प्रेग्नेंसी और प्रसव के बाद महिलाओं पर होने वाली टिप्पणियों के खिलाफ अभिनेत्रियों ने उठाई आवाज |

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मुंबई। प्रेग्नेंसी और बच्चे के जन्म के बाद महिलाओं के शरीर में होने वाले प्राकृतिक बदलावों को लेकर सोशल मीडिया पर की जाने वाली टिप्पणियों और ट्रोलिंग के खिलाफ कई अभिनेत्रियों ने अपनी आवाज उठाई है। कलाकारों ने कहा कि मां बनने के बाद किसी महिला के शरीर या वजन को लेकर टिप्पणी करने के बजाय उसके स्वास्थ्य, भावनाओं और व्यक्तिगत अनुभव को समझने की जरूरत है।

अभिनेत्री शीबा अज़हर ने कहा कि प्रसव के बाद का समय हर महिला के लिए अलग और बेहद व्यक्तिगत होता है। हर महिला के शरीर की रिकवरी का अपना समय होता है, इसलिए नई माताओं पर जल्द से जल्द पुराने रूप में लौटने का दबाव नहीं बनाया जाना चाहिए।

आराधना शर्मा ने सोशल मीडिया पर बढ़ती बॉडी कमेंट्री पर चिंता जताते हुए कहा कि बच्चे को जन्म देने के बाद महिला के शरीर की आलोचना करने के बजाय उसके साहस और अनुभव का सम्मान किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि किसी तस्वीर के आधार पर किसी व्यक्ति की निजी जिंदगी के बारे में निष्कर्ष निकालना उचित नहीं है।

पल्लवी चटर्जी ने कहा कि मातृत्व के बाद किसी महिला से एक निश्चित समयसीमा में एक खास शारीरिक रूप हासिल करने की अपेक्षा नहीं की जानी चाहिए। उनके अनुसार, हर महिला की प्रेग्नेंसी और पोस्टपार्टम रिकवरी अलग होती है और मातृत्व किसी महिला के सपनों या पहचान को सीमित नहीं करना चाहिए।

वहीं नेहा हरसोरा ने प्रसव के बाद महिलाओं पर शरीर को तुरंत पहले जैसा करने के दबाव को अवास्तविक सौंदर्य अपेक्षाओं से जोड़ा। उन्होंने कहा कि शरीर में बदलाव जीवन का स्वाभाविक हिस्सा हैं और सेलिब्रिटी होने के बावजूद कलाकारों की अपनी निजी जिम्मेदारियां और चुनौतियां होती हैं।

अश्मिता बख्शी ने भी प्रसव के तुरंत बाद महिलाओं के सामान्य दिखने की अपेक्षा को अनुचित बताया। उन्होंने कहा कि इस दौरान महिला की प्राथमिकता अपने स्वास्थ्य और बच्चे की देखभाल होनी चाहिए।

ऐश्वर्या राज भाकुनी ने मातृत्व के दौरान महिलाओं के शारीरिक और भावनात्मक अनुभव को समझने की जरूरत पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि महिला को अपनी गति से स्वस्थ होने के लिए समय और स्थान मिलना चाहिए।

सभी कलाकारों की बातों में एक समान संदेश सामने आया कि मातृत्व के बाद महिला के शरीर को लेकर टिप्पणी करने के बजाय उसके स्वास्थ्य, भावनाओं और व्यक्तिगत अनुभव का सम्मान किया जाना चाहिए। उन्होंने सोशल मीडिया यूजर्स से अपील की कि किसी की तस्वीर या सार्वजनिक उपस्थिति देखकर उसकी निजी परिस्थितियों के बारे में निष्कर्ष निकालने के बजाय संवेदनशील और मानवीय रवैया अपनाएं।

रिपोर्ट: साहिल यादव
राष्ट्रीय हिंदी ‘तृप्ति प्रमाण’

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