जस्टिस सतीश चंद्र शर्मा की सेवानिवृत्ति के बाद 5 साल तक सरकारी पद न देने की मांग
मुंबई। मुख्य चुनाव आयुक्त और अन्य चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति से जुड़े 2023 के कानून को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर सुप्रीम कोर्ट में हुई सुनवाई के बाद वंचित बहुजन आघाड़ी के राष्ट्रीय अध्यक्ष एडवोकेट प्रकाश आंबेडकर ने न्यायपालिका और सेवानिवृत्ति के बाद न्यायाधीशों की नियुक्ति को लेकर अपनी राय सामने रखी है।
23 सितंबर 2026 को न्यायमूर्ति दीपांकर दत्ता और न्यायमूर्ति सतीश चंद्र शर्मा की दो सदस्यीय पीठ ने चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति से जुड़े कानून को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर सुनवाई की। दोनों न्यायाधीशों की राय इस सवाल पर अलग रही कि मामले को संविधान पीठ के समक्ष भेजा जाना चाहिए या नहीं। बाद में मामले को उचित पीठ के गठन पर विचार के लिए भारत के मुख्य न्यायाधीश के समक्ष रखने का निर्देश दिया गया।
2023 के कानून पर क्या है विवाद?
मामला ‘मुख्य चुनाव आयुक्त और अन्य चुनाव आयुक्त (नियुक्ति, सेवा की शर्तें और कार्यकाल) अधिनियम, 2023’ से जुड़ा है।
इस कानून के तहत चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति के लिए चयन समिति में प्रधानमंत्री, लोकसभा में विपक्ष के नेता और प्रधानमंत्री द्वारा नामित केंद्रीय कैबिनेट मंत्री शामिल होते हैं। इस व्यवस्था में भारत के मुख्य न्यायाधीश को चयन समिति से बाहर रखा गया है। इसी व्यवस्था को लेकर याचिकाएं सुप्रीम कोर्ट में दायर की गई हैं।
न्यायमूर्ति दीपांकर दत्ता और न्यायमूर्ति सतीश चंद्र शर्मा ने मामले को संविधान पीठ के पास भेजे जाने के सवाल पर अलग-अलग राय दी। न्यायमूर्ति शर्मा ने कहा कि कानून की संवैधानिक वैधता से जुड़े महत्वपूर्ण सवालों पर बड़ी पीठ द्वारा विचार किया जाना चाहिए।
प्रकाश आंबेडकर ने क्या कहा?
इसी सुनवाई को लेकर प्रकाश आंबेडकर ने सोशल मीडिया पोस्ट के माध्यम से न्यायमूर्ति सतीश चंद्र शर्मा की आगामी सेवानिवृत्ति का उल्लेख करते हुए एक मांग रखी।
प्रकाश आंबेडकर का कहना है कि न्यायमूर्ति शर्मा की सेवानिवृत्ति के बाद कम से कम पांच वर्षों तक उन्हें किसी सरकारी पद पर नियुक्त नहीं किया जाना चाहिए।
यह मांग प्रकाश आंबेडकर का राजनीतिक और सार्वजनिक मत है। यह सुप्रीम कोर्ट का कोई निर्देश या मौजूदा वैधानिक प्रतिबंध नहीं है।
जस्टिस सतीश चंद्र शर्मा की सेवानिवृत्ति कब?
सुप्रीम कोर्ट की आधिकारिक वेबसाइट के अनुसार, न्यायमूर्ति सतीश चंद्र शर्मा का जन्म 12 मार्च 1963 को हुआ था और उनकी सेवानिवृत्ति की तारीख 11 मार्च 2028 दर्ज है।
इसलिए 29 नवंबर 2026 की सेवानिवृत्ति की जानकारी इस खबर के संदर्भ में सही नहीं है।
अब आगे क्या होगा?
सुप्रीम कोर्ट की दो सदस्यीय पीठ में राय अलग होने के बाद मामला अब मुख्य न्यायाधीश के समक्ष है, जहां संविधान पीठ के गठन पर निर्णय लिया जाना है। न्यायालय के सामने मुख्य सवालों में 2023 के कानून की संवैधानिक वैधता और चुनाव आयोग की स्वतंत्रता से जुड़े मुद्दे शामिल हैं।
इस मामले में आगे होने वाली संविधान पीठ की सुनवाई यह तय करने में महत्वपूर्ण होगी कि चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति की मौजूदा वैधानिक व्यवस्था संविधान के अनुरूप है या नहीं।
रिपोर्ट: सैय्यद जाहिद अली रियासत




