विरार (5 अगस्त 2026): स्मार्ट मीटर लगाए जाने और लगातार बढ़ रहे बिजली बिलों के विरोध में विरार के महाडा रोड स्थित महावितरण (MSEDCL) कार्यालय के बाहर ‘जन बिजली अधिकार आंदोलन’ बुधवार को लगातार तीसरे दिन भी उग्र रूप से जारी रहा। आंदोलन में बड़ी संख्या में स्थानीय नागरिकों ने हिस्सा लेकर प्रशासन के खिलाफ अपनी नाराजगी दर्ज कराई।
बढ़े हुए बिलों और जबरन स्मार्ट मीटर लगाने का आरोप प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि नए स्मार्ट मीटर स्थापित होने के बाद उपभोक्ताओं के बिजली बिलों में अचानक और अप्रत्याशित वृद्धि हुई है। इससे आम जनता पर भारी आर्थिक बोझ पड़ रहा है। आंदोलनकारियों ने बिजली बिलों में हुई बढ़ोतरी पर तुरंत रोक लगाने, स्मार्ट मीटर जबरन थोपने की प्रक्रिया बंद करने और उपभोक्ताओं की लंबित शिकायतों का त्वरित समाधान करने की मांग की है।
MSEDCL अधिकारी के बयान पर भड़के प्रदर्शनकारी आंदोलन के दौरान MSEDCL अधिकारी रविंद्र कुमार तायडे के उस बयान का कड़ा विरोध किया गया, जिसमें उन्होंने स्मार्ट मीटर को ‘अनिवार्य’ बताया था। आंदोलनकारियों ने इसे भ्रामक जानकारी करार देते हुए कहा कि महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस खुद यह स्पष्ट कर चुके हैं कि घरेलू बिजली उपभोक्ताओं के लिए स्मार्ट मीटर अनिवार्य नहीं हैं।
आंदोलन को और तेज करने की चेतावनी कांग्रेस जिला महासचिव सोहेल खान के नेतृत्व में चल रहे इस प्रदर्शन को कांग्रेस जिला कार्याध्यक्ष रामदास वाघमारे, यूथ कांग्रेस जिला महासचिव सत्येशु सिंह, जिला उपाध्यक्ष अशरफ अली और सामाजिक कार्यकर्ता रवि भूषण का समर्थन मिला है। नेताओं ने चेतावनी दी है कि जब तक MSEDCL प्रशासन भ्रम दूर कर ठोस फैसला नहीं लेता, तब तक यह आंदोलन जारी रहेगा।
मुख्य बिंदु:
- स्थान: महाडा रोड स्थित MSEDCL कार्यालय, विरार।
- प्रमुख मांग: जबरन स्मार्ट मीटर लगाना बंद हो और बढ़े बिल वापस लिए जाएं।
- विवाद का कारण: MSEDCL अधिकारी द्वारा स्मार्ट मीटर को ‘अनिवार्य’ बताने वाला बयान।
- नेहरू/सीएम का रुख: आंदोलनकारियों के अनुसार, सीएम देवेंद्र फडणवीस के मुताबिक घरेलू उपभोक्ताओं के लिए स्मार्ट मीटर अनिवार्य नहीं।