क्या केंद्रीय चुनाव आयोग भारत सरकार का चुनाव आयोग बन गया है? एड. प्रकाश आंबेडकर ने SIR पर उठाए सवाल |

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महाराष्ट्र में SIR प्रक्रिया को लेकर पारदर्शिता, मतदाता सूची और कानूनी अधिकारों पर उठाए सवाल

पुणे: महाराष्ट्र में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) को लेकर वंचित बहुजन आघाड़ी (VBA) के राष्ट्रीय अध्यक्ष एड. प्रकाश आंबेडकर ने चुनाव आयोग की भूमिका और SIR प्रक्रिया पर कई सवाल उठाए हैं। उन्होंने प्रक्रिया से संबंधित अधिसूचना, पत्राचार और कानूनी प्रावधान सार्वजनिक करने की मांग दोहराते हुए इसे लेकर पारदर्शिता की आवश्यकता पर जोर दिया।

एड. प्रकाश आंबेडकर ने दावा किया कि महाराष्ट्र में SIR के दौरान करीब 2 करोड़ 90 लाख मतदाताओं के नाम हटाए जा सकते हैं और करीब 60 लाख नए मतदाता जोड़े जा सकते हैं। उन्होंने कहा कि VBA ने अप्रैल 2026 में ही पत्रकार परिषद के माध्यम से इस संबंध में अपनी आशंका व्यक्त की थी।

हालांकि, उपलब्ध वर्तमान चुनावी आंकड़े 2.90 करोड़ मतदाताओं के नाम हटाए जाने को स्थापित तथ्य के रूप में पुष्ट नहीं करते। महाराष्ट्र के मुख्य निर्वाचन अधिकारी एस. चोक्कलिंगम के अनुसार SIR प्रक्रिया में सामने आया 2.07 करोड़ का आंकड़ा उन enumeration forms से संबंधित था जो एकत्र नहीं हो सके थे। इसके बाद ड्राफ्ट मतदाता सूची प्रकाशित की गई और दावे एवं आपत्तियों की प्रक्रिया रखी गई है।

SIR की अधिसूचना और पत्राचार सार्वजनिक करने की मांग

आंबेडकर ने कहा कि VBA की ओर से महाराष्ट्र के मुख्य निर्वाचन अधिकारी एस. चोक्कलिंगम को पत्र भेजकर SIR से संबंधित अधिसूचना, पत्राचार और कानूनी प्रावधान सभी राजनीतिक दलों को उपलब्ध कराने की मांग की गई थी।

उनके अनुसार इस पत्र का अब तक जवाब नहीं मिला है। उन्होंने बताया कि इसी मुद्दे को लेकर मुंबई उच्च न्यायालय में याचिका दायर की गई है।

महाराष्ट्र में SIR से संबंधित आधिकारिक जानकारी मुख्य निर्वाचन अधिकारी, महाराष्ट्र की वेबसाइट पर भी उपलब्ध कराई गई है, जहां SIR 2026, संशोधित कार्यक्रम, प्रेस नोट और अन्य संबंधित सामग्री के लिंक दिए गए हैं।

जनप्रतिनिधित्व अधिनियम की धारा 21(3) का हवाला

एड. प्रकाश आंबेडकर ने Representation of the People Act, 1950 की धारा 21(3) का हवाला देते हुए महाराष्ट्र में SIR कराने के अधिकार और प्रक्रिया पर सवाल उठाए।

उन्होंने दावा किया कि इस तरह का पुनरीक्षण निर्वाचन क्षेत्र या उसके किसी हिस्से तक सीमित होने तथा संबंधित नियमों के तहत अधिसूचना जारी किए जाने की आवश्यकता से जुड़ा है। इस कानूनी व्याख्या को लेकर उन्होंने उच्च न्यायालय की भूमिका पर भी टिप्पणी की। उनके कुछ वक्तव्यों में न्यायपालिका को लेकर आलोचनात्मक आरोप भी शामिल रहे।

मतदाता सूची से नाम हटाने की प्रक्रिया पर भी सवाल

आंबेडकर ने मतदाता सूची से नाम हटाने की प्रक्रिया पर भी आपत्ति जताई। उनका कहना है कि किसी व्यक्ति की नागरिकता तय करने का अधिकार चुनाव आयोग के बजाय नागरिकता कानून के तहत सक्षम प्राधिकरण के पास होना चाहिए।

