जनता पानीपट्टी के बढ़े हुए बिलों से परेशान, लेकिन मनपा मुख्यालय में दिवाली उपहारों के वितरण की चर्चा; आखिर सरकारी व्यवस्था में उपहारों का खर्च कौन उठा रहा है?
वसई: वसई-विरार शहर महानगरपालिका के टाउन प्लानिंग विभाग में दिवाली के अवसर पर अधिकारियों और कर्मचारियों के बीच मिठाई तथा बड़े-बड़े गिफ्ट पैकेट वितरित किए जाने की चर्चा सामने आई है। सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, मनपा मुख्यालय में दिवाली के नाम पर भैरव मिठाई और अन्य उपहारों के पैकेट पहुंचाए जा रहे हैं। इस घटनाक्रम के बाद सवाल उठ रहे हैं कि आखिर इन उपहारों का खर्च कौन उठा रहा है और इनके वितरण के पीछे क्या उद्देश्य है?
एक ओर वसई-विरार की आम जनता महंगाई और बढ़े हुए पानीपट्टी बिलों से परेशान है, वहीं दूसरी ओर मनपा मुख्यालय में दिवाली उपहारों के वितरण की चर्चा ने नागरिकों के बीच कई सवाल खड़े कर दिए हैं।
बढ़े हुए पानीपट्टी बिलों को लेकर पहले भी हुआ था विरोध
गौरतलब है कि इस वर्ष महानगरपालिका की ओर से जारी पानीपट्टी बिलों में बढ़ोतरी को लेकर कई राजनीतिक दलों ने विरोध प्रदर्शन किए और मोर्चे निकाले थे। मनपा महासभा में भी पानीपट्टी बिलों का मुद्दा उठाया गया था।
नागरिकों को उम्मीद थी कि प्रशासन और जनप्रतिनिधि इस मामले में कोई ठोस निर्णय लेकर बढ़े हुए बिलों में राहत देंगे। हालांकि, अब तक बिलों में कमी को लेकर कोई स्पष्ट समाधान सामने नहीं आया है।
ऐसे में नागरिकों के मन में सवाल है कि क्या उन्हें बढ़े हुए पानीपट्टी बिलों का पूरा भुगतान करना होगा या मनपा प्रशासन की ओर से कोई राहत दी जाएगी?
जनता के पैसों का इस्तेमाल किस काम में हो रहा है?
नागरिकों का सवाल है कि यदि दिवाली उपहारों का वितरण किसी निजी व्यक्ति या संस्था की ओर से किया जा रहा है, तो इसकी जानकारी सार्वजनिक होनी चाहिए। वहीं, यदि इसमें किसी प्रकार के सरकारी धन या अन्य लाभ का इस्तेमाल हुआ है, तो उसकी पारदर्शी जांच होनी चाहिए।
महानगरपालिका प्रशासन को स्पष्ट करना चाहिए कि टाउन प्लानिंग विभाग में वितरित किए जा रहे इन उपहारों का स्रोत क्या है, किन अधिकारियों और कर्मचारियों को ये पैकेट दिए जा रहे हैं और इनके वितरण की व्यवस्था किसके माध्यम से की गई है।
ईमानदारी और पारदर्शिता की कसौटी पर मनपा प्रशासन
वसई-विरार के नागरिक टैक्स और पानीपट्टी का भुगतान करते हैं। ऐसे में मनपा प्रशासन की जिम्मेदारी है कि जनता के पैसे का इस्तेमाल जनहित की योजनाओं, गरीबों की सहायता, स्वास्थ्य सुविधाओं और बुनियादी सेवाओं को बेहतर बनाने में किया जाए।
दिवाली उपहारों के वितरण को लेकर उठ रहे सवालों पर प्रशासन को चुप्पी साधने के बजाय स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए, ताकि नागरिकों के सामने पूरे मामले की वास्तविकता आ सके।
समाजसेवक सुनील शाह ने भी उठाए सवाल
इस मामले पर समाजसेवक सुनील शाह ने अपनी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि इस तरह दिवाली के उपहार देना उचित नहीं है। उन्होंने कहा, “जो अतिरिक्त पैसा आता है, उसका इस्तेमाल उसी काम में किया जाना चाहिए, जिसके लिए वह उपयोगी हो। इस तरह दिवाली के नाम पर उपहार बांटना उचित नहीं है। महानगरपालिका को गरीब परिवारों के घरों में भी दिवाली की खुशियां पहुंचाने के लिए काम करना चाहिए। मनपा के अधिकारी और कर्मचारी हर साल दिवाली मनाते हैं, लेकिन गरीब परिवारों के बारे में भी सोचना जरूरी है।”
अब देखना होगा कि मनपा प्रशासन इन उपहारों के स्रोत और वितरण को लेकर क्या स्पष्टीकरण देता है और नागरिकों के पानीपट्टी बिलों से जुड़े सवालों पर क्या कदम उठाता है।
रिपोर्ट: तृप्ति प्रमाण


