मुंबई, दि. 11: आरोग्य विमा कंपनियों द्वारा क्लेम मंजूरी में आने वाली कठिनाइयों और अस्पतालों के अवाजवी चिकित्सा बिलों से संबंधित शिकायतों के मद्देजन्य, सार्वजनिक स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री प्रकाश आबिटकर ने मंत्रालय में भारतीय बीमा विनियामक और विकास प्राधिकरण (IRDA), निजी बीमा कंपनियों एवं निजी अस्पतालों की संयुक्त बैठक आयोजित की थी। इस बैठक में स्वास्थ्य मंत्री ने निर्देश दिए कि रोगी को केंद्रबिंदू मानकर निजी बीमा कंपनियों और अस्पतालों को सेवाएं प्रदान करनी चाहिए।
आरोग्य विमा कंपनियों द्वारा क्लेम मंजूरी में आने वाली कठिनाइयों और निजी अस्पतालों द्वारा लगाए जा रहे अवाजवी बिलों के संबंध में स्वास्थ्य मंत्री के पास शिकायतें प्राप्त हुई थीं। इसी संदर्भ में इस मामले के लिए एक निश्चित कार्यप्रणाली निर्धारित करने के उद्देश्य से स्वास्थ्य मंत्री प्रकाश आबिटकर ने मंत्रालय में बैठक बुलाई थी। बैठक में रिलायंस, टाटा, एसबीआई, स्टार हेल्थ, एचडीएफसी, एआईजी सहित राज्य की प्रमुख बीमा कंपनियों तथा वोकार्ड, लीलावती, जसलोक, रिलायंस सहित राज्य के प्रमुख अस्पतालों के प्रतिनिधि उपस्थित थे।
स्वास्थ्य मंत्री की सूचना के अनुसार, बीमा कंपनियों, निजी अस्पतालों, भारतीय बीमा विनियामक और विकास प्राधिकरण एवं स्वास्थ्य विभाग के प्रतिनिधि एक मंच पर आए और रोगी कल्याण के लिए निश्चित कार्यप्रणाली निर्धारित करने पर चर्चा की।
आरोग्य विमा धारकों की संख्या दिन-प्रतिदिन बढ़ रही है और उन्हें संतोषजनक सेवाएं प्रदान करना अस्पतालों और बीमा कंपनियों की जिम्मेदारी है। यदि इस संबंध में कोई गलत बात सामने आती है, तो सरकार इसके संबंध में उचित कार्रवाई करेगी। राज्य में मुंबई, पुणे, नागपुर जैसे शहरों में अद्यतन चिकित्सा सेवाएं, विशेषज्ञ डॉक्टर और बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध होने के कारण मेडिकल टूरिजम व्यवसाय के लिए बड़ा अवसर है। स्वास्थ्य मंत्री ने कहा कि अच्छी सेवाएं प्रदान करके अपनी विश्वसनीयता बढ़ाई जाए।
राज्य के सभी अस्पतालों को भारतीय बीमा विनियामक और विकास प्राधिकरण (IRDA) के पोर्टल पर पंजीकरण कराने और आवश्यक जानकारी को अद्यतन रखने के निर्देश देते हुए, उन्होंने क्लेम मंजूरी के लिए निश्चित समय सीमा निर्धारित करने की आवश्यकता पर जोर दिया। अस्पताल और बीमा कंपनियों के बीच समन्वय की कमी के कारण अक्सर रोगियों को मानसिक और आर्थिक परेशानी का सामना करना पड़ता है। इसलिए, रोगियों को तत्काल उपचार मिले और क्लेम प्रक्रिया अधिक पारदर्शी व सरल हो, इसके लिए सरकार आवश्यक निर्णय लेगी, ऐसा उन्होंने बताया।
राज्य में वर्तमान में लगभग सात से आठ हजार अस्पताल बीमा सेवाएं प्रदान कर रहे हैं और कुछ स्थानों पर गड़बड़ियों की शिकायतें सरकार को प्राप्त हुई हैं। ऐसे मामलों में बॉम्बे नर्सिंग एक्ट के तहत कार्रवाई करने के निर्देश दिए गए हैं। साथ ही, बड़े अस्पतालों के लिए उपचार के दरों को स्पष्ट करने वाला दर-पत्रक लगाना अनिवार्य करने की आवश्यकता भी उन्होंने व्यक्त की। एक ही बीमारी के लिए विभिन्न अस्पतालों में अलग-अलग दरें वसूले जाने के पृष्ठभूमि में, बैठक में स्टैंडर्ड ट्रीटमेंट प्रोटोकॉल तैयार करने की आवश्यकता व्यक्त की गई। साथ ही, बीमा कंपनियों और अस्पतालों के लिए सामान्य ‘एम्पैनलमेंट’ तंत्र स्थापित करने के संबंध में भी विचार चल रहे हैं, ऐसी जानकारी स्वास्थ्य मंत्री ने दी।
इस अवसर पर मंजूर और अस्वीकृत किए गए क्लेम तथा प्राप्त शिकायतों की जानकारी नियमित रूप से स्वास्थ्य विभाग को प्रस्तुत करने के लिए कहा गया। भारतीय बीमा विनियामक और विकास प्राधिकरण (IRDA) से महाराष्ट्र की शिकायतें प्राप्त कर उन पर अध्ययन और उपाययोजनाएं की जाएंगी, और इस संबंध में कार्रवाई करने वाला महाराष्ट्र पहला राज्य बनेगा।
चिकित्सा व्यवसाय में विश्वसनीयता बढ़ाना सरकार की प्राथमिकता है और किसी भी रोगी को उपचार या बीमा क्लेम प्राप्त करने में कठिनाई न हो, इसके लिए सरकार प्रतिबद्ध है, ऐसा स्वास्थ्य मंत्री आबिटकर ने स्पष्ट किया। इस बैठक में स्वास्थ्य सेवा आयुक्त डॉ. कादंबरी बलकवडे, स्वास्थ्य निदेशक डॉ. नितिन अंबाडेकर, सह-निदेशक डॉ. सुनीता गोल्हाइट तथा सार्वजनिक स्वास्थ्य विभाग के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।
आरोग्य विमाधारकों के लिए बड़ा निर्णय; अस्पतालों और विमा कंपनियों पर कड़ी कार्रवाई के संकेत |
Published On: March 12, 2026 6:39 pm
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