वसई-विरार।
वसई-विरार महानगरपालिका (मनपा) द्वारा थोपे गए ‘डबल पानी टैक्स’ ने स्थानीय राजनीति में उबाल ला दिया है। इस फैसले के खिलाफ अब न सिर्फ आम जनता बल्कि सोशल मीडिया पर भी सत्तारूढ़ बहुजन विकास आघाड़ी (बीवीए) और महापौर अजीव पाटिल के खिलाफ मोर्चा खुल गया है। इंटरनेट और राजनीतिक हलकों में वायरल हो रहे एक तीखे लेख ने महापौर की कार्यप्रणाली को कटघरे में खड़ा कर दिया है। आरोप लगाया जा रहा है कि महापौर इस विवादित टैक्स को खुद रद्द करने के बजाय जिम्मेदारी राज्य सरकार के पाले में डाल रहे हैं, जो उनकी प्रशासनिक नेतृत्व क्षमता पर बड़ा सवालिया निशान है।
‘सत्ता आपकी, तो जिम्मेदारी से क्यों भाग रहे?’ – जनता का सीधा सवाल
वायरल हो रहे लेख और स्थानीय चर्चाओं में दावा किया जा रहा है कि वसई-विरार महानगरपालिका में बहुजन विकास आघाड़ी के पास पूर्ण और मजबूत बहुमत है। इसके बावजूद, जनता को दोहरे पानी टैक्स की दोहरी मार से राहत दिलाने के लिए नगर निगम के स्तर पर कोई ठोस और ऐतिहासिक कदम नहीं उठाया गया।
स्थानीय नागरिकों का कहना है कि जब मनपा की सत्ता की चाबी बीवीए के पास है, तो इस जनविरोधी टैक्स को वापस लेने का अंतिम निर्णय भी स्थानीय निकाय को ही करना चाहिए। फैसले से बचने और मामले को राज्य सरकार के भरोसे छोड़ने के रवैए से नागरिकों में भारी असंतोष फैल रहा है।
बढ़ते आक्रोश के बीच चुप्पी, आने वाले चुनावों पर पड़ सकता है असर
डबल पानी टैक्स को लेकर शहर भर में फैले गुस्से के बीच, अब तक बहुजन विकास आघाड़ी (BVA) या महापौर अजीव पाटिल की ओर से कोई आधिकारिक स्पष्टीकरण या प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। हालांकि, इन वायरल आरोपों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हो सकी है, लेकिन जमीन पर आम लोगों का गुस्सा साफ देखा जा सकता है।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि पानी का यह मुद्दा आने वाले दिनों में वसई-विरार की राजनीति की दिशा तय कर सकता है। यदि समय रहते इस दोहरे कर को वापस नहीं लिया गया या प्रशासन ने इस पर कोई राहत नहीं दी, तो सत्तारूढ़ दल को आगामी नगर निगम चुनावों में भारी विरोध का सामना करना पड़ सकता है।