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अधूरी नाला सफाई और सुरक्षा दीवारों की कमी से बाढ़ का खतरा, वसई-विरार के नागरिकों ने प्रशासन से की कार्रवाई की मांग |

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वसई (तृप्ति प्रमाण): मानसून के आगमन के साथ ही वसई-विरार शहर के निचले और घनी आबादी वाले क्षेत्रों में जलभराव और बाढ़ जैसी स्थिति को लेकर नागरिकों में चिंता बढ़ गई है। नालों के समीप बसे इलाकों में हर साल बारिश का पानी भरने से जनजीवन अस्त-व्यस्त हो जाता है। ऐसे में स्थानीय लोगों ने महानगरपालिका प्रशासन से समय रहते ठोस और प्रभावी उपाय करने की मांग की है।

शहरीकरण के कारण बढ़ा खतरा

स्थानीय नागरिकों का कहना है कि शहर में तेजी से हुए शहरीकरण के चलते नालों के आसपास बड़ी संख्या में बस्तियां बस गई हैं। पिछले वर्ष नालासोपारा, वसई पूर्व और विरार पूर्व के कई निचले क्षेत्रों में भारी जलभराव हुआ था, जिससे लोगों को भारी मशक्कत का सामना करना पड़ा था। इस वर्ष भी नागरिकों को ऐसी ही स्थिति का डर सता रहा है।

जलभराव से बढ़ती बीमारियों की आशंका

नागरिकों के अनुसार, जलभराव के बाद पानी निकासी में कई घंटे लग जाते हैं, जिससे कचरा, गाद और दुर्गंध फैलती है। इससे संक्रामक बीमारियों का खतरा भी मंडराने लगता है। लोगों ने प्रशासन से मांग की है कि सभी प्रमुख नालों का पुनरीक्षण किया जाए, सफाई कार्य को पूरी तरह सुनिश्चित किया जाए और संवेदनशील क्षेत्रों में सुरक्षा दीवारों का निर्माण किया जाए।

महानगरपालिका का दावा: सफाई कार्य अंतिम चरण में

महानगरपालिका के अतिरिक्त आयुक्त संजय हेरवाडे ने बताया कि संभावित जलभराव वाले क्षेत्रों का सर्वेक्षण कर लिया गया है। जिन जगहों पर पानी जल्दी नहीं निकलता, वहां पंप लगाने की योजना तैयार की गई है। उन्होंने आश्वासन दिया कि किसी भी आपात स्थिति से निपटने और नागरिकों को तुरंत सहायता प्रदान करने के लिए प्रशासनिक तंत्र पूरी तरह से सजग और तैयार है।

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Rajesh