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बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने विधान परिषद और भाजपा अध्यक्ष नितिन नवीन ने विधानसभा की सदस्यता से दिया इस्तीफा |

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नीतीश के सियासी उत्तराधिकारी और सूबे के मुख्यमंत्री चुनने की कवायद तेज

ब्यूरो चीफ विनोद प्रसाद

पटना, बिहार में फिर राजनीति हलचल शुरू हो गई है। बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने राज्यसभा सदस्य चुने जाने के बाद विधान परिषद की सदस्यता से इस्तीफा दे दिया है। सूत्रों के मुताबिक सीएम आवास पर ही बिहार विधान परिषद के सभापति अवधेश नारायण सिंह को इस्तीफा सौंपा है। नीतीश कुमार ने आखिरी बार 2004 में नालंदा से लोकसभा का चुनाव लड़ा था। उसके बाद से वे लगातार विधान परिषद के सदस्य रहे। वहीं, आपको बता दें कि नीतीश कुमार ने आज बिहार विधान परिषद की सदस्यता से तो इस्तीफा दे दिया है लेकिन मुख्यमंत्री की कुर्सी छोड़ने पर सस्पेंस बना हुआ है। एमएलसी पद से इस्तीफा देने के बाद भी नीतीश कुमार 6 महीने तक मुख्यमंत्री रह सकते हैं। लेकिन असल लड़ाई उनके सियासी उत्तराधिकारी की है। नीतीश के विधान परिषद से इस्तीफा देने के साथ ही उनके सियासी उत्तराधिकारी को चुनने की कवायद तेज हो जाएगी। सियासी गलियारों में नए मुख्यमंत्री को लेकर तरह-तरह की चर्चाएं चल रही हैं। मौजूदा डिप्टी सीएम और बीजेपी नेता सम्राट चौधरी का नाम मुख्यमंत्री पद के लिए प्रमुख दावेदारों में से एक

माना जा रहा है। वहीं, निशांत कुमार को लेकर भी कयास लगाए जा रहे हैं। बिहार के सियासी गलियारे से एक और बड़ी खबर सामने आई है। भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन ने विधायक पद से इस्तीफा दे दिया है। उन्होंने सोमवार को बांकीपुर विधानसभा निर्वाचन क्षेत्र से अपना इस्तीफा सौंप दिया। राज्यसभा के लिए निर्वाचित होने के बाद, दोनों नेताओं ने संवैधानिक नियमों का पालन करते हुए सोमवार को अपना-अपना त्यागपत्र सौंप दिया। दरअसल, नीतीश कुमार और नितिन नवीन को हाल ही में राज्यसभा के लिए चुना गया है। संसद के उच्च सदन में अपना नया सफर शुरू करने से पहले नितिन नवीन ने बांकीपुर की जनता के प्रति अपना आभार व्यक्त किया। नितिन नवीन ने अपने इस्तीफे की घोषणा करते हुए एक भावुक संदेश शेयर किया। उन्होंने याद किया कि कैसे जनवरी 2006 में उनके पिता और वरिष्ठ नेता स्वर्गीय नवीन किशोर प्रसाद सिन्हा के निधन के बाद, उन्होंने अप्रैल 2006 में पटना पश्चिम से उपचुनाव जीतकर अपने राजनीतिक जीवन की शुरुआत की थी। पिछले 20 वर्षों का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा “पिताजी द्वारा सींचे गए इस क्षेत्र को मैंने हमेशा अपने परिवार की तरह समझा। बांकीपुर की देवतुल्य जनता ने मुझे लगातार 5 बार अपना प्रतिनिधि चुनकर जो स्नेह और आशीर्वाद दिया, वह मेरे लिए अमूल्य है।”

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Rajesh