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विकास के वादे धरे के धरे: पिथौरागढ़ में 18 करोड़ के बाद भी सड़कें बनीं ‘खतरे का रास्ता’ |

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स्रोत: तृप्ति प्रमाण। राष्ट्रीय हिंदी साप्ताहिक

देशभर में बुनियादी ढांचे के तेज़ विकास और विश्वस्तरीय राजमार्ग निर्माण की चर्चाएं लगातार सुर्खियों में रहती हैं। केंद्रीय मंत्रालय और प्राधिकरणों द्वारा सड़क निर्माण की गति व गुणवत्ता पर कई उपलब्धियां दर्ज की जा रही हैं। परंतु, उत्तराखंड के दूरदराज इलाकों की जमीनी हकीकत इन राष्ट्रीय बयानों से काफी भिन्न नजर आती है। पिथौरागढ़ जिले के बेरीनाग–पुरानथल–मुवानी मार्ग की स्थिति इतनी जर्जर हो चुकी है कि स्थानीय निवासी इसे सड़क नहीं, बल्कि यातना और जोखिम का मार्ग कहने लगे हैं।

बजट का सवाल: 18 करोड़ 35 लाख का हिसाब कहाँ?

प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना (PMGSY) के तहत मंजूर इस लगभग 23.9 किलोमीटर लंबे मार्ग पर करीब 18.35 करोड़ रुपये खर्च करने की आधिकारिक जानकारी उपलब्ध है। परियोजना स्थल पर लगे सूचना पट्टों पर राशि और विवरण अंकित हैं, परंतु धरातल पर नतीजे शून्य के करीब हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि इस भारी राशि के बावजूद सड़क का अधिकांश हिस्सा आज भी कच्चा, गड्ढों से भरा और धूल-मिट्टी से आच्छादित है। केवल कुछ सौ मीटर तक ही डामरीकरण की झलक मिलती है, जबकि शेष मार्ग यातायात के लिए बेहद असुरक्षित बना हुआ है।

2024 में स्वीकृति, तीन साल बाद भी अधूरा निर्माण

सरकारी रिकॉर्ड के अनुसार यह मार्ग वर्ष 2024 में प्रशासनिक मंजूरी प्राप्त कर चुका है। उस समय ग्रामीणों को उम्मीद थी कि जल्द ही बेहतर कनेक्टिविटी और सुगम आवागमन संभव होगा। परंतु, तीन वर्ष से अधिक समय बीत जाने के बावजूद कार्य पूर्ण नहीं हो पाया है। निर्माण गति अत्यंत धीमी होने और गुणवत्ता पर सवाल उठने के कारण स्थानीय आबादी में असंतोष गहराता जा रहा है। योजनाओं की घोषणाएं कागजों तक सीमित रह गई हैं, जबकि जमीनी वास्तविकता बदस्तूर बनी हुई है।

यात्रा बनी संकट: वाहन चालक और पैदल यात्री दोनों परेशान

मौजूदा स्थिति में इस मार्ग पर सफर करना हर गुजरते दिन के साथ और कठिन होता जा रहा है। गड्ढों, अनियमित ढलान और बिखरे पत्थरों के कारण वाहन तेज झटके खाते हैं, जिससे दुर्घटनाओं का खतरा हमेशा बना रहता है। बरसात के मौसम में यह स्थिति और भी भयावह हो जाती है। बुजुर्ग, विद्यार्थी और रोजमर्रा के श्रमिकों को रोजाना की इस असहज यात्रा का सामना करना पड़ रहा है। सुरक्षा, स्वास्थ्य और समय की बर्बादी के लिहाज से यह मार्ग अब एक गंभीर चिंता का विषय बन चुका है।

पारदर्शिता और त्वरित कार्रवाई की मांग

स्थानीय जनप्रतिनिधियों और सामाजिक संगठनों ने प्रशासन से मांग की है कि इस परियोजना के खर्च, ठेकेदार की कार्यप्रणाली और प्रगति की स्वतंत्र समीक्षा की जाए। उन्होंने तत्काल निर्माण पूर्ण करने, गुणवत्ता नियंत्रण सुनिश्चित करने और भविष्य में ऐसी लापरवाही रोकने के लिए कड़े कदम उठाने की अपील की है। जब तक ठोस कार्रवाई नहीं होती, तब तक पिथौरागढ़ के ग्रामीण विकास के दावों और जमीनी हकीकत के बीच के फासले को पाटना मुश्किल दिख रहा है।

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Rajesh