2024 से सितंबर 2026 तक बांग्लादेशी नागरिकों से जुड़े 75 और नाइजीरियाई नागरिकों से जुड़े 77 मामले दर्ज
नालासोपारा। मीरा-भायंदर, वसई-विरार पुलिस आयुक्तालय क्षेत्र में विदेशी नागरिकों से संबंधित मामलों को लेकर सूचना के अधिकार (RTI) के तहत मांगी गई जानकारी में कई आंकड़े सामने आए हैं। नालासोपारा पूर्व निवासी रत्नाकर तिवारी द्वारा दायर RTI आवेदन के जवाब में पुलिस ने 1 जनवरी 2024 से 8 सितंबर 2026 तक बांग्लादेशी और नाइजीरियाई नागरिकों से जुड़े मामलों की जानकारी उपलब्ध कराई है।
पुलिस के जवाब के अनुसार, इस अवधि में दोनों श्रेणियों से जुड़े कुल 152 मामले दर्ज हुए और 205 गिरफ्तारियां हुईं।
बांग्लादेशी नागरिकों से जुड़े 75 मामले
पुलिस द्वारा उपलब्ध कराई गई जानकारी के मुताबिक, उक्त अवधि में बांग्लादेशी नागरिकों से संबंधित 75 मामले दर्ज किए गए। इन मामलों में कुल 111 लोगों की गिरफ्तारी की गई।
RTI के जवाब में पुलिस ने यह भी बताया कि गिरफ्तार आरोपियों के संबंध में हदपार या डिपोर्टेशन की कार्रवाई कितनी हुई, इसका रिकॉर्ड उपलब्ध नहीं है।
पुलिस रिकॉर्ड के अनुसार, वर्ष 2025 में दो बांग्लादेशी महिलाओं के खिलाफ दर्ज एक मामले में 105 ग्राम MD (मेफेड्रोन) बरामद किया गया था। जब्त पदार्थ की अनुमानित कीमत करीब 22 लाख रुपये बताई गई।
नाइजीरियाई नागरिकों से जुड़े 77 मामले
इसी अवधि में नाइजीरियाई नागरिकों से संबंधित 77 मामले दर्ज किए गए। इन मामलों में कुल 94 लोगों को गिरफ्तार किए जाने की जानकारी पुलिस ने RTI के जवाब में दी है।
पुलिस ने नाइजीरियाई नागरिकों से संबंधित मामलों में भी गिरफ्तार लोगों के खिलाफ हदपार या डिपोर्टेशन की कार्रवाई का आंकड़ा उपलब्ध नहीं होने की बात कही है।
63.75 करोड़ रुपये से अधिक के मादक पदार्थ जब्त
RTI के जवाब में नाइजीरियाई नागरिकों से जुड़े मामलों में जब्त किए गए मादक पदार्थों का विवरण भी दिया गया है। इसमें MD, कोकीन, MDMA, गांजा, मेथाक्वालोन और मेथाडोन समेत अन्य पदार्थ शामिल हैं।
पुलिस के अनुसार, इन मामलों में जब्त मादक पदार्थों की कुल अनुमानित कीमत ₹63,75,27,060, यानी करीब 63.75 करोड़ रुपये है।
9 सितंबर को दिया गया RTI का जवाब
यह जानकारी 9 सितंबर 2026 को सहायक पुलिस आयुक्त (प्रकटीकरण), मीरा-भायंदर, वसई-विरार पुलिस आयुक्तालय की ओर से RTI आवेदन के जवाब में उपलब्ध कराई गई है।
उपलब्ध आंकड़े 1 जनवरी 2024 से 8 सितंबर 2026 तक की अवधि के पुलिस रिकॉर्ड पर आधारित हैं। यहां दर्ज गिरफ्तारियां संबंधित मामलों में पुलिस कार्रवाई को दर्शाती हैं; इन्हें न्यायालय द्वारा दोषसिद्धि के रूप में नहीं माना जाना चाहिए।




