वसई। कोंकण तटीय क्षेत्र में बसे ईस्ट इंडियन समुदाय का पारंपरिक आगेरा पर्व वसई में उत्साह और श्रद्धा के साथ मनाया गया। इस वर्ष पहली बार वसई में आगेरा पर्व के अवसर पर भव्य शोभायात्रा निकाली गई, जो माणिकपुर क्षेत्र से संत मायकल चर्च तक पहुंची। इस दौरान खेत की पहली फसल चर्च में अर्पित कर ईश्वर के प्रति कृतज्ञता व्यक्त की गई।
मुंबई, वसई, उत्तन, ठाणे और रायगढ़ क्षेत्र में ईस्ट इंडियन समुदाय द्वारा हर वर्ष अक्टूबर के पहले रविवार को आगेरा पर्व मनाया जाता है। स्थानीय स्तर पर इसे फसल कटाई के पर्व के रूप में भी जाना जाता है। इस अवसर पर किसान पारंपरिक परिधान ‘लुगरा’ पहनकर पारंपरिक संगीत के साथ शोभायात्रा निकालते हैं।
वसई के माणिकपुर धर्मग्राम में वर्ष 1890 से आगेरा पर्व मनाए जाने की परंपरा है। इस वर्ष संत मायकल चर्च के धर्मगुरु फादर असिस रॉड्रिग्ज के मार्गदर्शन में भव्य शोभायात्रा निकाली गई। प्रतीकात्मक कटाई के बाद कनोसा स्कूल परिसर से संत मायकल चर्च तक जुलूस पहुंचा।
इसके बाद किसानों द्वारा अर्पित की गई फसल के लिए आशीर्वाद विधि और विशेष मिस्सा यानी प्रार्थना का आयोजन किया गया।
फादर असिस रॉड्रिग्ज ने कहा कि पहली फसल ईश्वर को अर्पित कर आशीर्वाद लेना और धन्यवाद देना पूर्वजों से चली आ रही सुंदर परंपरा है। उन्होंने कहा कि आगेरा केवल किसानों का पर्व नहीं, बल्कि हर मेहनतकश व्यक्ति का उत्सव है।
सामाजिक कार्यों से जुड़ी परंपरा
आगेरा पर्व के साथ सामाजिक कार्यों की परंपरा भी जुड़ी हुई है। विल्सन कोलासो ने बताया कि करीब 50 से 60 वर्ष पहले समुदाय ने मिलकर ‘आगेरा फंड’ शुरू किया था।
इस निधि से पर्व का खर्च निकालने के बाद बची राशि चर्च के कार्यों में लगाई जाती थी। इसी फंड के माध्यम से बिशप डॉमिनिक अब्रिओ मेमोरियल मेडिकल फंड की शुरुआत हुई।
इस मेडिकल फंड के जरिए कैंसर सहित विभिन्न गंभीर बीमारियों से पीड़ित मरीजों को आर्थिक सहायता दी जाती है।
आगेरा पर्व धार्मिक आस्था, कृषि परंपरा, सामुदायिक एकजुटता और सामाजिक सेवा से जुड़ी विरासत को आगे बढ़ाने का माध्यम बना हुआ है।




