क्रीड़ा संकुल और नाट्यगृह के उद्घाटन कार्यक्रम को लेकर भाजपा ने प्रशासनिक प्रक्रिया और जनप्रतिनिधियों की भूमिका का मुद्दा उठाया
वसई-विरार | रिपोर्ट: तृप्ति प्रमाण
वसई-विरार शहर में विरार के क्रीड़ा संकुल और नालासोपारा के नाट्यगृह के लोकार्पण को लेकर भाजपा और बहुजन विकास आघाड़ी (बविआ) के बीच राजनीतिक विवाद सामने आया। सार्वजनिक निधि से तैयार इन परियोजनाओं के उद्घाटन कार्यक्रम को लेकर दोनों पक्षों की अलग-अलग भूमिका के चलते दिनभर राजनीतिक माहौल गर्म रहा।
भाजपा का कहना था कि महानगरपालिका की संपत्तियों के उद्घाटन को किसी राजनीतिक आयोजन अथवा व्यक्तिगत अवसर से नहीं जोड़ा जाना चाहिए। पार्टी ने मांग की कि महानगरपालिका की निर्धारित प्रक्रिया और प्रोटोकॉल के अनुसार सभी संबंधित जनप्रतिनिधियों को आमंत्रित कर कार्यक्रम आयोजित किया जाए।
इसी मुद्दे को लेकर भाजपा के सांसद डॉ. हेमंत सावरा, विधायक स्नेहा दुबे-पंडित, विधायक राजन नाईक और विरोधी पक्ष नेता मनोज पाटील सहित बड़ी संख्या में पदाधिकारी और कार्यकर्ता विरार क्रीड़ा संकुल पहुंचे। सुबह से ही परिसर में कार्यकर्ताओं की भीड़ जुटने लगी और ढोल-ताशों तथा नारेबाजी के बीच भाजपा ने अपना विरोध दर्ज कराया।
स्थिति उस समय और गरमा गई, जब भाजपा नेताओं को क्रीड़ा संकुल के ऊपरी हिस्से में जाने से रोका गया। इसके बाद भाजपा नेताओं ने परिसर में बैठकर अपना विरोध जारी रखा। हालांकि, नेताओं ने कार्यकर्ताओं से संयम बनाए रखने की अपील की।
इस दौरान सांसद डॉ. हेमंत सावरा ने वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारियों से बातचीत कर समाधान निकालने का प्रयास किया। भाजपा की ओर से मांग की गई कि महानगरपालिका आयुक्त स्वयं सामने आकर लोकार्पण कार्यक्रम और प्रशासन की भूमिका स्पष्ट करें।
विधायक राजन नाईक ने स्थानीय कार्यकर्ताओं के साथ समन्वय बनाए रखा, जबकि विरोधी पक्ष नेता मनोज पाटील ने महानगरपालिका की प्रक्रिया और निर्वाचित प्रतिनिधियों की भूमिका से जुड़े मुद्दे उठाए। विधायक स्नेहा दुबे-पंडित ने भी आंदोलन के दौरान कार्यकर्ताओं का नेतृत्व किया और प्रशासन के समक्ष भाजपा की मांगें रखीं।
दोनों पक्षों के समर्थकों के आमने-सामने आने के बाद कुछ समय के लिए तनावपूर्ण स्थिति बनी। भाजपा नेताओं ने अपने समर्थकों से शांत रहने की अपील की। पुलिस प्रशासन ने भी स्थिति को नियंत्रण में रखने के लिए दोनों पक्षों के बीच समन्वय का प्रयास किया।
बाद में दोनों पक्षों के प्रतिनिधियों के बीच चर्चा हुई। भाजपा ने स्पष्ट किया कि उसका विरोध विकास परियोजनाओं के लोकार्पण के खिलाफ नहीं है, बल्कि उसकी आपत्ति कार्यक्रम की प्रक्रिया और उसमें जनप्रतिनिधियों की भूमिका को लेकर है। भाजपा की ओर से कहा गया कि यदि लोकार्पण महानगरपालिका की निर्धारित प्रक्रिया के तहत किया जाता है, तो उसे आपत्ति नहीं होगी।
हालांकि, दोनों पक्षों के बीच सहमति नहीं बन सकी। इसके बाद भाजपा नेताओं और कार्यकर्ताओं ने अपने स्तर पर दोनों परियोजनाओं के लोकार्पण की घोषणा की। आचोले स्थित नाट्यगृह को लेकर भी इसी तरह का राजनीतिक विवाद सामने आया।
पूरे घटनाक्रम में भाजपा ने इसे प्रशासनिक प्रक्रिया और जनप्रतिनिधियों की भूमिका का मुद्दा बताया, जबकि बविआ की ओर से कार्यक्रम को लेकर अपनी अलग राजनीतिक भूमिका रखी गई।
रिपोर्ट: तृप्ति प्रमाण
स्थान: वसई-विरार, पालघर




