केस में राहत दिलाने के नाम पर ₹15 करोड़ मांगने का आरोप, पुलिस आयुक्त ने दिए जांच के आदेश |

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निदान हेल्थकेयर के निदेशक डॉ. नितीन थोरवे ने पुलिस अधिकारियों पर लगाए गंभीर आरोप; पुलिस का कहना है कि शुरुआती जांच में रिश्वत मांगने के आरोपों के समर्थन में सबूत नहीं मिले, जांच जारी

वसई-विरार | रिपोर्ट: तृप्ति प्रमाण

वसई-विरार में निदान हेल्थकेयर के निदेशक और कारोबारी डॉ. नितीन थोरवे ने आरोप लगाया है कि उनके खिलाफ दर्ज धोखाधड़ी के मामले में राहत दिलाने और प्रकरण निपटाने के नाम पर उनसे 15 करोड़ रुपये की मांग की गई। मंगलवार को आयोजित पत्रकार परिषद में उन्होंने पुलिस अधिकारियों पर ये गंभीर आरोप लगाए। मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस आयुक्त निकेत कौशिक ने जांच के आदेश दिए हैं।

₹20 करोड़ की कथित धोखाधड़ी के मामले में दर्ज है प्राथमिकी

जानकारी के अनुसार, जुलाई में विरार के बोलींज पुलिस थाने में मेस्त्री परिवार के साथ कथित तौर पर 20 करोड़ रुपये की धोखाधड़ी के मामले में डॉ. थोरवे के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की गई थी। बाद में मामले की जांच जबरन वसूली विरोधी दस्ते को सौंप दी गई।

पुलिस अधिकारियों पर ₹15 करोड़ मांगने का आरोप

डॉ. थोरवे का आरोप है कि जांच के दौरान बोलींज पुलिस थाने के सहायक पुलिस निरीक्षक रुपेश दलवी और जांच से जुड़े एक अन्य अधिकारी ने उनसे संपर्क किया और 15 करोड़ रुपये की मांग की। थोरवे के मुताबिक, उनसे कहा गया था कि यह रकम पुलिस आयुक्त और वरिष्ठ पुलिस निरीक्षकों तक पहुंचाई जाएगी।

डॉ. थोरवे ने दावा किया कि उन्होंने इस संबंध में पुलिस प्रशासन को लिखित शिकायत भी दी है। हालांकि, रिश्वत मांगने के इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है और मामले की जांच जारी है।

जमीन के सौदे का हवाला देकर धोखाधड़ी के आरोप खारिज

डॉ. थोरवे ने अपने खिलाफ लगाए गए धोखाधड़ी के आरोपों को खारिज किया है। उनका कहना है कि वर्ष 2007 में उन्होंने मेस्त्री परिवार के साथ विरार की जमीन का सौदा किया था और इसके लिए 66 लाख रुपये दिए थे।

उन्होंने इस मामले में उच्च न्यायालय से भी राहत मांगी है। थोरवे के अनुसार, सितंबर में अदालत ने उन्हें गिरफ्तारी से संरक्षण दिया था और मामले की अगली सुनवाई 5 दिसंबर को निर्धारित है।

पुलिस ने क्या कहा?

अपराध शाखा के सहायक पुलिस आयुक्त नितीन पाटील ने बताया कि आरोपों की जांच विरार के सहायक पुलिस आयुक्त कर रहे हैं और डॉ. थोरवे का बयान दर्ज किया जा चुका है। उनके मुताबिक, प्रारंभिक जांच में रिश्वत मांगने के आरोपों के समर्थन में कोई सबूत नहीं मिला है। हालांकि, जांच अभी जारी है।

वहीं, सहायक पुलिस निरीक्षक रुपेश दलवी ने आरोपों को निराधार बताया। उनका कहना है कि मामले की जांच जबरन वसूली विरोधी दस्ते को सौंप दी गई थी और उनका जांच से सीधा संबंध नहीं है।

जांच के नतीजों पर रहेगी नजर

एक ओर डॉ. थोरवे ने पुलिस अधिकारियों पर गंभीर आरोप लगाए हैं, वहीं संबंधित पुलिस अधिकारी इन आरोपों को खारिज कर रहे हैं। पुलिस के अनुसार, शुरुआती जांच में रिश्वत मांगने के आरोपों के समर्थन में सबूत नहीं मिले हैं, लेकिन जांच जारी है। ऐसे में मामले की वास्तविक स्थिति जांच के निष्कर्षों के बाद ही स्पष्ट हो सकेगी।

संपादकीय स्पष्टता: रिश्वत मांगने और धोखाधड़ी से जुड़े आरोपों को संबंधित पक्षों के दावों के रूप में प्रस्तुत किया गया है। इन्हें इस समाचार में सिद्ध तथ्य नहीं माना गया है।

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