मीरा-वसई-विरार में युवतियों से कथित यौन अत्याचार के मामलों की स्वतंत्र जांच की मांग |

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मानवाधिकार कार्यकर्ता संजय गुप्ता ने मुख्यमंत्री और गृहमंत्री को सौंपा निवेदन; CID या जरूरत पड़ने पर CBI से जांच कराने की मांग

वसई-विरार। मीरा-भाईंदर-वसई-विरार पुलिस आयुक्तालय क्षेत्र में युवतियों के साथ कथित यौन अत्याचार और आपत्तिजनक वीडियो के प्रसार से जुड़े सोशल मीडिया पर सामने आए दावों की निष्पक्ष एवं गहन जांच की मांग उठी है। मानवाधिकार कार्यकर्ता संजय प्यारेलाल गुप्ता ने महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री और गृहमंत्री को निवेदन सौंपकर मामले की जांच महाराष्ट्र अपराध अन्वेषण विभाग (CID) अथवा आवश्यकता पड़ने पर केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) से कराने की मांग की है।

स्वतंत्र एजेंसी से जांच कराने पर जोर

संजय गुप्ता ने अपने निवेदन में कहा कि मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए जांच ऐसे स्वतंत्र अधिकारियों या एजेंसी से कराई जानी चाहिए, जिनका संबंधित पुलिस आयुक्तालय क्षेत्र में पहले कार्यकाल न रहा हो। उनके अनुसार, इससे जांच की निष्पक्षता बनाए रखने और जनता का विश्वास कायम करने में मदद मिल सकती है।

पुराने और वर्तमान मामले के संभावित संबंधों की जांच की मांग

गुप्ता ने विरार स्थित विवा महाविद्यालय से संबंधित कथित मामले और वर्तमान में चर्चा में आए प्रकरण के बीच संभावित संबंधों की भी साक्ष्यों के आधार पर जांच कराने की मांग की है।

उन्होंने कथित वीडियो के स्रोत, उसके प्रसार में शामिल लोगों की भूमिका, संभावित पीड़ितों की संख्या और किसी संगठित गिरोह की संलिप्तता जैसे पहलुओं की जांच कर वास्तविक स्थिति सामने लाने पर जोर दिया।

पीड़ितों की पहचान गोपनीय रखने की अपील

निवेदन में पीड़ित महिलाओं और युवतियों की पहचान पूरी तरह गोपनीय रखने की मांग की गई है। साथ ही, उन्हें महिला पुलिस अधिकारियों की सहायता, कानूनी मदद, परामर्श और आवश्यक सुरक्षा उपलब्ध कराने की अपील की गई है।

गुप्ता ने डिजिटल साक्ष्यों को सुरक्षित रखने और कथित आपत्तिजनक वीडियो के प्रसार पर रोक लगाने के लिए कानून के अनुसार तत्काल कदम उठाने की मांग भी की।

राजनीतिक या अन्य प्रभाव से मुक्त जांच की मांग

संजय गुप्ता ने कहा कि मामले की जांच राजनीतिक या अन्य किसी प्रभाव से मुक्त होकर की जानी चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि ठोस साक्ष्यों के बिना किसी व्यक्ति या समुदाय को दोषी नहीं ठहराया जाना चाहिए। सभी आरोपों की कानूनी प्रक्रिया के तहत निष्पक्ष जांच होनी चाहिए और जांच में दोषी पाए जाने वालों के खिलाफ कानून के अनुसार कार्रवाई की जानी चाहिए।

गुप्ता ने शासन से मामले की गंभीरता को देखते हुए स्वतंत्र जांच सुनिश्चित करने तथा महिलाओं की सुरक्षा और पीड़ितों को न्याय दिलाने के लिए आवश्यक कदम उठाने की अपील की है।

महत्वपूर्ण: यह समाचार मानवाधिकार कार्यकर्ता द्वारा दिए गए निवेदन और उसमें की गई मांगों पर आधारित है। सोशल मीडिया पर सामने आए दावों और कथित मामलों की स्वतंत्र आधिकारिक पुष्टि उपलब्ध जानकारी में नहीं दी गई है। आरोपों को जांच के बाद ही प्रमाणित माना जा सकता है।

रिपोर्ट: तृप्ति प्रमाण

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