आनंद ग्राहक सहकारी संस्था के 80 वर्ष पूरे, सहकार और सामाजिक प्रतिबद्धता की विरासत आगे बढ़ाने का संकल्प |

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वरिष्ठ शेयरधारकों का शॉल और पुष्पगुच्छ देकर सम्मान; संस्था का इतिहास अगली पीढ़ी के लिए प्रेरणादायी — संजय रमेश भालेराव

मुंबई: माटुंगा लेबर कैंप के सामाजिक, आर्थिक और आंबेडकरी आंदोलन के इतिहास में महत्वपूर्ण स्थान रखने वाली आनंद ग्राहक सहकारी संस्था मर्यादित ने अपनी स्थापना के गौरवशाली 80 वर्ष पूरे किए हैं। वर्ष 1946 से शुरू हुई संस्था की यह यात्रा केवल आर्थिक गतिविधियों तक सीमित नहीं रही, बल्कि सहकार, संगठन, स्वावलंबन और सामाजिक प्रतिबद्धता से जुड़ी रही है।

सामाजिक कार्यकर्ता संजय रमेश भालेराव ने कहा कि संस्था की 80 वर्षों की यात्रा वंचित, श्रमिक और पिछड़े वर्ग के समाज के स्वावलंबन तथा सामाजिक प्रगति से जुड़ी महत्वपूर्ण विरासत का हिस्सा है।

संस्था की 80वीं वर्षगांठ के अवसर पर आयोजित वार्षिक सर्वसाधारण सभा में संस्था के ऐतिहासिक, सामाजिक और सहकार क्षेत्र में योगदान को रेखांकित किया गया। सभा की अध्यक्षता रमेश अमृत काले ने की।

इस अवसर पर संस्था के ऑडिटर उत्तम चव्हाण ने लेखा-जोखा, बैलेंस शीट और ऑडिट रिपोर्ट सभा के समक्ष प्रस्तुत की। सदस्यों को संस्था के आर्थिक व्यवहारों की जानकारी दी गई तथा आगामी दिशा और कार्ययोजना को लेकर विभिन्न विषयों पर चर्चा हुई।

वरिष्ठ शेयरधारकों का विशेष सम्मान

माटुंगा लेबर कैंप में कई दशकों से निवास कर रहे संस्था के वरिष्ठ शेयरधारकों और सदस्यों का संचालक मंडल की ओर से शॉल और पुष्पगुच्छ देकर सम्मान किया गया।

कई वर्षों से संस्था के साथ जुड़े वरिष्ठ सदस्यों का सम्मान समारोह का महत्वपूर्ण हिस्सा रहा। वरिष्ठ महिला शेयरधारकों सहित अन्य सदस्यों का भी सम्मान किया गया।

कार्यक्रम में उपस्थित स्थानीय नगरसेविका का भी सम्मान किया गया। संस्था के साथ उनके लंबे समय से चले आ रहे संबंधों और संस्था की ओर से प्रतिवर्ष किए जाने वाले सम्मान को लेकर उन्होंने अपनी भावनाएं व्यक्त कीं।

आंबेडकरी आंदोलन से ऐतिहासिक संबंध

कार्यक्रम के दौरान बताया गया कि संस्था की स्थापना के पीछे डॉ. बाबासाहेब आंबेडकर के सामाजिक और आर्थिक स्वावलंबन से जुड़े विचारों की प्रेरणा रही है। संस्था का संबंध उस समय के एस.सी. फेडरेशन आंदोलन से भी बताया गया। आगे चलकर वर्ष 1984 में संस्था को “आनंद ग्राहक सहकारी संस्था मर्यादित” नाम दिया गया।

डॉ. बाबासाहेब आंबेडकर का माटुंगा लेबर कैंप और संस्था से जुड़ा संबंध स्थानीय सामाजिक इतिहास में आज भी याद किया जाता है। संजय रमेश भालेराव के अनुसार, बाबासाहेब के राजगृह से माटुंगा लेबर कैंप पहुंचकर संस्था के कार्यालय के उद्घाटन अवसर पर उपस्थित रहने की स्मृति क्षेत्र की पुरानी पीढ़ी के बीच आज भी संजोई गई है।

इस क्षेत्र में बाबासाहेब के आंदोलन के वरिष्ठ नेता कर्मवीर दादासाहेब गायकवाड के कार्य का भी प्रभाव रहा है। वक्ताओं के अनुसार, इसी पृष्ठभूमि में यह स्थान सहकारी आर्थिक गतिविधियों के साथ सामाजिक जागृति और संगठन से जुड़े कार्यों का केंद्र भी बना।

“संस्था शेयरधारकों की है, हम केवल न्यासी हैं”

कार्यक्रम में संचालक प्रशांत मोतीराम अहिरे ने सहकारिता के मूल सिद्धांतों पर जोर देते हुए कहा कि संस्था शेयरधारकों और सदस्यों की है तथा संचालक मंडल की भूमिका न्यासी के रूप में संस्था का संचालन करना है।

उन्होंने सदस्यों के विश्वास, पारदर्शिता और संस्था के हित को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए कार्य करने को संचालक मंडल की जिम्मेदारी बताया। उनके विचारों का उपस्थित सदस्यों ने स्वागत किया।

