विधायक स्नेहा दुबे पंडित ने महावितरण और महापारेषण के अधिकारियों के साथ लिया परियोजनाओं की प्रगति का जायजा
तृप्ति प्रमाण | राष्ट्रीय हिंदी साप्ताहिक
संवाददाता: साहिल यादव
वसई-विरार। तेजी से बढ़ती आबादी, आवासीय परियोजनाओं और औद्योगिक गतिविधियों के चलते वसई-विरार क्षेत्र में बिजली की मांग लगातार बढ़ रही है। इस बढ़ती जरूरत को देखते हुए बिजली वितरण व्यवस्था मजबूत करने के उद्देश्य से विभिन्न स्थानों पर नए बिजली उपकेंद्र स्थापित करने की योजनाओं पर काम किया जा रहा है।
इसी क्रम में वसई विधानसभा क्षेत्र की विधायक स्नेहा दुबे पंडित ने 31 अक्टूबर 2026 को प्रस्तावित बिजली उपकेंद्रों के निर्माण स्थलों का दौरा कर परियोजनाओं की प्रगति का जायजा लिया। इस दौरान उन्होंने महावितरण और महापारेषण के अधिकारियों से निर्माण कार्य, तकनीकी व्यवस्था और परियोजनाओं की समयसीमा के संबंध में जानकारी प्राप्त की।
प्राप्त जानकारी के अनुसार, वसई पूर्व के मधुबन-सुरक्षा सिटी और कामण-पोमण, विरार पूर्व के नारंगी और एचडीआईएल तथा विरार पश्चिम के चिखलडोंगरी में 220/22 केवी क्षमता के बिजली उपकेंद्र स्थापित किए जाने की योजना है।
पोमण उपकेंद्र का निर्माण अंतिम चरण में
इन परियोजनाओं में वसई पूर्व के पोमण में निर्माणाधीन 220/22 केवी बिजली उपकेंद्र का काम महत्वपूर्ण चरण में पहुंच गया है। उपलब्ध जानकारी के मुताबिक, इस परियोजना के लिए 23 अप्रैल 2025 को कार्यादेश जारी किया गया था। वर्तमान में इसका निर्माण अंतिम चरण में बताया जा रहा है। परियोजना पूरी होने के बाद इसे पूरी क्षमता से शुरू करने की दिशा में प्रयास किए जा रहे हैं।
GIS तकनीक से बिजली आपूर्ति को मिलेगी मजबूती
पोमण में तैयार हो रहा बिजली उपकेंद्र गैस इंसुलेटेड स्विचगियर (GIS) तकनीक पर आधारित है। इस तकनीक में प्रमुख विद्युत उपकरण विशेष बंद चेंबर में लगाए जाते हैं। इससे धूल, बारिश, तेज हवा, समुद्री वातावरण और औद्योगिक प्रदूषण जैसे बाहरी प्रभावों से उपकरणों को सुरक्षित रखने में मदद मिलती है।
पारंपरिक AIS व्यवस्था की तुलना में GIS तकनीक कम जगह में उपकेंद्र स्थापित करने और परिचालन संबंधी जोखिम कम करने में उपयोगी मानी जाती है।
इस परियोजना के शुरू होने से आसपास के गांवों, औद्योगिक क्षेत्रों और राष्ट्रीय राजमार्ग के निकट स्थित इलाकों में बिजली वितरण व्यवस्था बेहतर होने की उम्मीद है। इससे स्थानीय नागरिकों और व्यावसायिक प्रतिष्ठानों को होने वाली बिजली संबंधी परेशानियों में कमी आने की संभावना जताई जा रही है।
चिखलडोंगरी उपकेंद्र के लिए वैकल्पिक जगह निर्धारित
निरीक्षण के दौरान चिखलडोंगरी में प्रस्तावित बिजली उपकेंद्र की प्रगति पर भी चर्चा हुई। वर्सोवा-विरार सी लिंक परियोजना के कारण पहले निर्धारित स्थल को लेकर कुछ तकनीकी और स्थान संबंधी अड़चनें सामने आई थीं।
विधायक स्नेहा दुबे पंडित की ओर से किए गए प्रयासों के बाद उपकेंद्र के लिए वैकल्पिक स्थान निर्धारित कर वहां निर्माण प्रक्रिया आगे बढ़ाए जाने की जानकारी दी गई।
अधिकारियों ने निरीक्षण के दौरान बताया कि चिखलडोंगरी उपकेंद्र को अगले एक से डेढ़ वर्ष के भीतर कार्यान्वित करने की दिशा में प्रयास किए जा रहे हैं। हालांकि, इसकी वास्तविक समयसीमा निर्माण और तकनीकी प्रक्रियाओं की प्रगति पर निर्भर करेगी।
अधिकारियों की मौजूदगी में परियोजनाओं की समीक्षा
इस दौरे के दौरान महावितरण वसई मंडल के अधीक्षक अभियंता माणिक राठोड, ईएचवी परियोजना विभाग कल्याण के कार्यकारी अभियंता अरुण वाडे, वसई विभाग के कार्यकारी अभियंता प्रवीण सुटे, विरार विभाग के कार्यकारी अभियंता उमेश लेले, महावितरण के कार्यकारी अभियंता मुकुंद देशमुख और महापारेषण के कार्यकारी अभियंता घुले सहित संबंधित विभागों के अधिकारी एवं सिविल इंजीनियर उपस्थित रहे।
इसके अलावा मयंक शेठ, प्रवीण गावडे, संदीप पाटील, मयूर नाईक, आशीष जोशी, सुधीर मेहेर और ऋषल म्हात्रे सहित अन्य पदाधिकारी एवं कार्यकर्ता भी मौजूद थे।
वसई-विरार में बिजली की बढ़ती मांग को देखते हुए इन उपकेंद्रों का निर्माण क्षेत्र की आधारभूत सुविधाओं के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। अब इन परियोजनाओं को निर्धारित समय में पूरा कर बिजली आपूर्ति व्यवस्था को कितना बेहतर बनाया जा सकेगा, इस पर स्थानीय नागरिकों और औद्योगिक क्षेत्र की नजरें रहेंगी।


