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बिहार कैबिनेट: 18 बड़े फैसलों से बदलेगा विकास का चेहरा, नौकरी-उद्योग-तकनीक को मिली नई दिशा |

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पटना। बिहार सरकार की कैबिनेट बैठक में आज विकास के कई अहम रास्तों पर मुहर लगा दी गई। मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी की अध्यक्षता में हुई इस बैठक में कुल 18 प्रस्तावों को मंजूरी मिली, जिनका उद्देश्य राज्य के आर्थिक, सामाजिक और तकनीकी ढांचे को मजबूत करना है।
कर्मचारियों और पेंशनभोगियों को राहत
सरकारी कर्मचारियों और पेंशनभोगियों के महंगाई भत्ते में संशोधन को कैबिनेट ने स्वीकृति दे दी है। इस निर्णय से लाखों परिवारों को महंगाई के दौर में राहत मिलने की उम्मीद है।
औद्योगिक विकास को बड़ी छलांग
वैशाली जिले में लगभग 1243 एकड़ भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया शुरू की जाएगी। इसमें से 100 एकड़ जमीन नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ फूड टेक्नोलॉजी (NIFTEM) की स्थापना के लिए केंद्र सरकार को निःशुल्क दी जाएगी। इसके अलावा, बिहटा औद्योगिक क्षेत्र में स्थित एक डेयरी प्लांट को वित्तीय सहायता देने का भी प्रस्ताव पास हुआ।
शिक्षा विस्तार: नए कॉलेज, नए अवसर
पूर्वी चंपारण और मुंगेर जिले के तीन प्रखंडों में नए डिग्री कॉलेज खोले जाएंगे। उच्च शिक्षा को बढ़ावा देने के लिए इन संस्थानों में कुल 132 नए पद सृजित किए जाएंगे।
तकनीक और डिजिटल नवाचार पर फोकस


सिंगापुर की एजेंसी GFTN के सहयोग से ‘आर्यभट्ट दृष्टि परियोजना’ के तहत आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, स्किल डेवलपमेंट और इनोवेशन को बढ़ावा देने के लिए 209 करोड़ रुपये आवंटित किए गए हैं। यह कदम युवाओं को भविष्य की तकनीकों से जोड़ेगा।
हरित परिवहन और रोजगार
‘मुख्यमंत्री बिहार पर्यावरण अनुकूल परिवहन रोजगार योजना’ के लिए 110 करोड़ रुपये स्वीकृत किए गए हैं। साथ ही, बिहार इलेक्ट्रिक वाहन नीति 2026 में संशोधन को भी मंजूरी मिली है, जिससे इलेक्ट्रिक वाहनों को बढ़ावा मिलेगा।
प्रशासनिक और सुरक्षा व्यवस्था में सुधार
कानून-व्यवस्था को और प्रभावी बनाने के लिए पूर्वी चंपारण, समस्तीपुर, मधुबनी, वैशाली और सिवान में ग्रामीण एसपी के पांच नए पद बनाए जाएंगे। किशनगंज में CISF प्रशिक्षण केंद्र के लिए 110 एकड़ भूमि केंद्र को निःशुल्क दी जाएगी।
पशुपालन और अनुशासनात्मक कार्रवाई
लखीसराय में पशुपालन विभाग के सीमन स्टेशन के लिए 80 एकड़ भूमि उपलब्ध कराई जाएगी। वहीं, भोजपुर जिले के एक शिक्षा अधिकारी को वित्तीय अनियमितता पाए जाने पर सेवा से बर्खास्त करने के प्रस्ताव को भी मंजूरी मिली।
वित्तीय प्रावधान
राज्य सरकार ने वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए लगभग 72,901 करोड़ रुपये तक कर्ज लेने की प्रशासनिक स्वीकृति प्रदान की है, जिससे विकास कार्यों में गति आएगी।
विश्लेषण
जानकारों का मानना है कि इन निर्णयों का समग्र प्रभाव बिहार के रोजगार बाजार, औद्योगिक निवेश और डिजिटल बुनियादी ढांचे पर देखने को मिलेगा। तकनीकी शिक्षा और हरित ऊर्जा पर जोर देने वाले ये कदम राज्य को दीर्घकालिक विकास की ओर ले जाएंगे।
रिपोर्ट: विनोद प्रसाद, ब्यूरो चीफ, तृप्ति प्रमाण

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Rajesh