैसे नए टैक्स जोड़ दिए गए। जब शहर के आधे से ज्यादा इलाकों में न तो पीने का नियमित पानी मिल रहा है और न ही सीवरेज (ड्रेनेज) की सही व्यवस्था है, तो फिर किस बात का टैक्स वसूला जा रहा है?” — मनोज पाटिल, विपक्षी नेता
17 जुलाई की महासभा पर टिकीं शहरवासियों की निगाहें
इस जनविरोधी नीति के खिलाफ विपक्ष की ओर से प्रज्ञा पाटिल ने आधिकारिक तौर पर बिल रद्दीकरण का प्रस्ताव रखा है, जिसे गटनेता अशोक शेळके का भी पुरजोर समर्थन मिला है। इससे पहले भी विपक्षी नेताओं ने मनपा आयुक्त को पत्र लिखकर इन दोनों नए टैक्सों को तुरंत खारिज करने की मांग की थी। अब हर किसी की नजर 17 जुलाई की इस अहम बैठक पर है कि प्रशासन इस जन-आक्रोश के आगे झुकता है या विपक्ष के तीखे सवालों से बचकर निकलता है।