पटना | तृप्ति प्रमाण ब्यूरो
बिहार के सरकारी कर्मचारियों और सेवानिवृत कर्मियों के लिए कैशलेस मेडिकल ट्रीटमेंट की सुविधा शुरू करने के राज्य सरकार के निर्णय का कर्मचारी नेताओं ने स्वागत किया है। कर्मचारी महासंघ (गोप गुट) के महासचिव प्रेमचंद कुमार सिन्हा ने इस कदम का समर्थन करते हुए मुख्यमंत्री और स्वास्थ्य मंत्री को धन्यवाद दिया है।
पुरानी व्यवस्था में क्या थी समस्या?
प्रेमचंद कुमार सिन्हा के अनुसार, पहले राज्य कर्मचारियों को बाह्य इलाज के लिए प्रति माह केवल ₹1000 का भुगतान किया जाता था। गंभीर बीमारी या दुर्घटना की स्थिति में इलाज का खर्च बाद में रिइम्बर्समेंट के तौर पर मिलता था। इस प्रक्रिया में बिल और दस्तावेज जमा करने के बाद भुगतान में कई महीने या कभी-कभी सालों का समय लग जाता था।
महंगाई के इस दौर में गंभीर इलाज के लिए तत्काल व्यवस्था करना कई कर्मचारियों या उनके परिवारों के लिए आर्थिक रूप से चुनौतीपूर्ण हो जाता था। कई बार मजबूरी में कर्ज लेना भी पड़ता था।
कैशलेस सुविधा से क्या बदलेगा?
- अब कर्मचारियों को इलाज के लिए तत्काल नकद भुगतान की चिंता नहीं होगी।
- नेटवर्क अस्पतालों में सीधे कैशलेस उपचार की सुविधा मिलेगी।
- गंभीर स्थिति में समय पर बेहतर इलाज संभव हो सकेगा।
- आर्थिक दबाव में कमी आने की उम्मीद है।
नियमावली जल्द जारी करने की मांग
महासचिव प्रेमचंद सिन्हा ने सरकार से अनुरोध किया है कि कैशलेस ट्रीटमेंट से जुड़ी विस्तृत नियमावली और दिशा-निर्देश जल्द से जल्द जारी किए जाएं, ताकि कर्मचारी इस सुविधा का पूरा लाभ उठा सकें।
पुरानी पेंशन योजना पर भी जोर
इसके अलावा, महासंघ (गोप गुट) ने राज्य कर्मचारियों और उनके परिवारों के हित में पुरानी पेंशन योजना (OPS) को लागू करने की लंबित मांग पर भी शीघ्र सकारात्मक निर्णय लेने का अनुरोध किया है। संगठन का कहना है कि यह मांग कर्मचारियों के सामाजिक सुरक्षा से जुड़ी महत्वपूर्ण मांग है।