तृप्ति प्रमाण – राष्ट्रीय हिंदी साप्ताहिक
मुंबई: महाराष्ट्र राज्य मंत्रिमंडल ने विभिन्न समाजों के आर्थिक सशक्तिकरण को लेकर एक बड़ा फैसला लिया है। मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट बैठक में परशुराम आर्थिक विकास महामंडल, वीर शिरोमणी महाराणा प्रताप आर्थिक विकास महामंडल और श्री वासवी कन्यका आर्थिक विकास महामंडल में नए पदों के सृजन को मंजूरी दे दी गई है। इस निर्णय का मुख्य उद्देश्य जरूरतमंद लोगों तक सरकारी योजनाओं का लाभ सीधे तौर पर पहुंचाना है।
आर्थिक सशक्तिकरण पर विशेष जोर
राज्य सरकार ने बताया कि इन तीनों महामंडलों के जरिए व्यक्तिगत और समूह ऋण ब्याज प्रतिपूर्ति जैसी महत्वपूर्ण योजनाएं संचालित की जाती हैं। कैबिनेट ने प्रत्येक महामंडल में 4 नियमित और 5 आउटसोर्स पदों को मंजूरी दी है। इन नए पदों के आने से योजनाओं का क्रियान्वयन तेज होगा और अधिक से अधिक लाभार्थियों तक इसका फायदा पहुंच सकेगा।
प्रशासनिक कामकाज को बनाया जाएगा प्रभावी
मंजूर किए गए पदों में प्रबंध निदेशक, महाप्रबंधक और सहायक प्रबंधक (प्रशासन, वित्त एवं लेखा) शामिल हैं। इन पदों पर प्रतिनियुक्ति के आधार पर भर्ती की जाएगी। वहीं, मल्टी टास्किंग स्टाफ की नियुक्ति आउटसोर्सिंग के जरिए की जाएगी। प्रशासनिक सुधार के लिए राज्य सरकार ने इन तीनों महामंडलों के लिए सालाना करीब 1.18 करोड़ रुपये के खर्च को भी स्वीकृति प्रदान की है।
कंपनी अधिनियम के तहत बदला गया स्वरूप
मंत्रिमंडल ने 23 सितंबर 2024 के अपने पिछले फैसले में संशोधन करते हुए एक और अहम कदम उठाया है। सरकार ने 50 करोड़ रुपये की शेयर पूंजी वाले प्रावधान को हटा दिया है। अब ये तीनों महामंडल कंपनी अधिनियम 2013 की धारा 8 के तहत राज्य सरकार की गारंटी के साथ और बिना शेयर पूंजी वाली कंपनी के रूप में काम करेंगे। सरकार ने यह भी स्पष्ट किया है कि योजनाओं और प्रशासनिक खर्चों के लिए हर साल पर्याप्त वित्तीय सहायता उपलब्ध कराई जाएगी।
स्वरोजगार और विकास की दिशा में मजबूत कदम
राज्य सरकार के इस फैसले को विभिन्न वर्गों के आर्थिक विकास और स्वरोजगार को बढ़ावा देने की दिशा में एक बहुत ही सकारात्मक और ठोस कदम माना जा रहा है। इससे जमीनी स्तर पर उद्यमिता और रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे।