सितंबर में बारिश कम होने से किसानों की चिंता बढ़ी; दाना भरने के अंतिम चरण में धान की फसल को पानी की जरूरत
वसई: वसई-विरार क्षेत्र में धान की खेती करने वाले किसानों की चिंता बढ़ गई है। सितंबर महीने में बारिश का जोर कम रहने के कारण दाना भरने के अंतिम चरण में पहुंच चुकी धान की फसल पर संकट की स्थिति बन रही है। किसानों के अनुसार, फसल के अंतिम चरण में पर्याप्त पानी की आवश्यकता होती है। ऐसे में अगले सप्ताह बारिश नहीं हुई तो उत्पादन प्रभावित होने की आशंका है।
वसई तालुका में इस वर्ष करीब 7,000 से 7,200 हेक्टेयर क्षेत्र में धान की खेती की गई है। इसमें हलवे, निमगरवे और गरवे प्रमुख किस्में हैं। हलवे किस्म की फसल फिलहाल दाना भरने के अंतिम चरण में है और इसकी कटाई 10 से 15 अक्टूबर के बीच शुरू होने की संभावना है। वहीं निमगरवे और गरवे किस्में फूल आने तथा दाना भरने की संवेदनशील अवस्था में हैं।
अगस्त में 43 प्रतिशत और सितंबर में सिर्फ 17 प्रतिशत बारिश
किसानों के अनुसार, इस वर्ष बारिश देर से शुरू होने के कारण पिछले वर्ष की तुलना में बुवाई का क्षेत्र भी कम रहा। असमान बारिश के चलते कुछ किसानों को दोबारा बुवाई करनी पड़ी।
पारोल के किसान नरेश पाटील ने कहा कि यदि अगले सप्ताह बारिश होती है तो किसानों को कुछ राहत मिल सकती है। उन्होंने मांग की कि बारिश नहीं होने की स्थिति में पालघर जिले को भी सूखा प्रभावित जिलों में शामिल करने पर सरकार को विचार करना चाहिए।
वहीं तालुका कृषि अधिकारी सूरज जाधव के अनुसार, अगस्त में औसत बारिश का केवल 43 प्रतिशत, जबकि सितंबर में 17 प्रतिशत बारिश दर्ज की गई। फिलहाल जमीन में नमी और निचले इलाकों में पानी उपलब्ध होने के कारण स्थिति नियंत्रण में है।
हालांकि, उन्होंने कहा कि अगले 6-7 दिनों में बारिश नहीं हुई और तेज धूप जारी रही, तो आवश्यकता के अनुसार फसल निरीक्षण और पंचनामा कर शासन को रिपोर्ट भेजी जाएगी।
पालघर सूखा प्रभावित जिलों की सूची से बाहर क्यों?
जून से सितंबर के अंत तक वसई तालुका में कुल औसत बारिश का करीब 87 प्रतिशत दर्ज किया गया है। जुलाई में औसत से अधिक बारिश हुई थी।
सरकारी मानदंडों के अनुसार, जुलाई के अंत तक 50 प्रतिशत से कम या सितंबर के अंत तक 75 प्रतिशत से कम बारिश होने पर सूखे अथवा वर्षाछाया संबंधी ट्रिगर लागू होता है। वसई में कुल 87 प्रतिशत बारिश दर्ज होने के कारण निर्धारित मानदंड लागू नहीं हुआ है।
हालांकि, सितंबर में बारिश की कमी और बढ़ती गर्मी के कारण धान की फसल के अंतिम चरण में किसानों की चिंता बढ़ गई है। अब अगले कुछ दिनों में होने वाली बारिश फसल के उत्पादन के लिहाज से महत्वपूर्ण मानी जा रही है।
रिपोर्टर: तृप्ति प्रमाण




