वसई-विरार,
अधिकमास अर्थात पुरुषोत्तम मास के पावन अवसर पर वसई-विरार क्षेत्र में आचार्य श्री रमाशंकर दुबे जी महाराज, उनके सुपुत्र आचार्य श्री संदीप दुबे जी महाराज तथा डॉक्टर कृष्ण गुप्ता जी के मार्गदर्शन में सात दिवसीय रुद्र महायज्ञ एवं श्रीमद्भागवत कथा का भव्य आयोजन संपन्न हुआ।
आयोजन समिति के अनुसार, इस धार्मिक कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य सनातन धर्म के प्रचार-प्रसार को बढ़ावा देना, समाज में धार्मिक चेतना का संवर्धन करना, गौमाता को राष्ट्र माता के रूप में स्थापित करना तथा शांति, सुख और समृद्धि का वातावरण निर्मित करना था।
श्रद्धालुओं में रही आस्था की अद्भुत झलक
यज्ञ स्थल पर श्रद्धालुओं की उमड़ती भीड़ देखी गई। आचार्य डॉक्टर श्री त्रिभुवनाचार्य जी द्वारा प्रस्तुत श्रीमद्भागवत कथा के प्रवचनों से भक्तों ने आध्यात्मिक आनंद अनुभव किया। आयोजन स्थल पर सनातन परंपराओं के अनुसार विधि-विधान से यज्ञ अनुष्ठान संपन्न कराए गए।
स्वास्थ्य सेवा और रक्तदान से जुड़ा सामाजिक पहलू
यज्ञ के अंतिम दिन दीनबंधु आरोग्य सेवा फाउंडेशन द्वारा एक निःशुल्क स्वास्थ्य शिविर का आयोजन किया गया। इस मेडिकल कैंप में श्रद्धालुओं को मुफ्त दवाइयां और ब्लड टेस्ट जैसी बुनियादी स्वास्थ्य सेवाएं प्रदान की गईं।
इसके अलावा आयोजित रक्तदान शिविर में लगभग 400 से 500 लोगों ने बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया और अपनी सामाजिक जिम्मेदारी निभाई। स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार, ऐसे सामुदायिक स्वास्थ्य शिविर स्थानीय जन-स्वास्थ्य के लिए महत्वपूर्ण योगदान देते हैं।
भव्य भंडारे के साथ हुआ समापन
कार्यक्रम के समापन अवसर पर भव्य भंडारे और प्रसाद वितरण का आयोजन किया गया। आयोजन समिति के मुताबिक, लगभग 5000 श्रद्धालुओं ने प्रसाद ग्रहण किया और इस धार्मिक-सामाजिक आयोजन की सफलता में अपनी भागीदारी सुनिश्चित की।
आयोजन का सामाजिक संदेश
इस आयोजन ने न केवल धार्मिक आस्था को बल प्रदान किया, बल्कि समाज में सेवा भाव और मानवता का संदेश भी दिया। विशेषज्ञों का मानना है कि धार्मिक आयोजनों के साथ स्वास्थ्य सेवा और रक्तदान जैसी सामाजिक पहलों को जोड़ना समुदाय के समग्र विकास के लिए एक सकारात्मक दृष्टिकोण है।
जांच जारी है कि भविष्य में भी ऐसे आयोजन नियमित रूप से समाज के विभिन्न वर्गों को जोड़ने और सामुदायिक कल्याण के लिए आयोजित किए जाएंगे।
संवाददाता: साहिल यादव
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