उन्होंने दावा किया कि “पड़ोसी नहीं मिला” या “व्यक्ति यहां नहीं रहता” जैसे कारणों के आधार पर बड़ी संख्या में नाम हटाने की प्रक्रिया की जा रही है। उन्होंने कहा कि किसी मतदाता का नाम हटाने से पहले शिकायत, नोटिस और सक्षम अधिकारी द्वारा निर्णय की प्रक्रिया आवश्यक होनी चाहिए।

दूसरी ओर, चुनाव आयोग की ओर से SIR प्रक्रिया में दावे और आपत्तियों के लिए अवसर उपलब्ध कराया गया है। महाराष्ट्र के मुख्य निर्वाचन अधिकारी के अनुसार ड्राफ्ट सूची से नाम छूटने वाले पात्र मतदाता Form 6 के जरिए नाम शामिल कराने के लिए आवेदन कर सकते हैं, जबकि Form 7 के माध्यम से आपत्ति और Form 8 के माध्यम से सुधार की प्रक्रिया उपलब्ध है।

महाराष्ट्र SIR को लेकर बॉम्बे हाईकोर्ट में याचिकाएं

महाराष्ट्र की SIR प्रक्रिया को लेकर बॉम्बे हाईकोर्ट में याचिकाएं भी दायर की गई हैं। इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के अनुसार, दायर याचिकाओं में SIR से जुड़े निर्णयों, डेटा और प्रक्रिया को सार्वजनिक करने तथा कुछ मामलों में हटाए गए मतदाताओं के नाम बहाल करने जैसी मांगें की गई हैं। एक याचिका में स्वतंत्र न्यायिक समिति से डेटा हटाने और सॉफ्टवेयर संबंधी मुद्दों की जांच की मांग भी की गई है।

आंबेडकर ने बिहार में SIR से संबंधित सुप्रीम कोर्ट की कार्यवाही का हवाला देते हुए महाराष्ट्र में दायर याचिका पर तत्काल सुनवाई का अनुरोध करने की बात कही है।

विपक्षी दलों से एकजुट होने की अपील

एड. प्रकाश आंबेडकर ने चुनाव प्रक्रिया में कथित अनियमितताओं के मुद्दे पर विपक्षी दलों से एकजुट होने की अपील की। उन्होंने सवाल उठाया कि केवल एक राजनीतिक दल के नेतृत्व में आंदोलन करने के बजाय सभी विपक्षी दलों को एक साथ आकर इस मुद्दे को उठाना चाहिए।

उन्होंने चुनाव व्यवस्था पर निरंतर निगरानी और सतर्कता की आवश्यकता पर जोर देते हुए ‘Election Commission of India v. Sivan Pillai’ और ‘Election Commission of India v. Ashok Kumar’ जैसे सुप्रीम कोर्ट के चुनाव संबंधी मामलों का संदर्भ भी दिया।

‘कॉर्पोरेट रूल’ को लेकर भी जताई चिंता

देश की मौजूदा राजनीतिक स्थिति पर टिप्पणी करते हुए आंबेडकर ने ‘कॉर्पोरेट रूल’ के खतरे का दावा किया। उन्होंने कहा कि सत्ता और निर्णय प्रक्रिया पर कॉर्पोरेट क्षेत्र का प्रभाव बढ़ रहा है।

उन्होंने नागरिकों से आंदोलनों में भाग लेने का आह्वान करते हुए कहा कि किसी आंदोलन को किस राजनीतिक दल ने शुरू किया है, इसके बजाय उसके उद्देश्य और सफलता पर ध्यान दिया जाना चाहिए।

उन्होंने देश की एकता और संप्रभुता को लेकर भी नागरिकों से सक्रिय भूमिका निभाने की अपील की।

रिपोर्ट: सैय्यद जाहिद अली रियासत
राष्ट्रीय हिंदी साप्ताहिक ‘तृप्ति प्रमाण’

स्रोत: महाराष्ट्र मुख्य निर्वाचन अधिकारी कार्यालय, भारत निर्वाचन आयोग तथा उपलब्ध मीडिया रिपोर्ट्स।

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