अंबादास दानवे ने पुलिस प्रशासन से किया सवाल; कहा – “मछुआरों के जाल को हाथ लगाने वालों को नहीं छोड़ेंगे”; हर्षवर्धन सपकाल ने भी परियोजना के खिलाफ भरी हुंकार
पालघर | प्रतिनिधि :
वाढवण : पालघर जिले में प्रस्तावित वाढवण बंदरगाह सहित विभिन्न विनाशकारी परियोजनाओं के विरोध में वरोर में आयोजित विशाल जनआक्रोश सभा में राजनीतिक नेताओं ने राज्य और केंद्र सरकार पर जमकर निशाना साधा। वाढवण बंदरगाह से स्थानीय मछुआरों, किसानों, आदिवासी समुदाय, पर्यावरण और पारंपरिक रोजगार पर पड़ने वाले संभावित प्रभावों का मुद्दा उठाते हुए इस परियोजना को रद्द करने की मांग की गई।
इस सभा में शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) के विधान परिषद में विपक्ष के नेता अंबादास दानवे और महाराष्ट्र प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष हर्षवर्धन सपकाल ने आक्रामक रुख अपनाते हुए सरकार के खिलाफ अपनी आवाज बुलंद की।
अंबादास दानवे की पुलिस प्रशासन को सीधी चेतावनी!
सभा को संबोधित करते हुए अंबादास दानवे ने मछुआरों के पारंपरिक मछली पकड़ने के अधिकारों की रक्षा के लिए आक्रामक रुख अपनाने का आह्वान किया। उन्होंने कहा, “मछुआरों के जाल को हाथ लगाने वालों के हाथ तोड़ने की हिम्मत रखनी होगी।”
उन्होंने आंदोलनकारियों से पुलिस से नहीं डरने की अपील करते हुए कहा कि पुलिस को कानून और व्यवस्था बनाए रखने की अपनी जिम्मेदारी निभानी चाहिए। पुलिस को सरकार, ठेकेदारों या उद्योगपतियों का पक्ष नहीं लेना चाहिए।
उन्होंने चेतावनी दी कि यदि आंदोलनकारियों के खिलाफ पुलिस कार्रवाई की गई तो उसका संगठित तरीके से जवाब दिया जाएगा। उन्होंने बताया कि जिले की 52 से अधिक संगठन एकजुट हो चुके हैं। यदि प्रत्येक संगठन स्वतंत्र रूप से आंदोलन में उतरता है, तो प्रशासन को जनशक्ति की ताकत दिखाई जा सकती है।
उन्होंने कहा कि बार-बार ज्ञापन सौंपने के बजाय आंदोलनकारियों में एक दिन जिलाधिकारी कार्यालय का घेराव करने की भी ताकत है।
अदाणी समूह को बंदरगाह सौंपने के मुद्दे पर सरकार पर निशाना
वाढवण बंदरगाह को अदाणी समूह को सौंपने के मुद्दे पर दानवे ने सरकार को घेरा। उन्होंने सवाल उठाया कि इस बंदरगाह परियोजना की आखिर आवश्यकता क्या है? इससे स्थानीय लोगों को वास्तविक रूप से क्या फायदा होगा और इस परियोजना के कारण पालघर की जनता के पारंपरिक व्यवसायों का क्या होगा?
