भारत को-ऑपरेटिव बैंक में EMI की राशि जमा न करने का आरोप, चार साल पुराने मामले में FIR दर्ज |

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पीड़ित परिवार का आरोप—बैंक कर्मचारियों ने जमा की गई रकम ऋण खाते में नहीं की दर्ज; संपत्ति पर नजर होने का भी दावा

पराग यादव | पालघर

पालघर/बोईसर: भारत को-ऑपरेटिव बैंक की पालघर शाखा से जुड़े कथित वित्तीय धोखाधड़ी के मामले में पालघर पुलिस स्टेशन में एफआईआर दर्ज होने के बाद बोईसर के चितराले स्थित सरोवर होटल में पत्रकार वार्ता आयोजित की गई। इस दौरान पीड़ित परिवार ने बैंक के तत्कालीन कैशियर पर ऋण की किस्त के रूप में जमा की गई राशि बैंक के ऋण खाते में जमा नहीं करने और कथित धोखाधड़ी किए जाने के आरोप लगाए।

प्राप्त एफआईआर के अनुसार, एफआईआर क्रमांक 0309/2026 दिनांक 20 सितंबर 2026 को पालघर पुलिस स्टेशन में भारतीय न्याय संहिता (BNS), 2023 की धारा 316(4) और 318(4) के तहत दर्ज की गई है। मामले में ओंकार शशिकांत सालवी का नाम आरोपी के रूप में दर्ज है। एफआईआर के अनुसार मामले की जांच की जिम्मेदारी पुलिस उपनिरीक्षक रमजान मदारसो शेख को दी गई है।

18 जनवरी 2022 को जमा की गई थी 1.50 लाख रुपये की राशि

शिकायत में दर्ज विवरण के अनुसार, शिकायतकर्ता अमित विकास पारुलेकर ने बताया कि उन्होंने परिवार के सदस्यों के साथ व्यवसाय के लिए भारत को-ऑपरेटिव बैंक से ऋण लिया था।

शिकायतकर्ता के अनुसार, 18 जनवरी 2022 को ऋण की किस्त के रूप में 1 लाख रुपये और 50 हजार रुपये, यानी कुल 1.50 लाख रुपये, बैंक के तत्कालीन कैशियर को जमा किए गए थे।

शिकायतकर्ता का आरोप है कि राशि जमा करने के बाद उन्हें काउंटर स्लिप दी गई, लेकिन उक्त रकम उनके ऋण खाते में दर्ज नहीं हुई। बाद में बैंक खाते और ऑडिट से संबंधित विवरण की जांच करने पर उन्हें कथित तौर पर राशि ऋण खाते में जमा नहीं होने की जानकारी मिली।

‘ईएमआई की रकम जानबूझकर जमा नहीं की गई’

पत्रकार वार्ता के दौरान पीड़ित परिवार ने बैंक कर्मचारियों पर आरोप लगाते हुए कहा कि ईएमआई की राशि जानबूझकर बैंक खाते में जमा नहीं की गई। परिवार का दावा है कि इस वजह से ऋण खाता एनपीए की स्थिति में पहुंच सकता था।

परिवार ने आरोप लगाया कि ईएमआई की रकम जमा नहीं करने के पीछे कथित तौर पर ऐसा उद्देश्य था, जिससे ऋण खाता एनपीए हो जाए और बाद में बैंक उनकी संपत्ति के खिलाफ दावा या कार्रवाई कर सके। परिवार ने यह भी दावा किया कि भारत को-ऑपरेटिव बैंक की उनकी संपत्ति पर नजर थी।

हालांकि, बैंक कर्मचारियों द्वारा जानबूझकर राशि जमा नहीं करने और संपत्ति पर नजर होने संबंधी आरोप फिलहाल शिकायतकर्ता परिवार के दावे हैं। इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है और मामले की वास्तविक स्थिति पुलिस जांच के बाद ही स्पष्ट होगी।

चार वर्षों से शिकायत करने का दावा

पीड़ित परिवार के अनुसार, वे इस मामले को लेकर चार वर्षों से अधिक समय से परेशान हैं। परिवार का कहना है कि उन्होंने लगातार अपनी शिकायत और संबंधित दस्तावेज विभिन्न अधिकारियों के समक्ष प्रस्तुत किए।

एफआईआर दर्ज होने के बाद परिवार ने मामले में आगे की जांच और न्याय मिलने की उम्मीद जताई है।

अमर सावंत के प्रयासों का परिवार ने किया उल्लेख

पत्रकार वार्ता के दौरान पीड़ित परिवार ने हैश फाउंडेशन के जिला अध्यक्ष अमर सावंत का विशेष रूप से धन्यवाद किया। परिवार के अनुसार, अमर सावंत ने उनसे मुलाकात कर पूरे मामले की जानकारी ली और शिकायत तथा आवश्यक दस्तावेज पुलिस अधीक्षक कार्यालय तक पहुंचाने में सहायता की।

परिवार ने कहा कि लगातार किए गए प्रयासों के बाद अब मामले में एफआईआर दर्ज हुई है।

बैंक रिकॉर्ड और दस्तावेजों की होगी जांच

एफआईआर दर्ज होने के बाद पुलिस ने मामले की जांच शुरू कर दी है। जांच के दौरान ऋण खाते का विवरण, ईएमआई की राशि, काउंटर स्लिप, बैंक के लेनदेन रिकॉर्ड, ऑडिट रिपोर्ट और अन्य संबंधित दस्तावेज महत्वपूर्ण होंगे।

जांच के दौरान यह स्पष्ट किया जाएगा कि शिकायतकर्ता द्वारा जमा बताई गई राशि बैंक के रिकॉर्ड में किस प्रकार दर्ज हुई, ऋण खाते में उसका क्या लेखा-जोखा रहा और खाते के एनपीए होने से संबंधित आरोपों में कितनी सच्चाई है।

नोट: बैंक या आरोपी पक्ष का इस पत्रकार वार्ता और लगाए गए आरोपों पर पक्ष उपलब्ध नहीं है। एफआईआर में दर्ज आरोप अभी जांच के अधीन हैं। पुलिस जांच पूरी होने के बाद ही आरोपों की वास्तविक स्थिति स्पष्ट होगी।

रिपोर्ट: पराग यादव, पालघर
राष्ट्रीय हिंदी साप्ताहिक ‘तृप्ति प्रमाण’

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