वसई-विरार में जलवाहिनी विस्तार को रफ्तार, 5 करोड़ रुपये मंजूर |

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ग्रामीण और आदिवासी पाड़ों तक पानी पहुंचाने पर जोर, संकरी गलियों में 80 से 100 मिमी की पाइपलाइन बिछाने की योजना

वसई। वसई-विरार शहर महानगरपालिका क्षेत्र के ग्रामीण इलाकों, आदिवासी पाड़ों और घनी बस्तियों में जलापूर्ति व्यवस्था को मजबूत करने के लिए महापालिका ने जलवाहिनी विस्तार को गति देने का फैसला किया है। हाल ही में हुई महासभा में विभिन्न व्यास की आंतरिक जलवाहिनियां बिछाने के लिए करीब 5 करोड़ रुपये के प्रस्ताव को मंजूरी दी गई है। यह राशि अगले तीन वर्षों में जलापूर्ति से संबंधित विभिन्न कार्यों पर खर्च की जाएगी।

वर्तमान में वसई-विरार शहर में करीब 400 एमएलडी पानी की आपूर्ति हो रही है। इसके बावजूद कई आदिवासी पाड़ों, ऊंचाई वाले क्षेत्रों, दुर्गम इलाकों और संकरी गलियों में रहने वाले नागरिकों तक पर्याप्त पानी नहीं पहुंच पा रहा है। महापालिका की जलापूर्ति व्यवस्था में पाइपलाइन नेटवर्क के विस्तार और सुधार के लिए विभिन्न योजनाओं के तहत काम जारी है। महापालिका के जल विभाग की आधिकारिक जानकारी के अनुसार जलस्रोतों, जलवाहिनियों और जलापूर्ति व्यवस्था के रखरखाव तथा विस्तार की जिम्मेदारी जल विभाग के पास है।

गांवों और बस्तियों के विस्तार के कारण कई आदिवासी पाड़े मुख्य वितरण पाइपलाइन से दूर हो गए हैं। ऐसे क्षेत्रों में एचडीपीई और जीआई पाइपलाइन बिछाने की जरूरत बताई गई है। वहीं, संकरी गलियों में बड़ी पाइपलाइन बिछाना संभव नहीं होने के कारण 80 से 100 मिलीमीटर व्यास की जलवाहिनियां बिछाने की योजना है।

प्रस्ताव के तहत नई पाइपलाइन बिछाने के साथ-साथ क्षतिग्रस्त जलवाहिनियों को बदलने, क्रॉस कनेक्शन की मरम्मत और जलापूर्ति नेटवर्क से जुड़े अन्य आवश्यक कार्य किए जाएंगे।

महासभा में नगरसेविका ज्योत्स्ना भगली ने बेलकडी, खोलांडे, देवदल, कर्नालपाड़ा और पलाटपाड़ा सहित ग्रामीण क्षेत्रों में पानी की समस्या का मुद्दा उठाया। वहीं नगरसेवक सुनील आचोळकर ने लंबे समय से लंबित जलापूर्ति संबंधी मांगों पर ध्यान आकर्षित किया।

सभागृह नेता प्रफुल्ल साने ने जलवाहिनी नेटवर्क का पूरा नक्शा जनप्रतिनिधियों के सामने प्रस्तुत करने की मांग की, ताकि अलग-अलग क्षेत्रों में पाइपलाइन की स्थिति और प्रस्तावित विस्तार की स्पष्ट जानकारी मिल सके।

महासभा में पेल्हार, कोल्ही गांव और कर्नालपाड़ा जैसे ऊंचाई वाले क्षेत्रों की जल समस्या पर भी चर्चा हुई। ऐसे स्थानों पर कुएं, बोअरवेल और छोटे जलशुद्धीकरण संयंत्रों के माध्यम से पानी उपलब्ध कराने पर भी विचार किया जा रहा है।

भाजपा नगरसेवक हितेश जाधव ने जलवाहिनियों के नक्शे स्थानीय कर्मचारियों को उपलब्ध कराने की मांग की। उनका कहना था कि पाइपलाइन टूटने की स्थिति में यदि कर्मचारियों को उसका सटीक स्थान पता रहे तो मरम्मत कार्य तेजी से किया जा सकता है।

महापौर अजीव पाटील ने कहा कि आदिवासी और दुर्गम पाड़ों सहित शहर के प्रत्येक नागरिक तक पर्याप्त पानी पहुंचाने के लिए जलवाहिनी से जुड़े कामों को फास्ट ट्रैक पर पूरा किया जाएगा।

तृप्ति प्रमाण

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