पालघर, 19 (जिला प्रतिनिधि): भारत को विकसित राष्ट्र बनाने के सपने को साकार करते समय समाज के अंतिम घटक का विकास करना और उसे समाज की मुख्य धारा में लाना आवश्यक है। पालघर के सर्वतोमुखी विकास के बिना विकसित भारत की संकल्पना पूरी नहीं हो सकती, यह मत महाराष्ट्र के राज्यपाल जिष्णु देव वर्मा ने आज डहाणू में व्यक्त किया।
मार्च 2026 में राज्य के राज्यपाल पद का कार्यभार संभालने के बाद यह राज्यपाल का पहला पालघर जिला दौरा है, जिसके कारण पालघरवासियों में भारी उत्साह देखा गया। अक्षय तृतीया और भगवान श्री परशुराम जयंती के शुभ अवसर पर डहाणू तालुका के ओसरविरा में वनबंधु ट्रस्ट और भारत विकास संगम द्वारा पालघर जिले के दुर्गम क्षेत्रों में मोबाइल क्लिनिक और एम्बुलेंस सेवाओं के लोकार्पण समारोह के अवसर पर वे बोल रहे थे।
इस अवसर पर भारत विकास संगम के संरक्षक संजय पटेल, राज्यपाल के सचिव डॉ. प्रशांत नारनवरे, जिलाधिकारी डॉ. इंदु रानी जाखड़, पालघर के पुलिस अधीक्षक यतीश देशमुख, जिला परिषद के मुख्य कार्यकारी अधिकारी मनोज रानडे, वनबंधु ट्रस्ट के अध्यक्ष और न्यासी लाडूलाल सोनी, योगायतन ग्रुप के अध्यक्ष डॉ. राजेंद्र प्रताप सिंह, वरिष्ठ समाजसेवी सुशील सिंघानिया सहित अन्य गणमान्य व्यक्ति और बड़ी संख्या में नागरिक उपस्थित थे।
अपने भाषण की शुरुआत ‘सर्वे भवन्तु निरामया:’ मंत्र का उल्लेख करते हुए उन्होंने किया और कहा कि स्वास्थ्य सुविधाएं केवल शहरों तक सीमित न रहें, बल्कि दुर्गम क्षेत्रों में रहने वाले प्रत्येक नागरिक तक पहुंचें, यह हमारा मुख्य संकल्प है। पालघर जिले जैसे आदिवासी बहुल क्षेत्र में रोजगार, स्वास्थ्य और पेयजल की समस्याओं पर ठोस उपाय करने का आश्वासन दिया। इन समस्याओं के समाधान और पालघर में एक ‘आदर्श गांव’ अवधारणा को लागू करने के लिए लोकभवन स्तर पर योजना बनाई जा रही है, यह जानकारी उन्होंने इस अवसर पर दी। इसके लिए जल्द ही जिला प्रशासन और संबंधित एजेंसियों की बैठक बुलाकर एक व्यापक विकास रूपरेखा तैयार की जाएगी, ऐसी महत्वपूर्ण घोषणा भी उन्होंने इस अवसर पर की।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ‘सबका साथ, सबका विकास, सबका प्रयास’ की भूमिका का संदर्भ देते हुए राज्यपाल ने कहा कि विकास प्रक्रिया में ‘अंत्योदय’ यानी पंक्ति में खड़े अंतिम व्यक्ति को प्राथमिकता देना हमारा कर्तव्य है। वनबंधु ट्रस्ट के माध्यम से दुर्गम क्षेत्रों में मोबाइल क्लिनिक, एम्बुलेंस और डॉक्टर उपलब्ध कराने की इस पहल की उन्होंने सराहना की। उन्होंने कहा कि एक अच्छा इंजीनियर, तकनीशियन या चार्टर्ड अकाउंटेंट बनना अच्छी बात है, लेकिन उससे भी बड़ी बात है समाज में एक अच्छे नागरिक के रूप में कार्य करना। पीड़ितों की सेवा करना ही सच्चा स्वर्ग है, यह बात राज्यपाल ने इस अवसर पर कही। इस दौरे के अवसर पर उन्होंने स्थानीय जनप्रतिनिधियों और जिलाधिकारी से चर्चा करते हुए कहा कि दुर्गम क्षेत्रों में बुनियादी सुविधाओं को मजबूत करने के लिए वे प्रतिबद्ध हैं। आदिवासी समुदाय की प्रगति के लिए लोकभवन के दरवाजे हमेशा खुले रहेंगे और पालघर के विकास के लिए वे व्यक्तिगत रूप से ध्यान देंगे, इस आश्वासन भी उन्होंने दिया।
वनबंधु ट्रस्ट के अध्यक्ष लाडूलाल सोनी ने प्रास्ताविक भाषण दिया। उन्होंने ट्रस्ट द्वारा संचालित स्वास्थ्य परियोजनाओं की जानकारी देते हुए कहा कि आदिवासी दुर्गम क्षेत्रों के नागरिकों को तत्काल चिकित्सा सहायता प्रदान करने के लिए ट्रस्ट प्रतिबद्ध है।
राज्यपाल के सचिव डॉ. प्रशांत नारनवरे ने अपने विचार व्यक्त करते हुए कहा कि प्रशासनिक और सामाजिक संस्थाओं के समन्वय से दुर्गम क्षेत्रों की तस्वीर कैसे बदली जा सकती है, इस पर प्रकाश डाला।
पालघर की जिलाधिकारी डॉ. इंदु रानी जाखड़ ने अपने विचारों में जिले की स्वास्थ्य स्थिति और लागू की जा रही सरकारी योजनाओं की जानकारी दी। साथ ही, राज्यपाल के मार्गदर्शन में जिला प्रशासन और तेजी से काम करेगा, इस आश्वासन भी उन्होंने दिया।