‘रोडीज सीजन 5’ से मिली पहचान के बाद अब ‘बिग बॉस’, ‘खतरों के खिलाड़ी’ और अन्य रियलिटी शोज में अपनी क्षमता आजमाना चाहती हैं शांभवी
रिपोर्ट: साहिल यादव
राष्ट्रीय हिंदी साप्ताहिक तृप्ति प्रमाण न्यूज़पेपर
मनोरंजन की दुनिया में अपनी अलग पहचान बनाने वाली शांभवी शर्मा एक बार फिर रियलिटी टेलीविजन में वापसी को लेकर उत्साहित हैं। ‘रोडीज सीजन 5’ से चर्चा में आईं शांभवी का करियर मनोरंजन के साथ-साथ कानून और बिजनेस जैसे अलग-अलग क्षेत्रों से भी जुड़ा रहा है। अब उनकी दिलचस्पी ‘बिग बॉस’, ‘खतरों के खिलाड़ी’, ‘राइज एंड फॉल’ और ‘द ट्रेटर्स’ जैसे रियलिटी कार्यक्रमों में नजर आने को लेकर है।
शांभवी के मुताबिक, रियलिटी टेलीविजन उनके स्वभाव और सोच को दर्शकों के सामने रखने का प्रभावी माध्यम है। उनका मानना है कि ऐसे मंच पर किसी तय किरदार में ढलने के बजाय व्यक्ति अपनी वास्तविक पहचान के साथ सामने आ सकता है। बेबाक बातचीत, सहज अंदाज और मनोरंजक व्यक्तित्व को वह अपनी खासियत मानती हैं। हालांकि, वह यह भी स्वीकार करती हैं कि कभी-कभी बिना ज्यादा सोचे अपनी बात कह देना उनके लिए मुश्किलें खड़ी कर सकता है।
अपने विचारों को लेकर शांभवी का रुख स्पष्ट है। वह अपनी राय खुलकर रखना पसंद करती हैं और केवल दूसरों को खुश करने के लिए सहमति जताने में विश्वास नहीं करतीं। उनके अनुसार, यही स्पष्टवादिता उनकी पहचान का अहम हिस्सा है और दर्शकों के साथ जुड़ाव बनाने में भी मदद कर सकती है।
अलग-अलग शोज में आजमाना चाहती हैं अपनी क्षमता
शांभवी मानती हैं कि ‘रोडीज 5’ के बाद उनके जीवन और अनुभवों में काफी बदलाव आया है। आज वह पहले से अधिक अनुभव के साथ किसी प्रतियोगिता आधारित कार्यक्रम का हिस्सा बनने की संभावना देखती हैं। उनके लिए रियलिटी शो केवल लोकप्रियता हासिल करने का माध्यम नहीं, बल्कि अपनी सोच, धैर्य और प्रतिस्पर्धी क्षमता को परखने का अवसर भी हैं।
‘बिग बॉस’ जैसे कार्यक्रम को लेकर उनकी दिलचस्पी खास है। अलग-अलग विचारधारा और स्वभाव के लोगों के साथ एक ही छत के नीचे रहना, मतभेदों के बीच संतुलन बनाए रखना और अपनी असल पहचान कायम रखना उनके लिए एक दिलचस्प अनुभव हो सकता है। शांभवी के नजरिए से ऐसे माहौल में रिश्तों को समझना और बातचीत के जरिए परिस्थितियों का सामना करना भी एक बड़ी चुनौती होगी।
वहीं, ‘खतरों के खिलाड़ी’ जैसे शो में वह अपनी शारीरिक और मानसिक मजबूती को परखने का अवसर देखती हैं। उनके अनुसार, खुद को निडर बताना और वास्तव में किसी कठिन परिस्थिति का सामना करना दो अलग बातें हैं। वह जानना चाहती हैं कि चुनौतीपूर्ण टास्क और दबाव के दौरान उनका प्रदर्शन कैसा रहेगा।
रियलिटी टेलीविजन में बदला प्रतियोगिता का अंदाज
रियलिटी शोज के बदलते स्वरूप पर अपने विचार रखते हुए शांभवी पुराने और मौजूदा दौर के बीच अंतर भी बताती हैं। उनके अनुभव के मुताबिक, उनके ‘रोडीज’ के समय प्रतियोगियों के व्यक्तित्व, आत्मविश्वास, प्रस्तुति, समझदारी और अपनी बात रखने के तरीके को विशेष महत्व मिलता था। उस दौर में केवल शारीरिक क्षमता ही किसी प्रतिभागी की पहचान तय नहीं करती थी।
वर्तमान रियलिटी कार्यक्रमों को लेकर उनका आकलन है कि फिटनेस, शारीरिक तैयारी और टास्क में प्रदर्शन का महत्व बढ़ा है। युवा प्रतिभागियों में फिटनेस को लेकर बढ़ती जागरूकता भी इस बदलाव का एक कारण हो सकती है। साथ ही, डिजिटल प्लेटफॉर्म और सोशल मीडिया ने प्रतिभागियों के लिए अपनी पहचान को आगे बढ़ाने के नए रास्ते खोले हैं।
सोशल मीडिया ने बदला दर्शकों तक पहुंचने का तरीका
शांभवी के अनुसार, मनोरंजन जगत में शुरुआती दौर में किसी प्रतिभागी को दर्शकों के बीच पहचान बनाने के लिए टेलीविजन प्रसारण और मीडिया कवरेज पर काफी निर्भर रहना पड़ता था। अब सोशल मीडिया के जरिए किसी कलाकार का एक वीडियो या खास पल कम समय में बड़े दर्शक वर्ग तक पहुंच सकता है।
वह इस बदलाव को अपने अनुभव से भी जोड़ती हैं। उनके मुताबिक, आज ऐसे दर्शक भी उनसे परिचित हो रहे हैं, जिन्होंने उनका पुराना रियलिटी शो नहीं देखा था। वहीं, पुराने दर्शकों के लिए भी उन्हें नए सिरे से जानने का अवसर बना है। इससे अलग-अलग उम्र और पीढ़ियों के लोग एक ही व्यक्तित्व को अपने-अपने नजरिए से देख पा रहे हैं।
पहचान बनाए रखने के लिए जरूरी है अपनी अलग छाप
शांभवी का मानना है कि रियलिटी टेलीविजन का दायरा समय के साथ विस्तृत हुआ है। कार्यक्रमों की प्रस्तुति, प्रतिस्पर्धा और दर्शकों से जुड़ने के तरीकों में बदलाव आया है, लेकिन अपनी विशिष्ट पहचान की अहमियत आज भी बरकरार है।
उनके विचार में, किसी शो में नजर आना लोकप्रियता की शुरुआत हो सकता है, मगर लंबे समय तक लोगों के बीच याद रखे जाने के लिए व्यक्तित्व और दर्शकों से वास्तविक जुड़ाव जरूरी है। बदलते प्रारूपों और नई तकनीक के दौर में भी अपनी सोच, अंदाज और पहचान के दम पर प्रभाव छोड़ना ही किसी प्रतिभागी की असली ताकत बन सकता है।
रिपोर्ट: साहिल यादव
राष्ट्रीय हिंदी साप्ताहिक तृप्ति प्रमाण न्यूज़पेपर