अपने भाषण के दौरान उन्होंने अदाणी समूह से जुड़े हवाई अड्डों पर मादक पदार्थों और सोने की तस्करी को लेकर भी गंभीर आरोप लगाए। हालांकि, ये आरोप उनके भाषण में लगाए गए हैं और इनकी स्वतंत्र रूप से पुष्टि होना आवश्यक है।
उन्होंने मांग की कि वाढवण बंदरगाह के संबंध में स्थानीय जनता के मन में उठ रहे सवालों का सरकार स्पष्ट जवाब दे।
“भूमिपुत्रों के साथ हम कंधे से कंधा मिलाकर खड़े रहेंगे” – हर्षवर्धन सपकाल
महाराष्ट्र प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष हर्षवर्धन सपकाल ने भी वाढवण बंदरगाह विरोधी आंदोलन को समर्थन देते हुए सरकार की विकास नीति की आलोचना की।
उन्होंने कहा कि पालघर जिले के भूमिपुत्रों, किसानों, मछुआरों और आदिवासी समुदाय के हितों को प्राथमिकता मिलनी चाहिए। स्थानीय लोगों के अस्तित्व और आजीविका को खतरे में डालने वाला विकास उन्हें स्वीकार नहीं है।
उन्होंने वाढवण बंदरगाह सहित प्रस्तावित विनाशकारी परियोजनाओं को रद्द किए जाने तक संघर्ष जारी रखने का संकल्प व्यक्त किया। साथ ही सभा में मौजूद वक्ताओं ने आगामी जिला परिषद, विधानसभा और लोकसभा चुनावों में पालघर जिले को भाजपा मुक्त बनाने का राजनीतिक संकल्प भी व्यक्त किया।
किसानों और मछुआरों के पारंपरिक व्यवसायों को दी जाए प्राथमिकता!
सभा में मौजूद वक्ताओं ने कहा कि पंचसितारा होटलों और बड़ी परियोजनाओं के विकास की तुलना में स्थानीय किसानों, मछुआरों और आदिवासियों की पारंपरिक जीवनशैली का संरक्षण अधिक महत्वपूर्ण है।
उन्होंने कहा कि समुद्र तट, खेती, जंगल और प्राकृतिक संसाधन ही पालघर जिले की वास्तविक संपत्ति हैं।
इस दौरान महिलाओं से भी बड़ी संख्या में आंदोलन में शामिल होने की अपील की गई। ग्रामीण और पहाड़ी क्षेत्रों के नागरिकों से प्रस्तावित परियोजनाओं के संभावित प्रभावों के प्रति जागरूक रहने और आंदोलन में भाग लेने का आह्वान किया गया।
वक्ताओं ने बंदरगाह विस्तार योजना रद्द होने तक संघर्ष जारी रखने की शपथ लेने की अपील भी की।
52 से अधिक संगठनों की एकजुटता; आंदोलन को मिल रहा व्यापक स्वरूप
वाढवण बंदरगाह सहित पालघर जिले की विभिन्न प्रस्तावित परियोजनाओं के विरोध में 52 से अधिक संगठन एकजुट हुए हैं।
वरोर में आयोजित इस सभा में विभिन्न राजनीतिक दलों के नेता, सामाजिक कार्यकर्ता, मछुआरा संगठनों के प्रतिनिधि, किसान और आदिवासी समुदाय के लोग बड़ी संख्या में उपस्थित रहे।
सभा में वक्ताओं ने दावा किया कि आंदोलन की ताकत दिन-ब-दिन बढ़ रही है। शुरुआत में सीमित संख्या में शुरू हुए इस आंदोलन में अब बड़ी संख्या में नागरिक शामिल हो रहे हैं। उन्होंने विश्वास जताया कि आने वाले समय में लाखों की संख्या में भूमिपुत्र सड़कों पर उतरेंगे।
पालघर के भविष्य का सवाल बना प्रमुख मुद्दा!
वाढवण बंदरगाह विरोधी आंदोलन अब केवल एक बंदरगाह परियोजना तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि यह जमीन, समुद्र, पर्यावरण, पारंपरिक रोजगार, स्थानीय लोगों के अधिकारों और आने वाली पीढ़ियों के भविष्य से जुड़ा एक व्यापक मुद्दा बनता जा रहा है।
विभिन्न राजनीतिक दलों और संगठनों की संयुक्त भागीदारी से इस आंदोलन को नया राजनीतिक और सामाजिक आयाम मिल रहा है।
अब पूरे पालघर जिले की नजर इस बात पर टिकी है कि सरकार आंदोलनकारियों की मांगों पर क्या कदम उठाती है और वाढवण बंदरगाह परियोजना को लेकर स्थानीय जनता की आशंकाओं का समाधान किस प्रकार करती है।


