वरिष्ठ पत्रकार पर दुष्कर्म का आरोप, महिला ने धमकी और राजनीतिक संपर्क के दावे किए |

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बोईसर निवासी महिला की शिकायत में सोशल मीडिया संपर्क, होटल में कथित घटना और धमकी देने के आरोप; FIR की आधिकारिक पुष्टि का इंतजार

मीरा-भायंदर/पालघर। बोईसर निवासी 29 वर्षीय विवाहित महिला ने वरिष्ठ पत्रकार संजय चंद्रकांत पितळे के खिलाफ दुष्कर्म और धमकी देने के गंभीर आरोप लगाए हैं। महिला की शिकायत के अनुसार, सोशल मीडिया के माध्यम से संपर्क होने के बाद आरोपी ने कथित तौर पर राजनीतिक संपर्कों का हवाला देकर उसका विश्वास हासिल किया। फिलहाल इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है और मामले में पुलिस की आधिकारिक कार्रवाई तथा FIR की स्थिति स्पष्ट होना बाकी है।

शिकायतकर्ता के अनुसार, उसने फेसबुक पर संजय पितळे की फ्रेंड रिक्वेस्ट स्वीकार की थी। महिला का कहना है कि पितळे की प्रोफाइल पर उपमुख्यमंत्री की तस्वीर देखने के बाद उसने उनसे संपर्क किया और कथित तौर पर उपमुख्यमंत्री से मुलाकात कराने का अनुरोध किया। शिकायत के मुताबिक, पितळे ने ऐसा कराने का आश्वासन दिया।

21 मई की घटना को लेकर महिला का आरोप

महिला के अनुसार, 21 मई 2026 को काशिमीरा के पास मुलाकात के बाद आरोपी उसे गोरेगांव स्थित एक होटल में ले गया। शिकायत में आरोप लगाया गया है कि वहां उसे लाल रंग का पेय दिया गया। महिला का दावा है कि पेय पीने के बाद उसकी तबीयत बिगड़ गई और वह अचेत जैसी स्थिति में चली गई।

शिकायतकर्ता ने आरोप लगाया है कि इसी दौरान उसके साथ दुष्कर्म किया गया। इस दावे की स्वतंत्र पुष्टि फिलहाल उपलब्ध नहीं है।

राजनीतिक संपर्क और धमकी देने का भी आरोप

महिला ने शिकायत में यह भी आरोप लगाया है कि बाद में आरोपी ने राजनीतिक नेताओं और वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों से संबंध होने का दावा करते हुए उसे कथित तौर पर धमकाया। शिकायतकर्ता के अनुसार, उसे पत्रकार कोटे के माध्यम से ठाणे में फ्लैट दिलाने का आश्वासन भी दिया गया था।

महिला का कहना है कि उसने बातचीत, WhatsApp चैट और कॉल रिकॉर्डिंग सहित कथित डिजिटल साक्ष्य सुरक्षित रखे हैं।

डिजिटल साक्ष्यों की जांच से स्पष्ट हो सकती है स्थिति

शिकायत में वर्णित 21 मई की गतिविधियों की जांच के दौरान कॉल डिटेल रिकॉर्ड (CDR), मोबाइल टावर लोकेशन, CCTV फुटेज, चैट और अन्य डिजिटल साक्ष्यों की जांच महत्वपूर्ण हो सकती है। हालांकि, इन साक्ष्यों की वास्तविक उपलब्धता और उनकी पुलिस जांच से पुष्टि अभी स्पष्ट नहीं है।

फिलहाल मामले में पुलिस की आधिकारिक FIR, जांच की प्रगति और आरोपी का पक्ष सार्वजनिक रूप से स्पष्ट नहीं है। इसलिए महिला द्वारा लगाए गए आरोपों को अभी शिकायतकर्ता के आरोप के रूप में ही देखा जाना चाहिए।

नोट: किसी व्यक्ति पर आरोप लगना दोष सिद्ध होने के समान नहीं है। मामले की वास्तविक स्थिति पुलिस जांच और न्यायिक प्रक्रिया के बाद स्पष्ट होगी।

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