80 से अधिक परियोजनाओं के मामले में प्रकरणनिहाय निर्णय के निर्देश; दोषी बिल्डर, आर्किटेक्ट और अधिकारियों पर कार्रवाई के संकेत
नालासोपारा, 21 सितंबर: वसई-विरार महानगरपालिका क्षेत्र में अतिरिक्त एफएसआई से जुड़े विवाद के कारण प्रभावित पुनर्विकास परियोजनाओं को लेकर सोमवार को मुंबई में विशेष बैठक आयोजित की गई। बैठक में प्रभावित परियोजनाओं में रहने वाले मूल निवासियों और घर खरीदारों के हितों की रक्षा करते हुए आगे की कार्रवाई करने पर जोर दिया गया।
हालिया रिपोर्टों के अनुसार, वसई-विरार क्षेत्र में 80 से अधिक पुनर्विकास परियोजनाओं पर निर्माण, भोगवटा प्रमाणपत्र (OC) और दस्त पंजीकरण से संबंधित प्रतिबंध लगाए गए हैं। बाद में मनपा स्तर पर बड़ी संख्या में परियोजनाधारकों की सुनवाई भी पूरी की गई है।
असीम गुप्ता की अध्यक्षता में बैठक
बैठक की अध्यक्षता राज्य के अपर मुख्य सचिव असीम गुप्ता ने की। बैठक में विधायक राजन नाईक, एमएमआरडीए के अतिरिक्त महानगर आयुक्त पी. वेलरासू, पालघर जिलाधिकारी इंदू रानी जाखड़, वसई-विरार मनपा आयुक्त पृथ्वीराज बी.पी., विधायक स्नेहा दुबे तथा नगर विकास विभाग के उपसंचालक निर्मलकुमार चौधरी सहित संबंधित अधिकारी उपस्थित रहे।
पुनर्विकास परियोजनाओं पर कार्रवाई के कारण पुराने और जर्जर भवनों से बाहर रह रहे मूल निवासियों तथा संबंधित परियोजनाओं में निवेश करने वाले खरीदारों के सामने अनिश्चितता की स्थिति बनी हुई है। रिपोर्टों के अनुसार, इन परियोजनाओं में अतिरिक्त एफएसआई की मंजूरी को लेकर मनपा की पुनर्समीक्षा के बाद प्रतिबंध लगाए गए हैं।
राजन नाईक ने उठाया मूल निवासियों और खरीदारों का मुद्दा
विधायक राजन नाईक ने 15 सितंबर को मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस से मुलाकात कर प्रभावित पुनर्विकास परियोजनाओं से जुड़े प्रतिबंधों पर पुनर्विचार की मांग की थी। उन्होंने कहा था कि जिन मूल निवासियों ने अधिकृत मंजूरियों और पुनर्विकास प्रक्रिया पर भरोसा करते हुए अपने पुराने घर खाली किए तथा जिन खरीदारों ने परियोजनाओं में निवेश किया, उन्हें प्रशासनिक अथवा तकनीकी खामियों का खामियाजा नहीं भुगतना चाहिए।
बैठक में परियोजनाओं का प्रकरणनिहाय आकलन करने तथा पात्र मामलों में अंतिम या आंशिक भोगवटा प्रमाणपत्र जैसे विकल्पों पर विचार करने के निर्देश दिए गए।
दोषी पाए जाने वालों पर कार्रवाई
बैठक में कुछ परियोजनाओं में कंप्यूटर प्रणाली से चेतावनी संकेत मिलने के बावजूद मंजूरी दिए जाने की संभावना का मुद्दा भी सामने आया। इस संबंध में जांच कर जिम्मेदारी तय करने और दोषी पाए जाने वाले बिल्डरों, आर्किटेक्ट्स तथा संबंधित अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई करने के निर्देश दिए गए।
वहीं, हालिया सुनवाई प्रक्रिया में कई विकासकों ने यह पक्ष रखा है कि उन्होंने उस समय मनपा से प्राप्त अनुमतियों के अनुसार निर्माण किया था। कुछ परियोजनाधारकों को अतिरिक्त दस्तावेज या स्पष्टीकरण प्रस्तुत करने के लिए समय भी दिया गया है।
1,500 एकड़ सरकारी जमीन के नियोजित विकास पर चर्चा
बैठक में वसई-विरार क्षेत्र में रोजगार के अवसर बढ़ाने के उद्देश्य से नालासोपारा और वसई रेलवे स्टेशनों के आसपास की लगभग 1,500 एकड़ सरकारी जमीन के नियोजित विकास के प्रस्ताव पर भी चर्चा हुई।
प्रस्तावित विकास में बाढ़ नियंत्रण और पर्यावरण संरक्षण को प्राथमिकता देने तथा स्थानीय भूमिपुत्रों को विश्वास में लेकर आगे बढ़ने पर जोर दिया गया। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, बाढ़ नियंत्रण से संबंधित NEERI-IIT रिपोर्ट को ध्यान में रखते हुए एमएमआरडीए के माध्यम से सलाहकार नियुक्त कर विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (DPR) तैयार करने के निर्देश दिए गए।
बैठक में रोजगार सृजन के साथ बाढ़ नियंत्रण, पर्यावरणीय आवश्यकताओं और विकास नियोजन में आरक्षित भूखंडों की स्थिति को बनाए रखने जैसे पहलुओं पर भी ध्यान देने की बात कही गई।
फिलहाल प्रभावित पुनर्विकास परियोजनाओं को लेकर प्रशासनिक समीक्षा और सुनवाई की प्रक्रिया जारी है। अंतिम निर्णय परियोजनावार जांच, उपलब्ध दस्तावेजों और संबंधित प्राधिकरणों की समीक्षा के आधार पर होने की बात सामने आई है।




