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राजनीति में विचारधारा से कभी नहीं किया समझौता: राज्यसभा में दिग्विजय सिंह का वक्तव्य |

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कांग्रेस के वरिष्ठ नेता दिग्विजय सिंह ने आज राज्यसभा में अपने राजनीतिक जीवन के अनुभवों और लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं पर महत्वपूर्ण विचार रखे। सिंह ने अपने राजनीतिक सफर का जिक्र करते हुए बताया कि छात्र जीवन में राजनीति से दूर रहने के बावजूद परिस्थितियों ने उन्हें 22 वर्ष की आयु में नगर पालिका अध्यक्ष, 30 वर्ष में विधायक, 33 वर्ष में सांसद और 40 वर्ष में मुख्यमंत्री का दायित्व सौंपा।

उन्होंने स्पष्ट किया कि उन्होंने अपने पूरे राजनीतिक जीवन में कभी विचारधारा से समझौता नहीं किया। साथ ही, उन्होंने यह भी कहा कि उन्होंने कभी किसी राजनीतिक सहयोगी या प्रतिद्वंद्वी के प्रति कटुता नहीं पाली। ‘मतभेद होते थे, लेकिन मनभेद किसी से नहीं हुआ’ – यह उनकी राजनीतिक शैली का मूल मंत्र रहा है।

सिंह ने अपने वक्तव्य में पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी, राजीव गांधी और चंद्रशेखर जैसे दिग्गज नेताओं से अपने संबंधों का जिक्र करते हुए कहा कि इन नेताओं से प्रभावित होकर ही उन्होंने अपना राजनीतिक सफर तय किया है।

लोकतंत्र की बुनियाद पर बात करते हुए सिंह ने कहा कि संसद में चर्चा और संवाद ही लोकतंत्र की सच्ची शक्ति है। सत्ता पक्ष की यह जिम्मेदारी होती है कि वह विपक्ष के साथ चर्चा के बाद कोई रास्ता निकाले। उन्होंने वर्तमान समय में देश में बढ़ती सांप्रदायिक कटुता पर गहरी चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि यह प्रवृत्ति लोकतंत्र, संविधान, समाज और देश के हित में नहीं है।

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Rajesh