वसई-विरार शहर महानगरपालिका (वीवीसीएमसी) क्षेत्र में सड़कों की हालत और मरम्मत कार्य को लेकर निर्माण विभाग की कार्यशैली पर सवाल उठने लगे हैं। स्थानीय नागरिकों का आरोप है कि सड़कों के बीचों-बीच बने गड्ढों को नहीं भरा जा रहा है, बल्कि सड़क के किनारों पर डामर डालकर पैचवर्क किया जा रहा है। इस अनोखे मरम्मत कार्य से नागरिकों में भारी नाराजगी देखी जा रही है।
नालासोपारा में अनोखा सड़क मरम्मत कार्य
यह मामला नालासोपारा पश्चिम के प्रभाग समिति ‘ई’ के अंतर्गत आने वाले छेड़ा मार्ग और पाटणकर पार्क क्षेत्र का है। जानकारी के अनुसार, यहां सड़क के मुख्य हिस्से में मौजूद बड़े गड्ढों को अनदेखा कर किनारों पर लंबी पट्टियों में डामरीकरण का काम किया गया है। नागरिकों का कहना है कि इससे दुर्घटनाओं का खतरा बना हुआ है और असली समस्या वैसी की वैसी बनी हुई है।
सरकारी धन की बर्बादी का आरोप
स्थानीय निवासियों का मानना है कि बारिश के ठीक पहले किए जा रहे इस प्रकार के पैचवर्क से सरकारी पैसे का दुरुपयोग हो रहा है। स्थानीय निवासी हरीश ने बताया कि बारिश का पानी आते ही यह नया डामर उखड़ जाएगा, जिससे गड्ढों की समस्या फिर से सामने आएगी। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि आखिरकार इस तरह के काम किसके इशारे पर किए जा रहे हैं और इसका फायदा किसे मिल रहा है।
जनप्रतिनिधियों और अधिकारियों पर गंभीर आरोप
सामाजिक कार्यकर्ताओं का कहना है कि जब नागरिकों और सामाजिक संगठनों के दबाव के बाद काम शुरू होता है, तो कुछ स्थानीय नेता उसका श्रेय लेने के लिए आगे आ जाते हैं। सामाजिक कार्यकर्ता शंकर ने बताया कि जनप्रतिनिधियों को निर्माण कार्य की गुणवत्ता की जांच करनी चाहिए, लेकिन वे केवल उद्घाटन समारोह तक सीमित रहते हैं।
इसके अलावा, निर्माण विभाग के उप अभियंता सूर्यवंशी पर भी गंभीर आरोप लगाए गए हैं। नागरिकों का कहना है कि नौ प्रभागों की जिम्मेदारी संभाल रहे इस अधिकारी का क्षेत्र में पता नहीं चलता और वे नागरिकों के फोन कॉल का जवाब भी नहीं देते हैं। ऐसे में नए इंजीनियरों की भर्ती कर प्रशासनिक व्यवस्था सुधारने की मांग की जा रही है।
जांच और कार्रवाई की मांग, आंदोलन की चेतावनी
नागरिकों और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने मांग की है कि सड़क किनारों पर किए गए इस संदिग्ध पैचवर्क की उच्च स्तरीय जांच कराई जाए। बिना असली गड्ढों को भरे भुगतान करने वाले ठेकेदारों और जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई होनी चाहिए। यदि प्रशासन ने इस मामले पर तुरंत ध्यान नहीं दिया, तो प्रभाग कार्यालय और महानगरपालिका मुख्यालय के बाहर विरोध प्रदर्शन करने की चेतावनी दी गई है।
इस पूरे मामले में उप अभियंता सूर्यवंशी से प्रतिक्रिया लेने का प्रयास किया गया, लेकिन उनसे संपर्क नहीं हो सका क्योंकि उन्होंने कॉल रिसीव नहीं किया। प्रशासन की ओर से अभी तक कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है और मामले की जांच जारी है।