44वें वर्ष में साईंनाथ मित्र मंडल की अनोखी पहल, 22 फीट की इको-फ्रेंडली गणेश प्रतिमा स्थापित |

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छह वर्षों से कागज की गणेश प्रतिमाओं की स्थापना, चलचित्रों के जरिए सामाजिक मुद्दों पर जागरूकता का प्रयास

नालासोपारा। गणेशोत्सव के दौरान भक्ति और आस्था के साथ पर्यावरण संरक्षण का संदेश देने की पहल वसई-विरार में देखने को मिल रही है। सार्वजनिक साईंनाथ मित्र मंडल ने अपने 44वें वर्ष में प्रवेश करते हुए इस वर्ष 22 फीट ऊंची कागज और टिशू पेपर से निर्मित गणेश प्रतिमा स्थापित की है।

मंडल के अनुसार, यह पालघर जिले में कागज से तैयार की गई सबसे बड़ी गणेश प्रतिमा है। विशाल आकार और पर्यावरण-पूरक निर्माण के कारण प्रतिमा श्रद्धालुओं के आकर्षण का केंद्र बनी हुई है।

40 से 50 मिनट में पानी में घुलने का मंडल का दावा

मंडल के अध्यक्ष योगेश सिंह के अनुसार, प्रतिमा को पर्यावरण के अनुकूल सामग्री से तैयार किया गया है। मंडल का दावा है कि विसर्जन के बाद यह प्रतिमा करीब 40 से 50 मिनट में पानी में घुल जाएगी।

मंडल के अनुसार, इस तरह की प्रतिमा का उद्देश्य विसर्जन के बाद जलस्रोतों में अवशेषों के प्रभाव को कम करना है। हालांकि, पानी में घुलने का वास्तविक समय परिस्थितियों और जलस्रोत के आधार पर अलग हो सकता है।

छह वर्षों से जारी है इको-फ्रेंडली गणेशोत्सव

योगेश सिंह ने बताया कि सार्वजनिक साईंनाथ मित्र मंडल इस वर्ष अपने 44वें वर्ष में प्रवेश कर रहा है। मंडल की ओर से पिछले करीब छह वर्षों से कागज से बनी इको-फ्रेंडली गणेश प्रतिमाएं स्थापित की जा रही हैं।

उनके अनुसार, गणेशोत्सव आस्था और श्रद्धा का पर्व है, लेकिन इसके साथ पर्यावरण संरक्षण की जिम्मेदारी निभाना भी जरूरी है। इसी सोच के साथ मंडल ने गणेशोत्सव को पर्यावरण संरक्षण के संदेश से जोड़ने का प्रयास किया है।

इस वर्ष स्थापित 22 फीट ऊंची प्रतिमा को विशेष रूप से आकर्षक स्वरूप दिया गया है। मंडल का कहना है कि प्रतिमा का विशाल आकार होने के बावजूद इसके निर्माण में पर्यावरण-पूरक सामग्री का इस्तेमाल किया गया है।

चलचित्रों के जरिए सामाजिक मुद्दों पर जागरूकता

गणेशोत्सव को सामाजिक संदेश से जोड़ने के लिए मंडल ने इस वर्ष चलचित्रों का आयोजन भी शुरू किया है। इसका उद्देश्य विशेष रूप से नई पीढ़ी और Gen-Z को गणेशोत्सव से जोड़ने के साथ सामाजिक एवं राष्ट्रीय मुद्दों के प्रति जागरूक करना है।

चलचित्रों में ‘बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ’, ‘सेव वॉटर’ और ‘जय जवान, जय किसान’ जैसे विषयों को प्रमुखता दी गई है। इनके माध्यम से बेटियों की शिक्षा, जल संरक्षण, जवानों के सम्मान और किसानों के महत्व का संदेश लोगों तक पहुंचाने का प्रयास किया जा रहा है।

योगेश सिंह ने कहा कि पिछले छह वर्षों से चल रही पर्यावरण-पूरक गणेशोत्सव की पहल को आगे भी जारी रखने का प्रयास किया जाएगा। मंडल का उद्देश्य गणेशोत्सव के माध्यम से श्रद्धा और उत्सव के साथ पर्यावरण एवं समाज के प्रति जिम्मेदारी का संदेश लोगों तक पहुंचाना है।

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