“प्रकृति की गोद में विराजमान गणपति”, प्राकृतिक सजावट से दिया पर्यावरण संरक्षण का संदेश |

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वसई पश्चिम के महात्मा फुले नगर में “घरचा गणपती-2026” की अनूठी प्राकृतिक संकल्पना बनी आकर्षण का केंद्र

वसई। वसई पश्चिम के माणिकपुर स्थित महात्मा फुले नगर में निखिल किरण वाळिंजकर के घर स्थापित घरचा गणपती-2026 की सजावट इस वर्ष विशेष आकर्षण का केंद्र बनी हुई है। “प्रकृति की गोद में गणपति” की संकल्पना के तहत गणपति बप्पा और माता पार्वती को प्राकृतिक वातावरण में विराजमान किया गया है।

इस विशेष सजावट में पहाड़ की गुफा, पत्थर, पेड़-पौधे, बेलें, बहता झरना और हरियाली का सुंदर संयोजन किया गया है। सजावट के माध्यम से गणपति बप्पा और प्रकृति के बीच के संबंध को दर्शाने का प्रयास किया गया है। संकल्पना में माता पार्वती अपने बाल गणेश के साथ प्राकृतिक एवं मनमोहक वातावरण में विराजमान दिखाई देती हैं।

झरना बना प्राकृतिक संदेश का प्रतीक

सजावट के पीछे बनाया गया बहता हुआ झरना जीवन, शुद्धता और प्राकृतिक जलस्रोतों का प्रतीक प्रस्तुत करता है। वहीं पत्थर, मिट्टी, पेड़ों की पत्तियों, बेलों और प्राकृतिक रंगों का इस्तेमाल करते हुए कृत्रिम चकाचौंध के बजाय प्रकृति की सादगी और सुंदरता को प्रमुखता दी गई है।

इस सजावट के जरिए पर्यावरण संरक्षण और प्रकृति के प्रति जागरूकता का संदेश देने का प्रयास किया गया है। गणेशोत्सव के दौरान घर पहुंचने वाले श्रद्धालु और स्थानीय नागरिक इस प्राकृतिक संकल्पना की सराहना कर रहे हैं।

प्रकृति और भक्ति का अनूठा संगम

“प्रकृति की गोद में गणपति” की यह संकल्पना धार्मिक आस्था के साथ प्रकृति के प्रति संवेदनशीलता को भी सामने लाती है। प्राकृतिक तत्वों से तैयार सजावट के जरिए गणेशोत्सव को पर्यावरण संरक्षण के संदेश से जोड़ने का प्रयास किया गया है।

स्थान: माणिकपुर, महात्मा फुले नगर, वसई पश्चिम – 401202
आयोजक: निखिल किरण वाळिंजकर
उत्सव: घरचा गणपती – 2026

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