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महाराष्ट्र के सभी कोचिंग सेंटरों का हो अनिवार्य रजिस्ट्रेशन, शिवप्रताप सिंह सोमवंशी ने CM से की सख्त कानून की मांग |

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नालासोपारा।

महाराष्ट्र में बिना किसी रोक-टोक और बिना पंजीकरण के चल रहे निजी कोचिंग और ट्यूशन क्लासेस पर नकेल कसने की मांग तेज हो गई है। धर्मराज कामगार संघटना के अध्यक्ष शिवप्रताप सिंह सोमवंशी ने राज्य के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस को एक अहम ज्ञापन भेजकर सभी प्राइवेट शिक्षण संस्थानों का शिक्षा विभाग में अनिवार्य रजिस्ट्रेशन (पंजीकरण) कराने की अपील की है। सोमवंशी का कहना है कि छात्रों की सुरक्षा और शिक्षा के नाम पर होने वाली मनमानी व धांधली को रोकने के लिए अब सरकार को सख्त कदम उठाने ही होंगे।

सुरक्षा मानकों में लापरवाही पर जताई चिंता, हादसों का दिया हवाला

मुख्यमंत्री को सौंपे गए ज्ञापन में सोमवंशी ने देश के विभिन्न हिस्सों में कोचिंग सेंटरों में हुए हालिया हादसों और अग्निकांडों का विशेष रूप से उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि महाराष्ट्र के हर शहर और गली-कूचे में धड़ल्ले से ट्यूशन क्लासेस चल रहे हैं, लेकिन इनमें से अधिकांश के पास न तो कोई सरकारी अनुमति है और न ही सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम।

उन्होंने सरकार से मांग की है कि किसी भी प्राइवेट कोचिंग क्लास को चलाने की अनुमति देने से पहले कुछ कड़े नियम तय किए जाएं, जिनमें शामिल हैं:

  • शिक्षण संस्थान की बिल्डिंग का अनिवार्य स्ट्रक्चरल और फायर सेफ्टी ऑडिट।
  • अग्निशमन विभाग (Fire Department) की वैध एनओसी (NOC)।
  • आपातकालीन निकास (Emergency Exit) और सुरक्षा के अन्य तय मानकों की ग्राउंड रिपोर्ट।

भारी फीस और धोखाधड़ी के खिलाफ कानूनी चाबुक की मांग

सुरक्षा के साथ-साथ सोमवंशी ने छात्रों और अभिभावकों के आर्थिक शोषण का मुद्दा भी प्रमुखता से उठाया। उन्होंने कहा कि कई बड़े और छोटे संस्थान विज्ञापनों के दम पर छात्रों से मोटी फीस वसूल लेते हैं, लेकिन बदले में वैसी गुणवत्तापूर्ण शिक्षा नहीं देते। कुछ मामलों में तो संस्थान बीच में ही ताला लगाकर रफूचक्कर हो जाते हैं, जिससे विद्यार्थियों का भविष्य और अभिभावकों की गाढ़ी कमाई दोनों डूब जाती है।

धर्मराज कामगार संघटना ने मुख्यमंत्री से मांग की है कि नियमों का उल्लंघन करने वाले, भ्रामक विज्ञापन देने वाले और आर्थिक धोखाधड़ी करने वाले कोचिंग संचालकों के खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई का प्रावधान किया जाए। समय-समय पर इन संस्थानों का औचक निरीक्षण हो ताकि शिक्षा का बाजारीकरण करने वालों पर लगाम कसी जा सके और छात्रों को एक सुरक्षित एवं पारदर्शी माहौल मिल सके।

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Rajesh