नालासोपारा

दुकानों में रहने वाले बाढ़ पीड़ितों को भी मिले मुआवजा’, शिवप्रताप सिंह सोमवंशी ने मुख्यमंत्री से की मांग |

नालासोपारा। वसई-विरार क्षेत्र में हाल ही में हुई मूसलाधार बारिश ने भारी तबाही मचाई है। बाढ़ के इस संकट के बीच अब राजनीति और सामाजिक हलकों से प्रभावितों की मदद के लिए आवाजें उठने लगी हैं। धर्मराज कामगार संघटना के प्रमुख शिवप्रताप सिंह सोमवंशी ने महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस को एक आधिकारिक पत्र भेजकर बेहद संवेदनशील मुद्दा उठाया है। उन्होंने मांग की है कि जो नागरिक अपने आशियाने के बजाय अपनी दुकानों में ही सपरिवार रहते हैं और इस आपदा से प्रभावित हुए हैं, उन्हें भी सरकारी राहत पैकेज और मुआवजे का लाभ दिया जाए।

केवल घरों का हो रहा पंचनामा, दुकानदारों की अनदेखी का आरोप

मुख्यमंत्री को भेजे गए पत्र में सोमवंशी ने क्षेत्र की जमीनी हकीकत बयां की है। उन्होंने कहा कि वसई-विरार में लगातार हुई भारी बारिश के चलते न केवल रिहायशी इलाकों में, बल्कि व्यावसायिक प्रतिष्ठानों में भी कई फीट पानी भर गया। इससे लोगों के घरेलू सामान, व्यापारिक स्टॉक, जरूरी कागजात और राशन का भारी नुकसान हुआ है।

वर्तमान में नगर निगम (महानगरपालिका) और राजस्व विभाग की टीमें केवल भूतल (ग्राउंड फ्लोर) पर बने घरों का ही सर्वे और पंचनामा कर रही हैं। प्रशासन द्वारा इन्हीं परिवारों को आर्थिक सहायता और मुफ्त राशन वितरित किया जा रहा है, जिससे दुकानों में गुजर-बसर करने वाले हाशिए पर आ गए हैं।

‘दुकान ही जिनका घर है, उन्हें न्याय दे प्रशासन’

सोमवंशी ने स्थानीय स्थिति स्पष्ट करते हुए बताया कि वसई-विरार में बड़ी संख्या में ऐसे मध्यमवर्गीय और गरीब परिवार हैं, जिनके पास रहने के लिए अलग से कोई घर नहीं है। वे दिन में दुकान चलाते हैं और रात में उसी परिसर में सोते हैं। बारिश के पानी ने उनकी आजीविका और आशियाना दोनों छीन लिया है। इसके बावजूद, प्रशासनिक नियमों की पेचीदगियों के कारण उन्हें पंचनामा और मुआवजा प्रक्रिया से बाहर रखा जा रहा है, जो कि सरासर अन्याय है।

भेदभाव मिटाने के लिए तत्काल निर्देश देने की मांग

धर्मराज कामगार संघटना ने मुख्यमंत्री फडणवीस से अपील की है कि वे इस मामले में व्यक्तिगत रूप से हस्तक्षेप करें। उन्होंने मांग की है कि:

  • दुकानों में रहने वाले सभी पात्र परिवारों का भी बिना किसी भेदभाव के तुरंत पंचनामा दर्ज किया जाए।
  • नियमों में ढील देकर उन्हें तत्काल वित्तीय सहायता, राशन और दैनिक उपयोग की आवश्यक वस्तुएं मुहैया कराई जाएं।
  • महानगरपालिका और राजस्व विभाग को स्पष्ट दिशानिर्देश जारी किए जाएं ताकि कोई भी वास्तविक पीड़ित सरकारी मदद से वंचित न रहे।

Sahil Yadav

Senior Journalist & Chief Editor covering breaking national and international news stories.