मरीजों को वितरित करने के बजाय दवाओं की अवधि समाप्त होने के बाद निस्तारण का संदेह; परिसर में शराब की खाली बोतलें मिलने से प्रशासन की कार्यप्रणाली पर सवाल
वाडा | पालघर
पालघर जिले के वाडा तालुका स्थित ग्रामीण अस्पताल में दवाओं के प्रबंधन को लेकर एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है। आरोप है कि मरीजों को वितरण के लिए उपलब्ध कराई गई दवाओं को समय पर वितरित करने के बजाय उनकी अवधि समाप्त होने के बाद उचित तरीके से नष्ट करने की प्रक्रिया अपनाने के बजाय अस्पताल के पीछे खुले परिसर में फेंक दिया गया।
बताया जा रहा है कि सामाजिक कार्यकर्ता योगेश वाघ ने अस्पताल के पीछे के परिसर का निरीक्षण करने के बाद इस मामले को सामने लाया।
अस्पताल के पीछे विभिन्न प्रकार की दवाओं के पैकेट, बोतलें और अन्य चिकित्सा सामग्री मिलने का दावा किया गया है। संबंधित दवाओं की एक्सपायरी डेट की जांच करने पर इनमें से कुछ दवाएं मुदतबाह्य यानी एक्सपायरी पाई गईं, ऐसा बताया गया है।
इस मामले के सामने आने के बाद सवाल उठ रहे हैं कि मरीजों को वितरण के लिए आई दवाएं समय पर मरीजों तक पहुंचीं या नहीं? इन दवाओं का भंडारण किस तरीके से किया गया? और एक्सपायरी दवाओं का निस्तारण किन नियमों के तहत किया गया?
अस्पताल के पीछे शराब की खाली बोतलें मिलने का दावा
खास बात यह है कि दवाओं के इस कथित स्टॉक के साथ अस्पताल के पीछे के परिसर में शराब की खाली बोतलें भी मिलने का दावा किया गया है।
अस्पताल परिसर में इस तरह की स्थिति सामने आने से जहां साफ-सफाई को लेकर सवाल उठ रहे हैं, वहीं अस्पताल के प्रशासन और निगरानी व्यवस्था पर भी प्रश्नचिह्न खड़ा हुआ है।
एक्सपायरी दवाओं के खुले में पड़े होने से सुरक्षा का सवाल
एक्सपायरी दवाओं का निस्तारण नियमानुसार और सुरक्षित तरीके से किया जाना अपेक्षित होता है। यदि संबंधित दवाओं को वास्तव में अस्पताल के पीछे खुले में फेंका गया है, तो इसे गंभीर मामला माना जा सकता है।
ऐसी दवाओं के संपर्क में नागरिकों, छोटे बच्चों या आवारा जानवरों के आने का खतरा पैदा हो सकता है।
दवाओं के स्टॉक और वितरण रिकॉर्ड की जांच की मांग
इस मामले की गहन जांच कर अस्पताल में दवाओं के स्टॉक, वितरण संबंधी रिकॉर्ड, एक्सपायरी दवाओं की संख्या और उनके निस्तारण की प्रक्रिया की जांच करने की मांग की जा रही है।
साथ ही अस्पताल परिसर में शराब की खाली बोतलें कैसे पहुंचीं, इसकी भी जांच करने की मांग सामाजिक कार्यकर्ताओं की ओर से की जा रही है।
अस्पताल प्रशासन की आधिकारिक भूमिका अभी सामने नहीं आई
इस बीच, इस मामले को लेकर वाडा ग्रामीण अस्पताल प्रशासन की आधिकारिक भूमिका अभी सामने नहीं आई है। संबंधित अधिकारियों से स्पष्टीकरण लिए जाने के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि अस्पताल के पीछे दवाओं का कथित स्टॉक किस वजह से पाया गया।
अब दवाओं के भंडारण से लेकर एक्सपायरी दवाओं के निस्तारण तक पूरी प्रक्रिया की जांच की जाएगी या नहीं और यदि अनियमितता सामने आती है तो संबंधित लोगों पर कार्रवाई होगी या नहीं, इस पर नागरिकों की नजर बनी हुई है।
रिपोर्टर: तृप्ति प्रमाण




