बाढ़ नियंत्रण को प्राथमिकता देने के साथ सरकारी जमीन के सुनियोजित विकास पर जोर
वसई। वसई-विरार क्षेत्र में सरकारी जमीन के पर्यावरणपूरक और टिकाऊ विकास तथा अतिरिक्त एफएसआई से जुड़े मामलों को लेकर मुंबई में नगर विकास विभाग के अपर मुख्य सचिव असीम कुमार गुप्ता की अध्यक्षता में महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई। बैठक में क्षेत्र के विकास, बाढ़ नियंत्रण, सार्वजनिक सुविधाओं और अतिरिक्त एफएसआई से जुड़े विभिन्न मुद्दों पर चर्चा हुई।
विधायक स्नेहा दुबे पंडित ने ऑनलाइन माध्यम से बैठक में भाग लेते हुए क्षेत्र के विकास से जुड़े कई सुझाव और मांगें रखीं।
सरकारी जमीन के सुनियोजित विकास पर जोर
वसई-विरार में तेजी से हो रहे शहरीकरण के बीच सड़क, यातायात, पार्किंग, बारिश के पानी की निकासी और पर्यावरण से जुड़ी चुनौतियों का मुद्दा बैठक में उठाया गया।
विधायक स्नेहा दुबे पंडित ने सुझाव दिया कि सरकारी जमीन का उपयोग केवल व्यावसायिक निर्माण के लिए करने के बजाय भविष्य की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए सार्वजनिक सुविधाओं और पर्यावरण संरक्षण के लिए योजनाबद्ध तरीके से किया जाना चाहिए।
उन्होंने क्षेत्र में हर वर्ष सामने आने वाली बाढ़ की समस्या के स्थायी समाधान को विकास योजनाओं की प्राथमिकता बनाने की मांग की।
इसके लिए सरकारी जमीन पर फ्लड होल्डिंग पोंड, अर्बन लेक और भूजल पुनर्भरण व्यवस्था विकसित करने का सुझाव दिया गया। इसके अलावा जैव विविधता उद्यान, आपदा प्रबंधन एवं पर्यावरण अनुसंधान केंद्र, खेल परिसर, इनडोर स्टेडियम, नाट्यगृह, मल्टीस्पेशलिटी अस्पताल, रिसर्च सेंटर, मल्टीलेवल पार्किंग और सार्वजनिक उद्यान जैसी सुविधाओं को विकास योजना में शामिल करने की मांग रखी गई।
अतिरिक्त एफएसआई के इस्तेमाल की जांच की मांग
बैठक में वसई-विरार में अतिरिक्त एफएसआई के इस्तेमाल का मुद्दा भी उठाया गया। विधायक स्नेहा दुबे पंडित ने संबंधित अधिकारियों, विकासकों और आर्किटेक्ट की भूमिका की जांच कराने की मांग की।
उन्होंने दावा किया कि जुलाई 2024 में अतिरिक्त एफएसआई के संबंध में नगर निगम आयुक्त की ओर से शासन से मार्गदर्शन मांगा गया था, जबकि जनवरी 2025 में इसी आधार पर कुछ विकास परियोजनाओं को सीसी मंजूरी दिए जाने का मामला सामने आया।
विधायक ने पूरे मामले की विस्तृत जांच कराने, जिम्मेदार अधिकारियों तथा संबंधित विकासकों और आर्किटेक्ट के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई करने और अतिरिक्त एफएसआई का इस्तेमाल कर निर्मित इमारतों की सूची वसई-विरार शहर महानगरपालिका की वेबसाइट पर सार्वजनिक करने की मांग की।
उन्होंने यह भी दावा किया कि ऐसी इमारतों की संख्या 88 के बजाय लगभग 250 तक हो सकती है और इसकी जांच आवश्यक है। यह संख्या फिलहाल विधायक द्वारा व्यक्त की गई संभावना के रूप में सामने आई है।
घर खरीदारों के हितों की सुरक्षा की मांग
विधायक ने यह भी कहा कि अधिकारियों और विकासकों के बीच कथित अनियमितताओं का खामियाजा आम नागरिकों और घर खरीदारों को नहीं भुगतना चाहिए। इसके लिए पुनर्विकास परियोजनाओं से जुड़े निवासियों और पात्र खरीदारों के हित में स्पष्ट नीति तैयार करने की मांग की गई।
1,500 एकड़ सरकारी जमीन के लिए डीपीआर तैयार करने के निर्देश
बैठक में अपर मुख्य सचिव असीम कुमार गुप्ता ने वसई में लगभग 1,500 एकड़ सरकारी जमीन के विकास के लिए विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (DPR) तैयार करने के निर्देश दिए। इसमें सबसे पहले बाढ़ नियंत्रण से जुड़े आवश्यक उपायों और परियोजनाओं को प्राथमिकता देने तथा उसके बाद अन्य सार्वजनिक सुविधाओं को शामिल करने की बात कही गई।
अतिरिक्त एफएसआई मामले को लेकर संबंधित प्रकरणों की मंजूरी प्रक्रिया और उसमें शामिल अधिकारियों की भूमिका की जांच के निर्देश भी दिए गए। बैठक में संबंधित अधिकारियों के खिलाफ विभागीय जांच तथा दोषी पाए जाने वाले आर्किटेक्ट के संबंध में नियमानुसार कार्रवाई की प्रक्रिया आगे बढ़ाने के निर्देश दिए गए।
साथ ही पुनर्विकास परियोजनाओं के निवासियों और रेरा-पंजीकृत परियोजनाओं के खरीदारों को अनावश्यक परेशानी न हो, इसके लिए पात्र इमारतों को भोगवटा प्रमाणपत्र (OC) देने के संबंध में स्पष्ट नीति तैयार करने के निर्देश दिए गए।
वरिष्ठ अधिकारी रहे मौजूद
बैठक में नालासोपारा विधानसभा क्षेत्र के विधायक राजन नाईक, मंत्रालय के संबंधित विभागों के वरिष्ठ अधिकारी, पालघर जिलाधिकारी इंदू रानी जाखड़, वसई-विरार शहर महानगरपालिका आयुक्त पृथ्वीराज बी.पी. तथा एमएमआरडीए के अधिकारी उपस्थित रहे।
बैठक में उठाए गए मुद्दों और दिए गए निर्देशों के बाद अब बाढ़ नियंत्रण, सरकारी जमीन के नियोजित उपयोग और अतिरिक्त एफएसआई से जुड़े मामलों में प्रशासनिक स्तर पर आगे की कार्रवाई पर नजर रहेगी।
रिपोर्ट: साहिल यादव
राष्ट्रीय हिंदी साप्ताहिक ‘तृप्ति प्रमाण’




