पालघर

आजादी के दशकों बाद भी डोली के सहारे सांसे! पालघर के ‘आदर्श गांव’ में सड़क न होने से 1 किमी तक उठाकर ले जाना पड़ा घायल युवक |

पालघर/डहाणू:

पालघर जिले के गठन के 12 साल पूरे होने के करीब हैं, लेकिन आदिवासी बहुल इलाकों में विकास की हकीकत आज भी बदहाली के पन्नों में कैद है। डहाणू तालुका के रायतली-चांदवड स्थित डोंगरीपाड़ा से सामने आई एक दुखद घटना ने सरकारी दावों की पोल खोलकर रख दी है। सड़क और पुलिया का निर्माण अधूरा होने के कारण पेड़ से गिरकर गंभीर रूप से घायल हुए एक युवक को ग्रामीणों ने कपड़े की डोली में लादकर करीब एक किलोमीटर पैदल चलकर मुख्य मार्ग तक पहुंचाया, तब जाकर उसे एम्बुलेंस मिल सकी।

3 साल से अधूरी पुलिया, एम्बुलेंस का जाना नामुमकिन

घटना 23 जुलाई की सुबह की है, जब स्थानीय निवासी करण देसक पेड़ से नीचे गिरकर लहुलूहान हो गए। गांव तक पक्की सड़क और पुलिया (मोरी) न होने के चलते आपातकालीन एम्बुलेंस गांव के अंदर नहीं आ सकी। लाचार परिजनों और ग्रामीणों ने लकड़ी और कपड़े की डोली बनाई और करण को उठाकर मुख्य मार्ग तक पहुंचे। इसके बाद उन्हें पहले डहाणू कॉटेज अस्पताल और फिर बेहतर इलाज के लिए वेदांत अस्पताल ले जाया गया, जहाँ फिलहाल उनकी हालत स्थिर बताई जा रही है।

10 बार गुहार लगाई, 4 साल पहले जा चुकी है एक जान

स्थानीय ग्रामीणों में प्रशासन की इस अनदेखी को लेकर भारी गुस्सा है। गांव वालों का आरोप है कि अधूरी पुलिया को पूरा कराने के लिए उन्होंने ग्राम पंचायत को 10 से ज्यादा बार लिखित आवेदन दिए, लेकिन किसी अफसर या जनप्रतिनिधि के कान पर जूं तक नहीं रेंगी। ग्रामीणों ने बताया कि इससे पहले भी दो गंभीर मरीजों को इसी तरह डोली में ढोना पड़ा था, जबकि चार साल पहले समय पर अस्पताल न पहुँच पाने के कारण एक ग्रामीण अपनी जान तक गंवा चुका है।

‘आदर्श आदिवासी गांव’ के दावों की खुली पोल

‘तृप्ति प्रमाण’ की रिपोर्ट के अनुसार, सबसे बड़ी विडंबना यह है कि जिस गंजाड-रायतली-घोलवड क्षेत्र की यह घटना है, उसे आदिवासी विकास विभाग द्वारा “आदर्श आदिवासी गांव” योजना में चुना गया है। कागजों में ‘आदर्श’ बने इस गांव में आज भी गर्भवती महिलाओं, बुजुर्गों, मरीजों और स्कूली बच्चों को जान जोखिम में डालकर आवाजाही करनी पड़ती है।

ग्रामीण दिनेश शिंगाडा ने अल्टीमेटम देते हुए कहा है कि यदि जल्द से जल्द पुलिया का निर्माण पूरा नहीं किया गया, तो पूरा गांव प्रशासन के खिलाफ उग्र आंदोलन और आमरण अनशन करने पर मजबूर होगा।

Sanjay Jaiswal

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