तृप्ति प्रमाण न्यूज़ पोर्टल, विरार प्रतिनिधि
महाराष्ट्र सरकार द्वारा प्लास्टिक थैलियों पर प्रतिबंध लगाए जाने के बावजूद, वसई-विरार क्षेत्र में प्रतिबंधित प्लास्टिक सामग्री का उपयोग जारी है। इसका सीधा असर शहर की स्वच्छता और जल निकासी व्यवस्था पर पड़ रहा है। सड़कों, नालों और खाली प्लॉट्स पर प्लास्टिक कचरे के जमावड़े को देखते हुए नागरिकों ने महानगरपालिका प्रशासन से इस दिशा में प्रभावी कदम उठाने की मांग की है।
मानसून से पहले नाला सफाई अभियान शुरू
बारिश के मौसम को देखते हुए वसई-विरार महानगरपालिका ने नाला सफाई अभियान शुरू कर दिया है। छोटे नालों की सफाई कर्मचारी कर रहे हैं, जबकि बड़े नालों में आधुनिक मशीनों का उपयोग किया जा रहा है। इस अभियान के तहत नालों से गाद निकाली जा रही है, ताकि बारिश के पानी का बहाव सुचारु रहे और शहर में जलभराव की स्थिति न बने।
नालों से निकल रही भारी मात्रा में प्लास्टिक सामग्री
सफाई अभियान के दौरान नालों से भारी मात्रा में प्लास्टिक थैलियां, बोतलें और अन्य प्लास्टिक सामग्री निकाली जा रही है। विशेषज्ञों के अनुसार, नालों में प्लास्टिक जमा होने से पानी का बहाव धीमा हो जाता है, जिससे बारिश के दौरान कई इलाकों में जलभराव की समस्या उत्पन्न हो सकती है।
साप्ताहिक बाजार बन रहे हैं प्लास्टिक कचरे का बड़ा स्रोत
शहर में लगने वाले साप्ताहिक बाजारों से भी बड़ी मात्रा में प्लास्टिक कचरा उत्पन्न हो रहा है। ये थैलियां अक्सर नालों और सड़कों पर पहुंच जाती हैं। नागरिकों का सुझाव है कि साप्ताहिक बाजारों में कपड़े या कागज के थैलों के उपयोग को बढ़ावा दिया जाए, ताकि प्लास्टिक कचरे पर अंकुश लगाया जा सके और नालों पर पड़ने वाला दबाव कम हो।
प्रशासन का कहना- अभियान जारी, नागरिकों का सहयोग जरूरी
इस संबंध में महानगरपालिका के आरोग्य विभाग के अधिकारी जितेंद्र नाइक ने बताया कि प्रतिबंधित प्लास्टिक के खिलाफ नियमित कार्रवाई की जा रही है। बाजारों और व्यावसायिक प्रतिष्ठानों पर समय-समय पर जांच होती है और नालों से निकाले गए प्लास्टिक कचरे का वैज्ञानिक तरीके से निस्तारण किया जा रहा है। उन्होंने बताया कि इस समस्या से निपटने के लिए नागरिकों का सहयोग भी बहुत आवश्यक है, क्योंकि प्लास्टिक का बढ़ता उपयोग स्वच्छता व्यवस्था के लिए एक बड़ी चुनौती है।