वसई-विरार शहर महानगरपालिका के नालासोपारा-आचोले स्थित नाट्यगृह और विरार-बोलींज स्थित क्रीड़ा संकुल के लोकार्पण समारोह को लेकर शुरू हुआ विवाद थमने का नाम नहीं ले रहा है। महापौर अजीव पाटील द्वारा 4 अक्टूबर को आयोजित पत्रकार परिषद में दिए गए स्पष्टीकरण पर विपक्ष के नेता मनोज पाटील ने 5 अक्टूबर को पत्रकार परिषद आयोजित कर प्रतिक्रिया दी।
मनोज पाटील ने महापौर के दावों को खारिज करते हुए बहुजन विकास आघाड़ी पर नियमों और प्रोटोकॉल की अनदेखी करने का आरोप लगाया।
उन्होंने कहा कि सरकारी निर्णय यानी जीआर को कानून नहीं मानने संबंधी महापौर का कथित बयान संवैधानिक पद की गरिमा के अनुरूप नहीं है। मनोज पाटील के अनुसार, निर्वाचित जनप्रतिनिधियों और राजशिष्टाचार का सम्मान करना महानगरपालिका की जिम्मेदारी है।
उन्होंने आरोप लगाया कि महानगरपालिका आयुक्त को विश्वास में लिए बिना और जिलाधिकारी कार्यालय से प्रोटोकॉल के अनुसार निमंत्रण पत्रिका को मंजूरी लिए बिना निमंत्रण भेजे गए।
क्रीड़ा संकुल 9 साल बाद भी अधूरा होने का दावा
विरार-बोलींज क्रीड़ा संकुल के निर्माण में देरी और बढ़ती लागत का मुद्दा भी मनोज पाटील ने उठाया। उनके मुताबिक नवंबर 2017 में परियोजना का भूमिपूजन हुआ था। करीब 39.05 करोड़ रुपये की मूल लागत वाली इस परियोजना को 18 महीने में पूरा किया जाना था, लेकिन छह बार समयवृद्धि के बावजूद करीब नौ वर्ष बाद भी काम पूरा नहीं हुआ है।
मनोज पाटील ने दावा किया कि परियोजना की लागत अब 70 करोड़ रुपये से अधिक हो चुकी है और अधिकारियों के अनुसार इसे पूरा होने में अभी एक से डेढ़ वर्ष और लग सकते हैं।
नालासोपारा नाट्यगृह की लागत बढ़ने का आरोप
नालासोपारा-आचोले स्थित नाट्यगृह को लेकर पाटील ने कहा कि वर्ष 2014 में करीब 3 करोड़ रुपये की लागत से दो वर्ष में पूरा होने वाला यह प्रकल्प वर्षों से लंबित है और इसकी लागत अब करीब 8 करोड़ रुपये तक पहुंच गई है।
उन्होंने सवाल उठाया कि वर्षों तक परियोजनाओं को लंबित रखने से बढ़े 40 करोड़ रुपये से अधिक के अतिरिक्त खर्च की जिम्मेदारी कौन लेगा। उन्होंने कहा कि निर्माण में हुई देरी से खिलाड़ियों की एक पूरी पीढ़ी तथा कलाकारों और दर्शकों को हुए नुकसान के लिए सत्ताधारी पक्ष को जनता से माफी मांगनी चाहिए।
‘महानगरपालिका किसी की निजी संपत्ति नहीं’
मनोज पाटील ने कहा कि वर्ष 2017 में भी तत्कालीन आयुक्त लोखंडे के कार्यकाल में तत्कालीन पालकमंत्री स्वर्गीय विष्णु सावरा और सांसद स्वर्गीय चिंतामण वनगा की उपस्थिति को लेकर निमंत्रण पत्रिका पर विवाद हुआ था। उनके अनुसार, विरोध के बाद महानगरपालिका को उचित निमंत्रण पत्रिका जारी कर भूमिपूजन करना पड़ा था।
उन्होंने कहा कि महानगरपालिका किसी की निजी संपत्ति नहीं है और न ही यह कोई पारिवारिक कार्यक्रम है। पाटील ने आरोप लगाया कि निर्वाचित जनप्रतिनिधियों को नजरअंदाज कर राजनीतिक वर्चस्व दिखाने का प्रयास किया गया।
उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि महापौर अजीव पाटील पर पूर्व विधायक क्षितिज ठाकुर के कथित रूप से असफल नेतृत्व को दोबारा राजनीतिक रूप से स्थापित करने का दबाव है, जिसके चलते नियमबाह्य बयान दिए जा रहे हैं।
अंत में मनोज पाटील ने कहा कि महायुति के सभी पदाधिकारी नियमबाह्य कामकाज और जनप्रतिनिधियों के कथित अपमान के खिलाफ एकजुट हैं तथा भविष्य में इस तरह के कामकाज को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।




