आशा सेविकाओं और मजदूरों का फूटा गुस्सा
भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (भाकपा) द्वारा 10 अगस्त को अर्नाला पुलिस स्टेशन के समक्ष एक विशाल ‘जेल भरो’ आंदोलन का आयोजन किया गया। केंद्र और राज्य सरकार की मजदूर विरोधी नीतियों, नए श्रम कानूनों को वापस लेने और आशा सेविकाओं के वेतन में वृद्धि सहित कई स्थानीय मांगों को लेकर सैकड़ों कार्यकर्ताओं ने लाल झंडे के साथ हुंकार भरी।
वधावन बंदरगाह और पुलिसिया दमन पर साधा निशाना
आंदोलन के दौरान जिला परिषद सदस्य कॉमरेड शेरू वाघ ने सरकार पर तीखा हमला बोला। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार पुलिसिया तंत्र का दुरुपयोग कर जनता की आवाज दबा रही है और वधावन बंदरगाह जैसे विनाशकारी प्रोजेक्टों के जरिए स्थानीय निवासियों को विस्थापित करने की साजिश रच रही है। प्रदर्शन में शामिल युवाओं, किसानों और आशा सेविकाओं ने इंकलाबी गीतों और गगनभेदी नारों से पूरा परिसर गुंजायमान कर दिया।
प्रमुख नेताओं के नेतृत्व में हुआ प्रदर्शन, पुलिस ने लिया हिरासत में
इस विशाल प्रदर्शन का नेतृत्व भाकपा के तालुका सचिव कॉमरेड अनिरुद्ध मेहेर, सहसचिव कॉमरेड अंकुश खरपडे, पार्वती पाडेकर, सुचिता चव्हाण, भारती जाधव और आरती वांगड ने किया। आंदोलन को देखते हुए अर्नाला पुलिस ने सैकड़ों कार्यकर्ताओं को हिरासत में लिया। लगभग एक घंटे चले इस लोकतांत्रिक विरोध के बाद पुलिस ने सभी प्रदर्शनकारियों को रिहा कर दिया।