आर्थिक गतिविधियों के साथ सामाजिक प्रतिबद्धता

आनंद ग्राहक सहकारी संस्था का कार्य केवल आर्थिक व्यवहारों तक सीमित नहीं रहा है। संस्था की ओर से समय-समय पर महिला सशक्तिकरण, समाज प्रबोधन, सामाजिक जागरूकता, पारिवारिक मार्गदर्शन और युवाओं से जुड़े विभिन्न कार्यक्रम आयोजित किए जाते रहे हैं।

युवक-युवतियों के लिए विवाह परिचय सम्मेलन, महिलाओं के लिए पर्यटन और अन्य सामाजिक कार्यक्रमों के माध्यम से संस्था ने अपने सदस्यों के साथ सामाजिक संबंध बनाए रखने का प्रयास किया है।

कार्यक्रम में क्रांतिज्योति सावित्रीबाई फुले और माता रमाई आंबेडकर के विचारों की विरासत को आगे बढ़ाते हुए महिलाओं में शिक्षा, सामाजिक जागरूकता और समाज प्रबोधन से जुड़े कार्यों को और व्यापक बनाने का संकल्प भी व्यक्त किया गया।

संजय रमेश भालेराव के सामाजिक और कानूनी योगदान का उल्लेख

संस्था के संचालक नितीन विजय भालेराव ने सामाजिक कार्यकर्ता संजय रमेश भालेराव के संस्था के प्रति सामाजिक और कानूनी योगदान का उल्लेख किया।

उन्होंने कहा कि संस्था के सामने कानूनी या प्रशासनिक समस्याएं आने पर संजय रमेश भालेराव ने बिना पारिश्रमिक की अपेक्षा के संस्था को मार्गदर्शन और सहयोग दिया है। इसी योगदान के मद्देनजर संस्था की ओर से उनके सामाजिक और कानूनी योगदान का सम्मान करने का निर्णय लिया गया।

उन्होंने बताया कि प्रशासकीय कार्यकाल के बाद संस्था का 13 सदस्यीय संचालक मंडल अस्तित्व में आया है और संस्था को लोकतंत्र, पारदर्शिता तथा सहकारिता के मूल्यों के अनुरूप संचालित करने का प्रयास किया जा रहा है।

सदस्यों का विश्वास संस्था की पूंजी

संजय रमेश भालेराव ने कहा कि कई दशकों से सदस्यों और शेयरधारकों के साथ बना विश्वास संस्था की महत्वपूर्ण शक्ति है। उनके अनुसार लाभांश, वार्षिक उपहार, नियमित सर्वसाधारण सभा तथा आर्थिक व्यवहारों में अनुशासन, पारदर्शिता और जवाबदेही की परंपरा ने संस्था के सहकारी मूल्यों को बनाए रखने में भूमिका निभाई है।

इस अवसर पर वर्ष 1946 से संस्था की स्थापना और विकास में योगदान देने वाले पूर्व अध्यक्षों, सचिवों, संचालकों, पदाधिकारियों, कर्मचारियों और सदस्यों के प्रति कृतज्ञता व्यक्त की गई। संस्था के लिए योगदान देने के बाद दिवंगत हुए सदस्यों और पदाधिकारियों को भी श्रद्धापूर्वक याद किया गया।

“80 वर्षों की विरासत अगली पीढ़ी की जिम्मेदारी”

संजय रमेश भालेराव ने कहा कि किसी संस्था की वास्तविक ताकत केवल उसकी इमारत या आर्थिक कारोबार में नहीं होती, बल्कि उसके इतिहास, सदस्यों के विश्वास और पीढ़ी-दर-पीढ़ी संजोए गए सामाजिक मूल्यों में होती है।

उन्होंने कहा कि आनंद ग्राहक सहकारी संस्था की 80 वर्षों की यात्रा स्वाभिमान, सहकार और सामाजिक प्रतिबद्धता से जुड़ी रही है। पुरानी पीढ़ी ने मेहनत और एकजुटता से संस्था को आगे बढ़ाया और अब इस विरासत को अगली पीढ़ी तक पहुंचाने की जिम्मेदारी है।

उन्होंने डॉ. बाबासाहेब आंबेडकर के “शिक्षित बनो, संगठित रहो और संघर्ष करो” संदेश तथा सहकारिता के माध्यम से आर्थिक स्वावलंबन के विचारों को अगली पीढ़ी तक पहुंचाने की आवश्यकता पर भी जोर दिया।

कार्यक्रम के अंत में संस्था के सभी सदस्यों, शेयरधारकों, वरिष्ठ नागरिकों, महिला सदस्यों, पूर्व एवं वर्तमान पदाधिकारियों, कर्मचारियों तथा संचालक मंडल को संस्था के 80 वर्ष पूरे होने पर शुभकामनाएं दी गईं।

संस्था के पदाधिकारी

  • अध्यक्ष: मनोहर अमृत काले
  • सचिव: विशाल दिनकर निरभवणे
  • कोषाध्यक्ष: पुष्पलता मधुकर कसबे

संचालक मंडल

भारती किसन शिंदे, विकास भास्कर कापडे, प्रशांत मोतीराम अहिरे, नितीन विजय भालेराव, विश्वास पुंजाजी गवळे, गौतम मधुकर पवार, विशाल महेश गुप्ता, अतुल निवृत्ती जाधव, बाळू देवराम कापडे और कांताताई वसंत पगारे।

संपादक/ऑडिटर: उत्तम चव्हाण
सभा अध्यक्ष: रमेश अमृत काले

रिपोर्ट: सैय्यद जाहिद अली रियासत
राष्ट्रीय हिंदी साप्ताहिक ‘तृप्ति प्रमाण’

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