दीपावली पर भी पानी के लिए हाहाकार! वसई-विरार के कई इलाकों में बूंद-बूंद को तरस रहे नागरिक |

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जलकर भरने के बावजूद नियमित जलापूर्ति नहीं होने का आरोप; महंगे टैंकर और बोतलबंद पानी खरीदने को मजबूर लोग, गंदे पानी से बीमारी का खतरा

नालासोपारा। दीपावली जैसे बड़े त्योहार पर भी वसई-विरार शहर के कई इलाकों में पानी की किल्लत से नागरिक परेशान हैं। एक ओर महानगरपालिका प्रशासन और जनप्रतिनिधि शहर के विकास तथा आखिरी घर तक पानी पहुंचाने के दावे कर रहे हैं, वहीं दूसरी ओर नालासोपारा पूर्व सहित कई इलाकों के लोगों को रोजमर्रा की जरूरतों के लिए पानी के संकट का सामना करना पड़ रहा है। स्थानीय नागरिकों का आरोप है कि नियमित जलापूर्ति नहीं होने के कारण उन्हें महंगे दामों पर टैंकर और बोतलबंद पानी खरीदना पड़ रहा है।

नालासोपारा पूर्व के संतोष भुवन, श्रीराम नगर, कारगिल नगर, शर्मा वाड़ी, धानिवबाग और नागिनदास सहित आसपास के क्षेत्रों में पानी की समस्या ने लोगों की परेशानी बढ़ा दी है। स्थानीय नागरिकों के मुताबिक, कई-कई दिनों के अंतराल पर जलापूर्ति होती है। वह भी कम दबाव और अनियमित समय पर की जाती है। दीपावली के दौरान घरों की साफ-सफाई और अन्य घरेलू कामों के चलते पानी की जरूरत बढ़ जाती है, लेकिन पर्याप्त जलापूर्ति नहीं होने से लोगों की मुश्किलें बढ़ गई हैं।

जलकर भरने के बाद भी खरीदना पड़ रहा पानी

स्थानीय नागरिकों का कहना है कि महानगरपालिका को नियमित रूप से जलकर देने के बावजूद उन्हें अपनी जरूरत पूरी करने के लिए अतिरिक्त पैसे खर्च करने पड़ रहे हैं। टैंकरों और बोतलबंद पानी के सहारे घरेलू जरूरतें पूरी करनी पड़ रही हैं।

लोगों का आरोप है कि महंगे दाम चुकाने के बाद भी कई बार इस्तेमाल के लिए मिलने वाला पानी गंदा और दुर्गंधयुक्त होता है। इससे दूषित पानी के कारण बीमारियां फैलने का खतरा बना रहता है। नागरिकों का सवाल है कि जब उन्हें अपनी जेब से पानी खरीदना पड़ रहा है, तो महानगरपालिका उनसे जलकर किस सुविधा के लिए वसूल रही है?

टैंकरों की बढ़ती निर्भरता से आर्थिक बोझ

स्थानीय रहिवासियों के मुताबिक, नियमित जलापूर्ति नहीं होने के कारण टैंकरों पर निर्भरता लगातार बढ़ रही है। नागरिकों ने टैंकर संचालकों द्वारा मनमाने दाम वसूले जाने की शिकायत भी की है। आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के लिए पानी खरीदना अतिरिक्त बोझ बन गया है।

नागरिकों का आरोप है कि जलापूर्ति विभाग के अधिकारी समस्या दूर करने का आश्वासन देते हैं, लेकिन जमीनी स्तर पर स्थिति में कोई ठोस सुधार दिखाई नहीं देता।

टैक्स वसूली में सख्ती, पानी देने में लापरवाही क्यों?

नागरिकों ने महानगरपालिका की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए कहा कि टैक्स बकाया होने पर नल कनेक्शन काटने और गृहकर नहीं भरने पर मकान सील करने जैसी कार्रवाई की जाती है। लेकिन नियमित जलकर भरने के बावजूद पानी नहीं मिलने वाले नागरिकों की समस्याओं पर वैसी गंभीरता क्यों नहीं दिखाई जाती?

लोगों का कहना है कि तेजी से विकसित हो रहे वसई-विरार शहर की चमक-दमक के पीछे बड़ी आबादी आज भी पीने और घरेलू इस्तेमाल के पानी के लिए संघर्ष कर रही है। आखिरी घर तक पानी पहुंचाने के दावों और जमीनी हकीकत के बीच अंतर दिखाई दे रहा है।

इन इलाकों में भी पानी की किल्लत की शिकायत

महानगरपालिका क्षेत्र के मनवेल पाड़ा, फुलपाड़ा, सहकार नगर, गांधी चौक, नारायण नगर, चंदनसार, कोपरी, कारगिल नगर, प्रगति नगर, जीवदानी रोड, संतोष भुवन, तांडापाड़ा, शर्मा वाड़ी, वालाई पाड़ा, ओस्तवाल नगरी, सेंट्रल पार्क, अचोले, एवरशाइन, दुर्गा मंदिर, जीजाई नगर, मोरगांव, बिलालपाड़ा, धानिवबाग, वाकनपाड़ा, श्रीराम नगर और सागपाड़ा सहित कई क्षेत्रों में पानी की समस्या होने की शिकायतें सामने आई हैं।

जलापूर्ति विभाग का दावा: नियमित हो रही है सप्लाई

इस संबंध में वसई-विरार महानगरपालिका के जलापूर्ति विभाग के एक अधिकारी का कहना है कि फिलहाल शहर में नियमित रूप से जलापूर्ति की जा रही है। अधिकारी के मुताबिक, जलापूर्ति केंद्र की विद्युत आपूर्ति प्रणाली में तकनीकी खराबी के कारण कुछ दिक्कतें आई थीं। इसे दुरुस्त करने का काम किया जा रहा है और काम पूरा होने के बाद जलापूर्ति नियमित हो जाएगी।

हालांकि, नागरिकों का सवाल है कि यदि जलापूर्ति नियमित है, तो कई इलाकों के लोग कई-कई दिनों तक पानी के लिए क्यों परेशान हैं? अब देखना होगा कि महानगरपालिका प्रशासन इस समस्या के समाधान के लिए क्या ठोस कदम उठाता है और नागरिकों को नियमित, पर्याप्त तथा स्वच्छ पानी उपलब्ध कराने की दिशा में कब तक सुधार होता है।

रिपोर्टर: तृप्ति प्रमाण

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